आगरा के सुरेंद्र शर्मा की हत्या उसकी पत्नी ने क्यों की? सास के सामने ऐसे आया सच बाहर, कंकाल खोलेगा मौत का राज
Agra Surendra Sharma Death Case: उत्तर प्रदेश के आगरा से सामने आए 'दृश्यम' स्टाइल हत्याकांड ने पूरे देश को हैरान कर दिया है। एक पत्नी अपने ही पति की जान ले लेती है, उसकी लाश को कहीं बाहर फेंकने के बजाय अपने ही घर के बाथरूम के फर्श के नीचे दफन कर देती है, ऊपर से नया प्लास्टर और टाइल्स लगवाकर करीब 45 दिनों तक उसी के ऊपर हर रोज नहाती रहती है। इतना ही नहीं वह शातिर दिमाग महिला पुलिस के साथ बैठकर सीसीटीवी फुटेज देखती है और पति के लापता होने के गम में रोने-बिलखने का नाटक भी करती है।
लेकिन आरोपी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, उसका पाप एक दिन जरूर सामने आता है। इस खौफनाक मर्डर मिस्ट्री में भी एक ऐसा मोड़ आया जहां केवल एक मामूली सी चूक और 'पेंशन' के पैसों के विवाद ने कातिल बीवी के झूठ के किले को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया। आइए इस सनसनीखेज वारदात की पूरी इनसाइड स्टोरी जानते हैं।

सुरेंद्र कुमार शर्मा के कत्ल की वो खौफनाक रात
यह पूरी कहानी राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले 44 साल के सुरेंद्र कुमार शर्मा की है, जो आगरा के सिकंदरा स्थित दहतोरा की रेणुका धाम कॉलोनी में अपनी पत्नी रूबी, दो बेटियों रिद्धि (13) और सिद्धि (9) (बेटी अनु) और अपनी बुजुर्ग मां कमला के साथ रहते थे। सुरेंद्र की शादी साल 2010 में इटावा की रहने वाली रूबी से हुई थी। सुरेंद्र के पिता राधेश्याम शर्मा एक शिक्षक थे, जिनकी कुछ साल पहले मौत हो चुकी है। पिता की मौत के बाद बुजुर्ग मां कमला को मिलने वाली पेंशन से ही इस घर का चूल्हा जल रहा था क्योंकि सुरेंद्र बेरोजगार थे।
बेरोजगारी और सुरेंद्र की शराब पीने की भयंकर लत की वजह से मियां-बीवी के बीच आए दिन खूनी झगड़े होते थे। सुरेंद्र अक्सर नशे में धुत्त होकर रूबी के साथ बेरहमी से मारपीट करता था और गुस्से में चिल्लाता था, "तुम सबको एक दिन अकेला छोड़कर चला जाऊंगा, देखना तुम सब भीख मांगोगे।" रूबी सालों से इस घरेलू हिंसा को झेल रही थी।
17 मई की रात को सुरेंद्र शराब पीकर आया और उसने फिर रूबी को पीटा। बस इसी मोड़ पर रूबी के सिर पर खून सवार हो गया। उसने घर में रखी अपनी सास और पति की नींद की गोलियों में से 18 से ज्यादा गोलियां निकालीं और उन्हें पीसकर मीठी खीर में मिला दिया। सुरेंद्र ने वो खीर खाई और गहरी नींद में सो गया। 18 मई की सुबह जब रूबी ने देखा, तो सुरेंद्र बिस्तर पर मृत पड़े थे।

कत्ल से ठीक पहले भजन गा रहे थे पापा, बेटी ने बयां किया दर्द
सुरेंद्र की बेटी ने मीडिया और पुलिस के सामने कत्ल से ठीक पहले की जो कहानी बताई, वह दिल को झकझोर देने वाली है। बेटी ने बताया, "मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरी मम्मी ऐसा कुछ कर बैठेंगी। उस दिन पापा बेहद खुश थे। उन्होंने मेरे साथ बैठकर भगवान के भजन गाए थे और दादी से भी बहुत देर तक हंस-हंसकर बातें की थीं।"
बेटी के इस बयान ने यह साफ कर दिया कि सुरेंद्र उस रात किसी डिप्रेशन में नहीं थे, बल्कि वे खुश थे। जिस वक्त बाप अपनी मासूम बेटी के साथ बैठकर भजन गा रहा था, ठीक उसी वक्त रूबी अपने शातिर दिमाग में कत्ल का वो खौफनाक खेल रच रही थी।
लाश जल्दी गल जाए, इससिए दफनाने के पहले डाला था नमक!
18 मई की सुबह जब रूबी को यकीन हो गया कि सुरेंद्र मर चुके हैं, तो उसने लाश ठिकाने लगाने की प्लानिंग शुरू की। सुरेंद्र की मां कमला को आंखों से बहुत कम दिखाई देता था, जिसका रूबी ने फायदा उठाया। उसने सुबह करीब 9-10 बजे भरतपुर में रहने वाले अपने जेठ अनिल शर्मा को फोन किया और कहा, "घर में पुलिस का कोई केस बन गया है, आप तुरंत आकर मम्मी और बच्चों को यहां से ले जाओ।" उसने अनिल को घर आने से मना किया और कहा कि उसने तीनों को पास की एक दुकान पर बैठा दिया है, वहीं से ले जाएं।
रूबी खुद सास और बच्चों को घर से 100 मीटर दूर दुकान पर छोड़ आई और जेठ के साथ भरतपुर भेज दिया। रास्ता साफ होते ही रूबी घर लौटी। उसने सुरेंद्र के भारी शव को कमरे से घसीटकर 10 फीट लंबे और साढ़े चार फीट चौड़े बाथरूम में पहुंचाया। वहां उसने फर्श तोड़ा और गहरा गड्ढा खोदकर सुरेंद्र की लाश को लिटा दिया। लाश जल्दी गल जाए, इसके लिए उसने ऊपर से नमक डाला, फिर 400 रुपये में मंगवाई गई मिट्टी से गड्ढे को भरकर समतल कर दिया। इस पूरे काम में उसे एक घंटे का समय लगा।
इसके बाद उसने जेठ अनिल को फोन कर नया झूठ बोला, "सुरेंद्र जबरदस्ती ताला खुलवाकर लड़ाई करके चले गए हैं और घर से 5 हजार रुपये भी ले गए हैं। वे कह गए हैं कि 2-3 दिन में फोन करके बताएंगे कि कहां हैं।" इसके बाद रूबी खुद भी 19 मई को बच्चों के पास राजस्थान चली गई और 7-8 दिन वहीं रही।

पेंशन के झगड़े में फिसली जुबान और सास के सामने आया सच
26 मई तक जब सुरेंद्र का कोई पता नहीं चला, तो भाई अनिल शर्मा ने सिकंदरा थाने में भाई की गुमशुदगी दर्ज करा दी। रूबी वापस आगरा आई और एक मिस्त्री को बुलाकर बाथरूम के फर्श पर प्लास्टर करवाकर नया पक्का फर्श बनवा दिया। करीब 45 दिनों तक पुलिस और घरवाले सुरेंद्र को ढूंढते रहे और रूबी पुलिस के साथ मिलकर सीसीटीवी फुटेज देखने और रोने का नाटक करती रही।
लेकिन इस खौफनाक राज के खुलने की वजह बनी मां कमला की पेंशन। घर के खर्च के लिए आने वाली पेंशन की पूरी रकम रूबी के पास ही रहती थी। इस बार जब जेठ अनिल को पेंशन की रकम नहीं मिली, तो उन्हें शक हुआ। उन्होंने बैंक जाकर पता किया तो मालूम हुआ कि पेंशन तो आ चुकी है और इस बार रकम पहले से भी ज्यादा आई है। जब अनिल ने इस पेंशन के पैसों को लेकर रूबी से कड़ाई से सवाल-जवाब किया, तो पैसों के इसी विवाद के बीच रूबी के मुंह से अचानक सुरेंद्र की हत्या की बात निकल गई।
इसके बाद अनिल ने रूबी को फंसाते हुए इमोशनल होकर कहा, "रोने से परेशानी दूर नहीं होगी। कोई बात है तो मुझे बता दो। तू फंस रही है तो मुझे बता दे, मैं तुझे बचा लूंगा, तेरे ऊपर आंच नहीं आने दूंगा।" जेठ के इस दिलासे के आगे रूबी का सब्र पूरी तरह टूट गया।
उसी रात रूबी ने अपनी अंधी सास कमला और जेठ के सामने रोते हुए कबूल कर लिया कि सुरेंद्र कहीं गायब नहीं हुए हैं, बल्कि उसी ने उन्हें मारकर बाथरूम में गाड़ दिया है। अनिल ने बिना वक्त गंवाए आधी रात को सिकंदरा पुलिस को फोन खटखटाया और पुलिस ने रूबी को हिरासत में ले लिया।

फर्श तोड़ा तो निकला कंकाल, फॉरेंसिक जांच से खुलेगा राज
आरोपी रूबी के बताए जाने पर 3 जुलाई को सिकंदरा पुलिस की टीम 5 मजदूरों को लेकर रेणुका धाम कॉलोनी वाले मकान के बाथरूम में दाखिल हुई। मजदूरों ने 20 मिनट की खुदाई के बाद जैसे ही मिट्टी हटाई, वहां सुरेंद्र शर्मा का नरकंकाल देखकर सबके होश उड़ गए। डेढ़ महीने में सुरेंद्र का मांस पूरी तरह गल चुका था और केवल हड्डियां बची थीं।
चूंकि लाश पूरी तरह गल चुकी थी, इसलिए शव का सामान्य पोस्टमार्टम मुमकिन नहीं था। एसीपी अमीषा सिंह के निर्देश पर 5 सदस्यीय स्पेशल फॉरेंसिक टीम बनाई गई है, जो इस कंकाल की वैज्ञानिक और डीएनए (DNA) जांच कर रही है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स कंकाल की हड्डियों और अवशेषों की जांच से इन बातों का पता लगा रहे हैं:
- मौत की असली वजह: हड्डियों की जांच से यह साफ होगा कि क्या सुरेंद्र की मौत सिर्फ नींद की गोलियां खाने से हुई थी या फिर रूबी ने उसका गला भी दबाया था।
- टॉक्सिकोलाजी रिपोर्ट: हड्डियों के भीतर मौजूद रासायनिक अवशेषों से यह साबित किया जाएगा कि सुरेंद्र के शरीर में नींद की गोलियों का जानलेवा जहर मौजूद था या नहीं।
- डीएनए प्रोफाइलिंग: कंकाल के दांतों और हड्डियों के सैंपल लेकर परिवार के सदस्यों से मैच कराए जाएंगे ताकि कानूनी तौर पर यह साबित हो सके कि यह कंकाल सुरेंद्र शर्मा का ही है।
कातिल बीवी का नया पैंतरा और पुलिस के अनसुलझे सवाल
पुलिस हिरासत में आने के बाद शातिर रूबी लगातार अपने बयान बदल रही है। पहले उसने पुलिस के सामने जुर्म कबूला, लेकिन अब वह अपने ही बयान से यू-टर्न लेते हुए अपने देवर के सामने नया पैंतरा चल रही है। अब रूबी का नया दावा है, "मैंने सुरेंद्र का कत्ल नहीं किया, बल्कि उसने खुद सुसाइड किया था। लाश देखकर मैं घबरा गई और बदनामी के डर से मैंने शव को बाथरूम में गाड़ दिया।" पुलिस उसकी इस थ्योरी को खारिज कर रही है।
सिकंदरा पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती उन सवालों की गुत्थी सुलझाना है जो इस थ्योरी पर शक पैदा करते हैं कि रूबी ने यह सब अकेले कैसे किया होगा।
बाथरूम का फर्श पहले से पक्का था। क्या एक महिला अकेले फर्श को तोड़कर आधा फीट गहरा गड्ढा खोद सकती है? सीमेंट से प्लास्टर करने से पहले पानी की निकासी के लिए लेवल चेक करना पड़ता है, रूबी ने अकेले यह कैसे कर लिया?
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या रूबी का किसी और के साथ कोई चक्कर था, क्योंकि आमतौर पर ऐसे मामलों में अवैध संबंधों की बात सामने आती है।
घर में सिर्फ एक ही मोबाइल फोन था जिसे दोनों इस्तेमाल करते थे। पुलिस अब उस फोन की गूगल सर्च हिस्ट्री खंगाल रही है कि रूबी ने पिछले दिनों इंटरनेट पर क्या-क्या सर्च किया था।
पुलिस इस मामले में किसी बाहरी मददगार या करीबी के शामिल होने के एंगल से जांच को आगे बढ़ा रही है। कातिल रूबी अब जेल की सलाखों के पीछे है और फॉरेंसिक लैब से आने वाली कंकाल की रिपोर्ट जल्द ही अदालत के सामने इस खौफनाक मर्डर मिस्ट्री का अंतिम सच रख देगी।













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