चिदंबरम ने गरीबों-मजदूरों पर सरकार को घेरा, लेकिन एक वजह से तारीफ भी की

नई दिल्ली- वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने लॉकडाउन में मोदी सरकार पर गरीबों-मजदूरों के प्रति क्रूर और लापरवाह रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने बेरोजगारी दर को लेकर भी सरकार पर जोरदार हमला किया है। उन्होंने हाल ही में बेरोजगारी पर आए एक डेटा को लेकर सरकार की तीखी आलोचना की है। उनकी शिकायत है कि गरीबों के एक वर्ग के हाथ में एक भी पैसा नहीं है और सरकार उनके प्रति लापरवाही बरत रही है। उन्होंने ऐसे लोगों को फौरन पैसे देने की वकालत की है। हालांकि, लॉकडाउन पर राज्यों की सुनने के लिए उन्होंने सरकार की तारीफ भी की है।

गरीबों को तुरंत पैसा दे सरकार- चिदंबरम

गरीबों को तुरंत पैसा दे सरकार- चिदंबरम

पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने लॉकडाउन की वजह से सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी का हवाला देकर देश में बेरोजगारी दर 23 फीसदी से ज्यादा बढ़ने का दावा करते हुए मोदी सरकार की जमकर खिंचाई की है। साप्ताहिक आधार पर बेरोजगारी का डाटा देने वाली बिजनेस इनफॉर्मेशन कंपनी ने अनुमान लगाया है कि 22-23 मार्च को खत्म हुए हफ्ते में बेरोजगारी दर 8.4 फीसदी से बढ़ चुकी है। इसके आधार पर मोदी सरकार पर हमला करते हुए चिदंबरम ने आरोप लगाया है कि सरकार की लापरवाही के चलते गरीबों की हालत बहुत ही खराब हो चुकी है। उन्होंने ट्वीट किया है, "23% बेरोजगारी दर(सीएमआईई) और दैनिक मजदूरी या आय पर एक फ्रीज के साथ, सरकार को तुरंत गरीबों को संसाधन और प्रतिपूर्ति (नकद देना) देना होगा। सरकार की दयनीय और क्रूर लापरवाह दृष्टिकोण ने गरीबों की कठिनाइयों को बढ़ा दिया है।"

राज्यों से बातचीत का स्वागत- चिदंबरम

राज्यों से बातचीत का स्वागत- चिदंबरम

चिदंबरम ने आरोप लगाया है कि लॉकडाउन में जैसे गरीबों को पूरी तरह ऐसे ही छोड़ दिया गया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है "लॉकडाउन की रणनीति में जो चीज गायब है, वह गरीबों के हाथों में नकदी। गरीबों के कई वर्ग ऐसे हैं जिन्हें सरकार से एक भी रुपया नहीं मिला है।" हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने 14 अप्रैल के बाद भी लॉकडाउन जारी रखने को लेकर केंद्र के राज्यों के साथ चर्चा करने की तारीफ भी की है। उन्होंने कहा है, "लॉकडाउन की वकालत करने वालों में से मैं आगे हूं, मैं केंद्र सरकार की ओर से क्या लॉकडाउन 14 अप्रैल के बाद हटाना चाहिए को लेकर राज्यों के साथ विचार-विमर्श का स्वागत करता हूं।" बता दें कि लॉकडाउन की वजह से कई प्रवासी मजदूर बेरोजगार हो गए हैं और उनमें से कई अभी देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों ने गरीबों के लिए कई राहत पैकेज जारी भी किए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि उसमें सबका कवर हो पाना मुश्किल है। यही वजह है जिसको लेकर चिदंबरम और कांग्रेस सरकार की आलोचना कर रहे हैं।

कई राज्य कर रहे हैं लॉकडाउन बढ़ाने की मांग

कई राज्य कर रहे हैं लॉकडाउन बढ़ाने की मांग

दरअसल, मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना और महाराष्ट्र समेत कई राज्य लॉकडाउन को 14 अप्रैल के बाद भी जारी रखने और उसे चरणबद्ध तरीके से हटाए जाने की मांग कर रहे हैं। यही नहीं भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए खुद पीएम मोदी भी इस संकट को लंबी लड़ाई कहकर संकेत दे चुके हैं कि सरकार इस पर विचार कर सकती है। बता दें कि 24 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी ने सिर्फ 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की थी, जो 14 अप्रैल को पूरा हो रहा है। लेकिन, उसके बाद से देश में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या में बहुत ज्यादा इजाफा हो गया है। माना जा रहा है कि इस पर केंद्र सरकार कोई आखिरी फैसला शनिवार यानि 11 अप्रैल को मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के बाद सब की सहमति जानकर ले सकती है।

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