मध्य प्रदेश: लॉकडाउन में ये सांसद क्षेत्र के लोगों के लिए खुद से मास्क बना रहे हैं

नई दिल्ली- कोरोना के खिलाफ लड़ाई में मास्क एक बहुत ही कारगर हथियार साबित हो रहा है। लेकिन, मांग के मुताबिक सबके लिए मास्क उपलब्ध हो पाना मुश्किल है। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी के स्तर तक पर घर में बने मास्कों के इस्तेमाल की अपील की जा रही है। क्योंकि, कोरोना से बचने के लिए चेहरा ढकना बहुत जरूरी है। ऐसे में मध्य प्रदेश के रीवा से सांसद ने खुद ही अपने क्षेत्र के गरीबों तक मुफ्त में मास्क बनाकर पहुंचाने की ठान ली है। लॉकडाउन में उनके लिए क्षेत्र में कहीं जाना-आसान आसान नहीं है। इसके चलते उन्होंने पहले सिलाई सीखी है और फिर खुद से कपड़ों का मास्क बनाना शुरू कर दिया है। आवश्यकता बढ़ता देख उन्होंने अब इस काम में प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र की प्रशिक्षित छात्राओं की भी सहायता लेनी शुरू कर दी है, ताकि क्षेत्र में जरूरतमंदों को मास्क की कोई दिक्कत न रहे।

क्षेत्र के लिए खुद से मास्क बना रहे हैं ये सांसद

क्षेत्र के लिए खुद से मास्क बना रहे हैं ये सांसद

पूरा देश इस समय लॉकडाउन है। लेकिन, मध्य प्रदेश के रीवा संसदीय क्षेत्र के सांसद जनार्दन मिश्रा शायद इस खाली वक्त का जो बेहतर इस्तेमाल कर रहे हैं उसका उदाहरण कहीं देखने को नहीं मिलता है। भाजपा सांसद अपने क्षेत्र के लोगों की जरूरतों को देखते हुए खुद से मास्क बनाने के काम में जुटे हुए हैं। दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा ने कपड़ों से घर पर ही मास्क बनाना सीख लिया है और ये मास्क तैयार करके उन लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं, जो मेडिकल शॉप से मास्क नहीं खरीद पाते। वो खुद से मास्क सिलाई का काम ही नहीं कर रहे, बल्कि उसके लिए खुद से कपड़े भी काटने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मास्क तो छोड़ दीजिए पहले मुझे कुछ भी सिलाई नहीं आती थी। इसलिए पहले मैंने मास्क बनाने के लिए कपड़े की कटाई सीखी और फिर साधारण सिलाई मशीन से उसकी सिलाई करना सीख लिया।

घर में बने मास्क की बढ़ गई है जरूरत

घर में बने मास्क की बढ़ गई है जरूरत

जब रीवा के सांसद के पास कुछ मास्क तैयार हो जाता है तो वह उसे अपने क्षेत्र के निवासियों के बीच मुफ्त में बांट देते हैं। मिश्रा कहते हैं कि लोगों को यह तो पता है कि कोरोना वायरस से बचने के लिए चेहरा ढकना आवश्यक है, लेकिन उनके पास मास्क नहीं है। इसलिए मैंने तय किया कि नहीं से हां भला। डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने भी यह कहते हुए घर में कपड़ों से बने मास्क को मंजूर किया है कि कुछ नहीं पहनने से यह मास्क पहनना कहीं ज्यादा सुरक्षित है। उनका कहना है कि यह ज्यादा खर्चीला भी नहीं है और घर बैठे इसकी वजह से अपने वक्त का भी सही उपयोग कर पा रहा हूं।

खाली समय का इससे बेहतर इस्तेमाल नहीं- जनार्दन मिश्रा

खाली समय का इससे बेहतर इस्तेमाल नहीं- जनार्दन मिश्रा

जब उनसे सवाल पूछा गया कि उन्हें मास्क ही बनाने का कैसे सूझा? इसपर उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधियों की ये जिम्मेदारी है कि मुश्किल वक्त में अपने क्षेत्र के लोगों के साथ खड़े रहें। लेकिन, लॉकडाउन की वजह से जब कहीं आ-जा ही नहीं सकते तो किसी कि सहायता कैसे कर सकते हैं। इसके लिए मैंने लोगों की जरूरतों की एक लिस्ट बनाई और तब मैंने तय किया कि आखिर सबसे ज्यादा जरूरत तो मास्क की है और फिर मैंने वही बनाना शुरू कर दिया।

कोरोना के खात्मे तक बनाएंगे मास्क

कोरोना के खात्मे तक बनाएंगे मास्क

अब तो रीवा के सांसद ने ज्यादा बड़े पैमाने पर मास्क बनाने का काम शुरू कर दिया है। इसके लिए उन्होंने रीवा के प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र की प्रशिक्षित छात्राओं को इसके लिए प्रेरित किया है और सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाते हुए मास्क बनाने में उनकी भी सहायता ले रहे हैं, ताकि क्षेत्र में मास्क की जरा भी कमी न रह पाए। उन्होंने कहा है कि उनके मास्क बनाने का काम कोरोना के पूरी तरह खत्म होने तक चलेगा। वो दूसरों को मास्क बनाने के लिए कपड़े भी दे रहे हैं। सामाजिक कार्यों के लिए जनार्दन मिश्रा पहले भी काफी चर्चा में रह चुके हैं। वो खुद से टॉयलेट साफ करते और कचरा गाड़ी से कचरा जमा करते हुए भी देखे जा चुके हैं।

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