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Chhattisgarh किसी जमाने में था एनीमिया ग्रस्त, 7 महीनों में किया बड़ा सुधार, देखें आंकड़े

Chhattisgarh: न्यूट्रिशन इंटरनेशनल (NI) ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के साथ मिलकर पिछले 15 सालों में छत्तीसगढ़ के एनीमिया मुक्त भारत (AMB) कार्यक्रम को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। बेहतर रिपोर्टिंग सिस्टम और हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) के प्रभावी एकीकरण से कार्यक्रम के कई प्रमुख संकेतकों में साफ सुधार देखने को मिला है। इसका सीधा असर बच्चों, महिलाओं और किशोरों के स्वास्थ्य पर पड़ा है।

ब्लॉक रैंकिंग एक्सरसाइज से जमीनी स्तर पर सुधार

AMB कार्यक्रम को और मजबूत करने के लिए ब्लॉक रैंकिंग एक्सरसाइज (BRE) एक अहम पहल बनकर उभरी है। यह एक्सरसाइज ब्लॉक और जिला स्तर पर डेटा संग्रह और रिपोर्टिंग को बेहतर बनाती है। BRE के जरिए जिलों और ब्लॉकों के प्रदर्शन का आकलन किया जाता है, जिससे राज्य NHM को यह समझने में मदद मिलती है कि कहां सुधार की जरूरत है और कहां काम अच्छा हो रहा है।

Chhattisgarh

2020 में पायलट, अब पूरे राज्य में विस्तार की तैयारी

न्यूट्रिशन इंटरनेशनल ने साल 2020 में छत्तीसगढ़ के 12 जिलों में BRE का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसके नतीजे काफी सकारात्मक रहे। स्कोर आधारित रणनीतियां बनाने में मदद मिली और कार्यक्रम लागू करने में आ रही समस्याओं की पहचान आसान हुई। इसी सफलता के बाद अब इसे राज्य के सभी 28 जिलों में लागू करने की वकालत की जा रही है।

रियल टाइम निगरानी और नियमित प्रशिक्षण

BRE की मदद से जिले अब AMB के संकेतकों की नियमित समीक्षा कर पा रहे हैं। इससे रिपोर्टिंग की कमियां तुरंत सामने आती हैं और समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं। इसके साथ ही नियमित ट्रेनिंग से जमीनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ी है, खासतौर पर डेटा क्वालिटी और रिपोर्टिंग की सटीकता पर जोर दिया गया है।

सात महीनों में स्कोरकार्ड में बड़ा सुधार

सख्त निगरानी और बेहतर रिपोर्टिंग का असर राज्य के AMB स्कोरकार्ड में साफ दिखा है। केवल सात महीनों में जिलों का औसत स्कोर करीब 13.25 अंक बढ़ा है। इसमें कांकेर जिला सबसे आगे रहा, जहां 28 अंकों का सबसे बड़ा सुधार दर्ज किया गया।

जिला स्तर का डेटा बना गेम चेंजर

BRE यह दिखाता है कि जिला स्तर पर मजबूत डेटा कैसे फैसले लेने और कार्यक्रम के क्रियान्वयन को बेहतर बना सकता है। आने वाले समय में इसकी रिपोर्टें जमीनी स्तर पर और बड़ा असर डालेंगी और पूरे AMB कार्यक्रम को और सशक्त करेंगी।

IFA सप्लीमेंट वितरण में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे स्थान पर

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के अनुसार, 9 जनवरी 2023 तक एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत आईएफए (आयरन फोलिक एसिड) पूरक वितरण में राज्य देश में तीसरे स्थान पर है। इस मामले में केवल आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र ही छत्तीसगढ़ से आगे हैं।

किन्हें मिल रहा है IFA सप्लीमेंट

इस अभियान के तहत 6 महीने से 19 साल तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को IFA दिया जाता है। मितानिनें छोटे बच्चों को सिरप और महिलाओं को टैबलेट देती हैं। स्कूलों में भी बच्चों को IFA दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

लगातार तीन महीने तीसरा स्थान

भारत सरकार हर महीने IFA वितरण का स्कोरकार्ड जारी करती है। जुलाई, अगस्त और सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ इन तीनों महीनों में लगातार तीसरे स्थान पर रहा है।

बड़े राज्यों को छोड़ा पीछे

राज्य नोडल अधिकारी डॉ. वीआर भगत ने बताया कि छत्तीसगढ़ ने उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की है।

आंकड़े जो बहुत कुछ दिखाते हैं

सितंबर 2022 तक के आंकड़ों के अनुसार, 6 से 59 महीने के 66.4% बच्चों, 5 से 9 साल के 71.5% बच्चों, 10 से 19 साल के 74.6% किशोरों, 95% गर्भवती महिलाओं और 61.6% स्तनपान कराने वाली माताओं को IFA सप्लीमेंट मिला। सभी समूहों को मिलाकर राज्य का कुल स्कोर 73.8% दर्ज किया गया है, जो छत्तीसगढ़ की बड़ी स्वास्थ्य सफलता को दिखाता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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