Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

मुख्य सचिव विवाद: आम आदमी पार्टी को कितना नफ़ा-नुकसान?

अरविंद केजरीवाल
Getty Images
अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के आवास पर आधी रात को उनके साथ मारपीट की गई.

इन बेहद गंभीर आरोपों के बाद दिल्ली पुलिस ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास पर छानबीन की है और सीसीटीवी फुटेज ज़ब्त किए हैं. हमले के आरोप में गिरफ़्तार आम आदमी पार्टी के दो विधायकों अमानतउल्लाह ख़ान और प्रकाश जारवाल को ज़मानत नहीं मिली है.

वहीं, आम आदमी पार्टी का कहना है कि मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के आरोप झूठे हैं. लेकिन सवाल ये है कि क्या इस स्तर का अधिकारी झूठे आरोप लगाएगा?

कम से कम दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव उमेश सहगल को तो ऐसा नहीं लगता.

सहगल कहते हैं, "वो नेता नहीं हैं, ज़रा सा झूठ उनकी नौकरी ले सकता है. उन्होंने मुक़दमा दर्ज करवाया है जिसकी न्यायिक जांच होगी, हो सकता है कि सुनवाई उच्च अदालत में भी हो जाए. वो भली-भांति जानते हैं कि ऐसी स्थिति में झूठ बोलने से वो मुश्किल में पड़ सकते हैं."

उमेश सहगल कहते हैं, "मेरा मानना है कि ये पूरी परिस्थिति बनाई गई है. मुख्य सचिव की नियुक्ति गृह मंत्रालय करता है और ये कोई नया नियम नहीं है. लेकिन पिछले तीन सालों में पहले दिन से ये टकराव की राजनीति कर रहे हैं. हर मुद्दे पर टकराव किया जा रहा है. लेफ़्टिनेंट गवर्नर कुछ कहते हैं तो उन्हें बीजेपी का एजेंट बता दिया जाता है. दरअसल आम आदमी पार्टी ने वादे इतने ज़्यादा कर लिए थे जिन्हें पूरा करना उनके बस का नहीं हैं और वो ये बात जानते हैं. टकराव की राजनीति इस नौबत तक पहुंच गई है कि आज ब्यूरोक्रेट और नेता आपस में लड़ रहे हैं."

'मेरे घर पर पुलिस भेजी, अमित शाह से पूछताछ कब'

सरकार के तीन साल, कई सवालों में घिरे केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल
Getty Images
अरविंद केजरीवाल

मुख्यमंत्री विवाद टाल सकते थे

उमेश कहते हैं, "कई बार गुस्से में अपशब्द भी निकल जाते हैं. लेकिन जब ऐसा मुख्यमंत्री जैसे वरिष्ठ व्यक्ति के सामने होता है तो वो स्थिति को संभाल सकते थे. वो अधिकारी से कहते हैं कि डोंट माइंड और नेताओं को भी चुपा देते हैं. हमारे साथ भी कई बार ऐसा हुआ. लेकिन अगर मुख्यमंत्री ही इसमें शामिल हो जाएं तो कोई क्या कर सकता है. मानना बहुत मुश्किल है कि ऐसा हुआ होगा. "

वहीं, वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जोशी मानते हैं कि ये घटनाक्रम बता रहा है कि दिल्ली की राजनीति ख़राब दिशा में जा रही है.

प्रमोद जोशी कहते हैं, "पिछले तीन साल से हम राजनीतिक टकराव तो देख ही रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केजरीवाल के निशाने पर रहे लेकिन अगर ब्यूरोक्रेसी को भी इसमें शामिल करेंगे तो इससे राजनीति बेहद ख़राब रास्ते पर चली जाएगी. "

वो कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि मुख्य सचिव किसी राजनीतिक कारण से ऐसा आरोप लगाएंगे. हो सकता है मारपीट न भी हुई बदतमीज़ी ही हुई हो, लेकिन ये भी ठीक नहीं है."

AAP vs IAS : विधायक गिरफ़्तार, जानिए किसने क्या कहा?

क्यों टकरा रही आप?

आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों की सदस्यता रद्द होने के बाद दिल्ली में उपचुनावों की संभावना भी जताई जा रही है. प्रमोद जोशी कहते हैं, "यदि जल्दी ही कोई उपचुनाव होते हैं तो आम आदमी पार्टी टकराव के माध्यम से ये संदेश देना चाहती है कि हमें काम नहीं करने दिया जा रहा है."

सत्ता में आने के बाद से ही आम आदमी पार्टी केंद्र की भारतीय जनता पार्टी, केंद्र की ओर से नियुक्त लेफ़्टिनेंट गवर्नर और अधिकारियों पर काम में सहयोग न करने के आरोप लगाती रही है. आम आदमी पार्टी का तर्क है कि वो जनहित में काम करना चाहती है, लेकिन केंद्र सरकार और एलजी उसे काम नहीं करने दे रहे हैं.

मुख्य सचिव के आरोपों के बाद भी आम आदमी पार्टी यही तर्क दे रही है. लेकिन आम आदमी पार्टी के इस तर्क में कितना दम है?

केजरीवाल समर्थक
Getty Images
केजरीवाल समर्थक

प्रमोद जोशी कहते हैं, "दिल्ली की स्थिति अलग है, ये एक केंद्र शासित प्रदेश भी है. अगर कोई विवाद का विषय है तो उसमें अदालत की व्यवस्था का इंतज़ार करना चाहिए. झगड़े फसाद करके, मारपीट करके या आरोप लगाकर वो हल नहीं होगा. 1993 में संवैधानिक संशोधन हुआ था, तब से कोई विवाद नहीं हुआ तो फिर अब ही इस तरह के विवाद क्यों हो रहे हैं?"

प्रमोद जोशी ये भी कहते हैं कि आम आदमी पार्टी जिन मूल्यों को लेकर राजनीति में आई थी और जो बहुमत लेकर आई थी उसको ध्यान में रखते हुए इस तरह की बातें पार्टी को शोभा नहीं देती.

वो कहते हैं, "इस पूरे प्रकरण से आम आदमी पार्टी को कोई फ़ायदा होता नहीं दिख रहा है लेकिन यदि ये अदालत में साबित हो गया कि मुख्य सचिव झूठ बोल रहे थे तब ज़रूर आप को फ़ायदा होगा. लेकिन मुख्य सचिव कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं. ये मानना मुश्किल है कि वो झूठ बोल रहे होंगे."

https://twitter.com/AamAadmiParty/status/966942253515075584?

मुश्किलों के भंवर से निकल पाएंगे केजरीवाल?

केजरीवाल जी! अपनी विधायक को छुट्टी दे दीजिए

लोकतंत्र की भाषा नहीं समझते केजरीवाल

दिल्ली से भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी कहती हैं कि ये घटनाक्रम अरविंद केजरीवाल की तानाशाही राजनीति की ही झलक है.

लेखी कहती हैं, "लोकतंत्र के अंदर राजनीति लोकतांत्रिक भाषा में होती है. केजरीवाल के चार सालों के क्रियाकलापों को देखा जाए तो समझ आता है कि उनकी राजनीति तानाशाही की राजनीति है. इस तरह का खिलवाड़ वही लोग कर सकते हैं जिनका क़ायदे क़ानून या लोकतंत्र में कोई विश्वास ही न हो."

लेखी कहती हैं, "केजरीवाल काम करने की नीयत से आए ही नहीं हैं, बल्कि ये अपने आप को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाना चाहते थे. दिल्ली का तो बस ये इस्तेमाल कर रहे हैं. इन्होंने वादे बहुत ज़्यादा कर लिए और अब उन्हें पूरा नहीं कर पा रहे हैं तो जनता का ध्यान भटकाने के लिए विवादों का सहारा ले रहे हैं."

https://twitter.com/AamAadmiParty/status/967062252464439297

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी सभी आरोपों को खारिज करते हुए तर्क दे रही है कि केंद्र की भाजपा सरकार दिल्ली में उनकी सरकार को बर्खास्त करने के बहाने खोज रही है. आप विधायक सौरभ भारद्वाज कहते हैं, "सब जानते हैं कि हमें काम नहीं करने दिया जा रहा है. हम जो भी करना चाह रहे हैं उसमें हर स्तर पर रोड़े अटकाए जा रहे हैं और अब बात यहां तक आ गई है कि मुख्य सचिव से झूठ बुलवाया गया."

सौरभ भारद्वाज कहते हैं, "बीजेपी इस समय दिल्ली में गुप्त सर्वे करवा रही होगी. अगर उन्हें लगेगा कि दिल्ली सरकार को बर्खास्त करके वो चुनाव जीत सकते हैं तो वो दिल्ली सरकार को बर्खास्त कर देंगे और अगर उन्हें लगेगा कि अब भी केजरीवाल जीत जाएगा तो वो सरकार को बर्खास्त नहीं करेंगे. ये मामला बस इतना ही है."

सौरभ भारद्वाज कहते हैं, "जब शुरू-शुरू में हमारे साथ ये सब होता था तो हम सोचते थे, लेकिन अब ये सब हमारे लिए आम बात हो गई है. हमें उच्च वर्ग की राय की परवाह नहीं हैं. हम दिल्ली के आम लोगों के लिए काम कर रहे हैं और लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं हमें बस इससे फ़र्क पड़ता है, हमें बस लोगों के लिए काम करना है."

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+