China Hydrogen Bomb: 1000°C की आग और 'सर्जिकल तबाही', चीन के हाइड्रोजन बम से भारत को कितना खतरा?
China Hydrogen Bomb: चीन के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक गैर-परमाणु हाइड्रोजन बम का सफल परीक्षण किया है। चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक यह बम चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के स्वच्छ ऊर्जा समाधानों की ओर बढ़ते कदम का हिस्सा है।
कैसा है यह बम?
यह 2 किलोग्राम वजनी विस्फोटक चीन के 705 रिसर्च इंस्टीट्यूट (CSSC) द्वारा विकसित किया गया है, जो पनडुब्बी हथियार प्रणालियों में विशेषज्ञता रखता है। यह पारंपरिक न्यूक्लियर बमों से अलग है क्योंकि इसमें मैग्नीशियम हाइड्राइड नामक ठोस हाइड्रोजन भंडारण सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, जो सामान्य प्रेशर टैंकों की तुलना में अधिक हाइड्रोजन स्टोर कर सकता है।
बम के सक्रिय होने पर यह 1000 डिग्री सेल्सियस से अधिक की आग का गोला बनाता है, जो दो सेकंड से भी अधिक समय तक जलता है। जो TNT विस्फोटों की तुलना में लगभग 15 गुना अधिक होता है।

कैसे हुआ परीक्षण?
चीनी जर्नल Journal of Projectiles, Rockets, Missiles and Guidance में प्रकाशित पेपर के अनुसार, परीक्षण के दौरान इस बम से 428.43 किलो पास्कल का अधिकतम ओवरप्रेशर दर्ज किया गया। यह TNT विस्फोट के मुकाबले करीब 40% कम है, लेकिन उत्पन्न गर्मी कहीं अधिक घातक थी।
जब विस्फोट होता है, तो मैग्नीशियम हाइड्राइड पाउडर टूटकर महीन टुकड़ों में बदल जाता है और तेजी से हाइड्रोजन गैस छोड़ता है। यह गैस हवा में मिलकर तीव्र आग बनाती है, जिससे एक सेल्फ-फीडिंग कम्बशन लूप बनता है।
बम की ताकत क्या है?
- यह बम एक ही विस्फोट नहीं करता, बल्कि कई सेकंड तक तेज़ गर्मी छोड़ता है जिससे खुले मैदान में फैली दुश्मन सेना को नष्ट किया जा सकता है।
- ब्रिज, फ्यूल डिपो या कम्युनिकेशन हब जैसे अहम ठिकानों को सर्जिकल स्ट्राइक की तरह टारगेट किया जा सकता है।
- बिना बड़े इलाके को तबाह किए, चुने हुए लक्ष्य को भारी नुकसान पहुँचाया जा सकता है।
PLA का क्लीन एनर्जी की ओर कदम
PLA अपनी सैन्य क्षमताओं को क्लीन एनर्जी तकनीकों के साथ अपग्रेड कर रही है। मार्च 2025 में चीन ने 7.2% की बढ़ोतरी के साथ $249 अरब डॉलर का रक्षा बजट पेश किया।
ताइवान विवाद और अमेरिका से बढ़ता तनाव
यह परीक्षण ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका ताइवान को रक्षा सहायता बढ़ा रहा है और चीन दक्षिण चीन सागर में अपना दबदबा स्थापित करना चाहता है। PLA ने हाल ही में ताइवान के चारों ओर लाइव फायर ड्रिल्स सहित बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास किए।
भारत के लिए कितना खतरा?
वहीं चीन के इस हथियार से भारत को सीधा युद्ध का खतरा नहीं है, लेकिन चीन की यह तकनीक एक चेतावनी जरूर है। कि वो अगली पीढ़ी के क्लीन लेकिन डेडली हथियारों की ओर बढ़ रहा है। भारत को इससे खतरे को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि रक्षा टेक्नोलॉजी और इंटेलिजेंस मॉनिटरिंग को और मजबूत करना होगा।
क्योंकि इस वक्त चीन के साथ संबंध कुछ बेहतर हुए हैं लेकिन समय-समय पर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता ही रहता है।
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