चीन का अक्षय ऊर्जा सम्बन्धी नेतृत्व: ब्रिक्स और उसके बाद
चीन इस साल होने वाली ब्रिक्स की वार्षिक शिखर बैठक की मेजबानी करेगा और आगामी 3 से 5 सितम्बर तक झियामेन( चीन) में 9वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। इस सम्मेलन का मुख्य एजेंडा आर्थिक सहयोग तथा वैश्विक सुशासन को मजबूत करने पर केन्द्रित है। ब्रिक्स देशों ने न्यू डेवलपमेंट बैंक और मंत्रालय के सहयोग से अक्षय ऊर्जा का संयुक्त रूप से विकास करने का दृढ़ संकल्प लिया है। इससे उसे ब्रिक्स देशों तथा बाकी दुनिया में अक्षय ऊर्जा के विकास को बढ़ावा देने में देश की केन्द्रीय भूमिका को रेखांकित करने का सुनहरा अवसर मिलेगा।

वित्तीय विश्लेषण संबंधी फर्म इक्वेटोरियल के मैनेजिंग पार्टनर जय शारदा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अक्षय ऊर्जा की मांग की पूर्ति में ब्रिक्स देशों का प्रमुख भूमिका निभाना जारी है। ब्रिक्स देश अक्षय ऊर्जा क्षमता में कुल निवेश के करीब 40% हिस्से का योगदान करते हैं। हालांकि वर्ष 2016 में ब्रिक्स देशों के संपूर्ण अक्षय ऊर्जा निवेश में आई गिरावट यह बताती है कि अभी बहुत काम किया जाना बाकी है और एनडीबी जैसे बैंक इसके लिए बिल्कुल उपयुक्त हैं।
एन डी बी बैंक ने हाल में घोषणा की है कि वह वर्ष 2017 में 3 अरब डॉलर के निवेश को अपना लक्ष्य बना रहा है। इसके अलावा वह निजी क्षेत्र के वित्तपोषण पर भी नजर गड़ाए हुए है। यह भी सही दिशा में एक कदम कहा जा सकता है। यह एनडीबी द्वारा अपने वित्त पोषण संबंधी अपनी वित्त पोषण संबंधी गतिविधियों का एक मजबूत उदाहरण है। भारत इस वक्त वायु तथा सौर ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से विस्तार के जरिए रूपांतरण के दौर से गुजर रहा है। भारत सरकार अक्षय ऊर्जा को लेकर अपनी महत्वाकांक्षाओं को तेजी से बढ़ा रही है और वर्ष 2027 तक उसके अक्षय ऊर्जा उत्पादन के 275 गीगावॉट के स्तर तक पहुंच जाने का अनुमान है। देश में कुल बिजली उत्पादन क्षमता में अक्षय ऊर्जा संयंत्रों का योगदान 17 प्रतिशत से ज्यादा है। इस आकांक्षा के साथ भारत के पास वैश्विक ऊर्जा तंत्र के भविष्य में मूलभूत बदलाव लाने की क्षमता है।
ब्रिक्स देश दुनिया में अक्षय ऊर्जा की पैरोकार शक्ति के रूप में उभरे हैं। जून में ब्रिक्स देशों के ऊर्जा मंत्री बीजिंग में क्लीन एनर्जी मिनिस्ट्रियल के तहत मिले थे। इसमें एक संयुक्त बयान जारी किया गया था, जिसमें अक्षय ऊर्जा विकास को बढ़ावा देने के इरादे को परस्पर सहयोग प्रदान करने का संकल्प लिया गया था। जुलाई में आयोजित हैम्बर्ग जी20 समिट में भी ब्रिक्स के नेताओं ने पेरिस समझौते के प्रति अपने समर्थन को औपचारिक रूप से दोहराया था।
दुनिया में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में ब्रिक्स देशों की बढ़ती हिस्सेदारी स्वच्छ ऊर्जा के प्रति उनके संकल्प की गवाही देती है। वर्ष 2016 में दुनिया में स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत थी जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में ब्रिक्स देशों की भागीदारी (वर्ष 2015 में 22.5 प्रतिशत) से ज्यादा है। ब्रिक्स देशों की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता में दो तिहाई हिस्सेदारी के साथ चीन का दबदबा है, लेकिन ब्राजील और भारत भी मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। ये दोनों ही दुनिया के कुल अक्षय ऊर्जा उत्पादन में करीब 5 प्रतिशत का योगदान करते हैं। रूस और दक्षिण अफ्रीका काफी छोटे योगदानकर्ता देश हैं लेकिन उनका अक्षय ऊर्जा उत्पादन भी बढ़ रहा है।

अक्षय ऊर्जा निवेश में वृद्धि पर ब्रिक्स की नजर
वैश्विक पटल पर अक्षय ऊर्जा के विकास में ब्रिक्स की भूमिका आने वाले वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ने का अनुमान है। कुल मिलाकर ब्रिक्स देशों द्वारा अक्षय ऊर्जा के सिलसिले में तय किये गये लक्ष्यों से वर्ष 2020 से 2030 के बीच पांच देशों में ऐसी स्थापित ऊर्जा की मात्रा बढ़कर 1251 गीगावॉट हो जाएगी। इसके परिणामस्वरूप करीब 498 गीगावॉट उत्पादन की बढ़ोत्तरी होगी, जो दुनिया में इस वक्त स्थापित कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता का करीब 25 प्रतिशत होगा।
मांग की पूर्ति करने के लिये भारी निवेश की जरूरत है। अक्षय ऊर्जा में निवेश के मामले में चीन सबसे आगे है। उसने वर्ष 2016 में इस क्षेत्र में 78.3 अरब डॉलर का तथा साल 2015 में 102.9 अरब डॉलर का निवेश किया था जो दुनिया में इस क्षेत्र में निवेशित कुल धनराशि के एक तिहाई हिस्से से भी ज्यादा है। बहरहाल, दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर चीन तथा अन्य बाकी ब्रिक्स देशों को अपने अक्षय ऊर्जा सम्बन्धी लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये और अधिक धन की जरूरत है। वर्ष 2015 में ब्रिक्स देशों ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश में 51 अरब डॉलर की गिरावट देखी।
अन्तर को पाटने में मदद के लिये वर्ष 2015 में ब्रिक्स न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) की स्थापना की गयी थी। बैंक द्वारा दिये गये सात में से छह कर्जों यानी कुल ऋण का 78 प्रतिशत हिस्सा पांच ब्रिक्स देशों में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में मदद के लिये दिया गया है। चूंकि एनडीबी आने वाले वर्षों में अपना पोर्टफोलियो बढ़ाएगा, इसलिये बैंक के अध्यक्ष ने करीब 60 प्रतिशत कर्ज अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के लिये देने का संकल्प लिया है। अन्य बहुपक्षीय विकास बैंकों द्वारा अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिये बहुत थोड़ी मात्रा में वित्तपोषण किये जाने के मद्देनजर एनडीबी के अध्यक्ष का यह संकल्प काफी मायने रखता है। वर्ष 2008 से 2014 के बीच विश्व बैंक द्वारा कुल वित्तपोषण का केवल 25.6 प्रतिशत हिस्सा ही अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिये दिया गया।
ब्रिक्स के अक्षय ऊर्जा सम्बन्धी आंकड़े एवं लक्ष्य
ब्राजील
ब्राजील दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा ऊर्जा बाजार है। वर्ष 2015 में इसकी कुल स्थापित ऊर्जा उत्पादन क्षमता 141 गीगावॉट थी। इसके कुल उत्पादन का प्रमुख हिस्सा पनबिजली परियोजनाओं से आता है। वर्ष 2015 में ब्राजील में उत्पादित बिजली का करीब 74 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाष्मीय ईंधन से पैदा किया गया था। वर्ष 2016 के अंत तक ब्राजील में 123 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी थी, जिसमें 98 गीगावॉट बड़े हाइड्रोपॉवर की थी।
ब्राजील ने वर्ष 2015 में अपना एनर्जी प्लान 2024 जारी किया था। इसमें वर्ष 2024 तक कुल स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता को 173.6 गीगावॉट तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया है।
ब्राजील के 2024 प्लान में सौर तथा वायु बिजली के मुकाबले ज्यादातर ध्यान पनबिजली क्षमता को बढ़ाने पर दिया गया है।
रूस
रूस में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े पनबिजली बांधों का दबदबा है। वर्ष 2015 के अंत तक रूस में 53.5 गीगावॉट की स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता थी, जो रूस की कुल बिजली उत्पादन क्षमता (253 गीगावॉट) के करीब 20 प्रतिशत हिस्से के बराबर है। कुल स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता में करीब 51.5 गीगावॉट की हिस्सेदारी पनबिजली की है। अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोतों का योगदान एक प्रतिशत से भी कम है।
वर्ष 2030 तक के लिये रूस की एनर्जी स्ट्रैटेजी यह कहती है कि वर्ष 2020 तक उसके कुल बिजली उत्पादन का साढ़े चार प्रतिशत हिस्सा अक्षय ऊर्जा से प्राप्त होगा। इसमें बड़ी पनबिजली परियोजनाएं शामिल नहीं हैं। आईईईएफए के अनुसार इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये वर्ष 2020 तक ऊर्जा उत्पादन तंत्र में 22 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा का इजाफा करना होगा।
आईआरईएनए के अनुसार पनबिजली समेत तमाम अक्षय ऊर्जा विकल्पों में वर्ष 2030 तक रूस के कुल ऊर्जा उपभोग के 11.3 प्रतिशत हिस्से का बोझ उठाने की क्षमता है।
भारत
वर्ष 2015 के अंत तक भारत की कुल स्थापित ऊर्जा उत्पादन क्षमता में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत थी। इसमें बड़ी पनबिजली परियोजनाएं शामिल नहीं हैं। वर्ष 2016 के अंत तक भारत में बड़ी पनबिजली परियोजनाओं को मिलाकर कुल 91 गीगावॉट उत्पादन क्षमता की स्थापित क्षमता थी।आईईईएफए के अनुमान के मुताबिक भारत ने वर्ष 2015 में अपने कुल बिजली उत्पादन का 15 प्रतिशत हिस्सा अक्षय ऊर्जा स्रोतों से हासिल किया। भारत सरकार के अनुमान के अनुसार वर्ष 2030 तक यह योगदान 40 प्रतिशत तक होगा।
वर्ष 2015 में भारत ने वर्ष 2022 तक अपनी अक्षय ऊर्जा क्षमता को 175 गीगावॉट तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसमें 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा, 60 गीगावॉट पनबिजली, 10 गीगावॉट बायोएनर्जी से तथा पांच गीगावॉट लघु पनबिजली परियोजनाओं से प्राप्त किया जाना था। इस तरह सात वर्षों में अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता में पांच गुना बढ़ोत्तरी की जानी थी। भारत ने साल दर साल का लक्ष्य भी तय किया था, जिसके जरिये 2022 के लक्ष्य की प्राप्ति होनी है।
भारत की 13वीं राष्ट्रीय बिजली योजना का मसविदा वर्ष 2016 के अंत में जारी किया गया था। इसमें वर्ष 2027 तक बड़े पनबिजली ऊर्जा संयंत्रों को छोड़कर अन्य अक्षय स्रोतों से 275 गीगावॉट उत्पादन क्षमता वाले संयंत्र स्थापित करने का अनुमान व्यक्त किया गया था।
चीन
वर्ष 2015 के अंत तक चीन की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में अक्षय ऊर्जा का योगदान करीब 17 प्रतिशत था। इसमें बड़ी पनबिजली परियोजनाओं की हिस्सेदारी शामिल नहीं है। वर्ष 2016 के अंत तक चीन बड़ी पनबिजली परियोजनाओं समेत 545 गीगावॉट उत्पादन क्षमता वाले अक्षय ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना कर चुका था। चीन ने वर्ष 2012 में अपनी कुल बिजली उत्पादन क्षमता में से 24.5 प्रतिशत हिस्सा अक्षय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त किया। इसमें पनबिजली परियोजनाओं से प्राप्त भाग भी शामिल है। चीन ने आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिये अपनी 13वीं पंचवर्षीय योजना जारी की है। इसमें जलवायु तथा ऊर्जा सम्बन्धी लक्ष्य तय किये गये हैं। इसके अलावा ऊर्जा उपभोग की सीमा तय किये जाने के साथ-साथ देश के प्राथमिक ऊर्जा मिश्रण में गैर-जीवाश्म आधारित ऊर्जा की 15 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। चीन की बिजली तथा ऊर्जा सम्बन्धी 13वीं पंचवर्षीय योजना में 110 गीगावॉट सौर तथा 210 गीगावॉट वायु बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इस अवधि में पनबिजली उत्पादन क्षमता में 65 गीगावॉट तक की वृद्धि होने का अनुमान है। इस तरह इसे वर्ष 2015 के 320 गीगावॉट क्षमता के मुकाबले 2020 तक 384 गीगावॉट तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

चीन की 13वीं पंचवर्षीय योजना (2020) के अंत तक देश का 39 प्रतिशत बिजली उत्पादन अक्षय ऊर्जा स्रोतों से होगा, जबकि कोयला आधारित संयंत्रों से 55 प्रतिशत बिजली पैदा होगी।
दक्षिण अफ्रीका
दक्षिण अफ्रीका काफी हद तक जीवाश्म जनित ईंधन पर निर्भर करता है, लेकिन उसका अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र भी बहुत तेजी से बढ़ रहा है। मार्च 2015 में देश में पनबिजली परियोजनाओं को छोड़कर बाकी अक्षय ऊर्जा स्रोतों से 1.8 गीगावॉट बिजली का उत्पादन होता था जो मार्च 2016 तक 2.1 गीगावॉट हो गया। वर्ष 2016 के अंत तक दक्षिण अफ्रीका ने पनबिजली परियोजनाओं समेत चार गीगावॉट क्षमता वाले अक्षय ऊर्जा स्रोतों की स्थापना कर ली थी।
अपने इंटिग्रेटेड रसोर्स प्लान (आईआरपी) के तहत दक्षिण अफ्रीका वर्ष 2030 तक 17.8 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने की योजना बना रहा है।












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