उमर खालिद-शरजील इमाम को क्यों नहीं मिली जमानत? दिल्ली कोर्ट ने कहा- 'हम इसपर सुनवाई भी नहीं कर सकते'
Umar Khalid, Sharjeel Imam Bail: दिल्ली दंगों के बड़े साजिश मामले में जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम को एक बार फिर अदालत से राहत नहीं मिली। दिल्ली की एक ट्रायल कोर्ट ने दोनों की नई जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए साफ कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले पर फैसला दे चुका है।
ऐसे में निचली अदालत के पास न तो इन याचिकाओं पर सुनवाई करने का अधिकार है और न ही जमानत देने का विकल्प। इस आदेश के बाद साफ हो गया कि फिलहाल दोनों उमर खालिद-शरजील इमाम को जेल से राहत मिलने की संभावना नहीं है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बजपेयी ने अपने आदेश में कहा कि 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं पहले ही खारिज कर चुका है। इसलिए ट्रायल कोर्ट उस फैसले से अलग जाकर कोई आदेश नहीं दे सकता।
अदालत ने कहा कि मौजूदा जमानत याचिकाएं सुनवाई योग्य ही नहीं हैं, इसलिए इन्हें खारिज किया जाता है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि वह मामले के तथ्यों या आरोपों की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है। फैसला केवल कानूनी प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दायरे में दिया गया है।
उमर खालिद के वकील और सरकारी पक्ष ने क्या-क्या दलील दी?
उमर खालिद की ओर से वकील त्रिदीप पाइस ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के जनवरी वाले आदेश के बाद हालात बदल चुके हैं। उन्होंने सैयद इफ्तिखार अंद्राबी मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक जेल में रहने के आधार पर जमानत देने के सिद्धांत पर दोबारा विचार होना चाहिए।
वहीं शरजील इमाम के वकील तालिब मुस्तफा ने कहा कि सह-आरोपी तस्लीम और खालिद सैफी को अंतरिम जमानत मिल चुकी है। उन्होंने यह भी दलील दी कि दोनों आरोपी छह साल से ज्यादा समय से जेल में हैं और संरक्षित गवाहों की गवाही जल्द पूरी होती नहीं दिख रही। इसलिए नियमित जमानत या कम से कम छह महीने की अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए।
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मधुकर पांडे और अनिरुद्ध मिश्रा ने अदालत से कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर चुका है। उमर खालिद की पुनर्विचार याचिका भी खारिज हो चुकी है। ऐसे में ट्रायल कोर्ट के पास उन्हें राहत देने का कोई अधिकार नहीं है। सरकारी पक्ष ने यह भी कहा कि जनवरी के बाद ऐसा कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जिसके आधार पर नई जमानत याचिकाओं पर विचार किया जा सके।
कोर्ट ने 'बदले हालात' की दलील क्यों नहीं मानी?
अदालत ने माना कि बचाव पक्ष ने हालात बदलने की बात कही है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दो अलग-अलग फैसलों को लेकर कानूनी सवाल पहले ही बड़ी पीठ के पास भेजा जा चुका है। जब तक उस मुद्दे पर अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक ट्रायल कोर्ट इस आधार पर कोई राहत नहीं दे सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस बदलाव सामने नहीं आया है, जिससे पहले दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दोबारा विचार किया जाए।
Delhi Riots Case: क्या है उमर खालिद, शरजील इमाम का पूरा मामला?
उमर खालिद, शरजील इमाम और कई अन्य आरोपियों पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा की बड़ी साजिश का हिस्सा होने का आरोप है। उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं में मामला दर्ज है।
यह हिंसा नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध के दौरान भड़की थी। इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए कहा था कि दोनों के खिलाफ पहली नजर में यूएपीए के तहत मामला बनता है। अदालत ने यह भी कहा था कि सभी आरोपियों की भूमिका एक जैसी नहीं मानी जा सकती और मामले में कथित भागीदारी के स्तर को देखते हुए अलग-अलग फैसला लिया जाएगा।
इसी आदेश के आधार पर अब दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने भी दोनों की नई जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। फिलहाल इस मामले में आगे की कानूनी लड़ाई उच्च अदालतों में ही जारी रहने की संभावना है।













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