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Chhath Puja 2024: उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ का समापन, दिल्ली से पटना तक घाटों पर श्रद्धालुओं का रेला

Chhath Puja 2024: छठ पूजा का महापर्व हर साल की तरह इस बार भी पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया। आज उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ पूजा 2024 का समापन हो गया। पटना से लेकर दिल्ली तक, घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और चारों ओर आस्था और भक्ति का माहौल दिखा। परिवार के साथ घाटों पर पहुंचे लोगों ने पूरे भक्ति भाव से छठ मैया और भगवान सूर्य को नमन किया।

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    उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ का समापन, दिल्ली से पटना तक घाटों पर श्रद्धालुओं का रेला

    छठ पूजा भगवान सूर्य और छठी मैया को समर्पित पर्व है, जिसे मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में मनाया जाता है। इस पर्व का आयोजन चार दिन तक चलता है, जिसमें नहाय-खाय से लेकर ऊषा अर्घ्य तक की पूजा विधियां शामिल होती हैं। यह पर्व कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है और इस दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। मान्यता है कि इस पूजा से संतान की रक्षा और परिवार की सुख-शांति का आशीर्वाद मिलता है।

    Chhath Puja 2024

    घाटों पर उमड़े श्रद्धालु

    • झारखंड (रांची): छठ पर्व के अवसर पर रांची के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ एकत्रित हुई। भक्तजन भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर अपनी आस्था प्रकट कर रहे हैं।
    • ओडिशा (भुवनेश्वर): कुआखाई नदी के किनारे भुवनेश्वर में श्रद्धालु उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर रहे हैं। श्रद्धा और भक्ति का यह माहौल हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

    • दिल्ली (आईटीओ): दिल्ली के आईटीओ घाट पर छठ पूजा की तैयारियां जोरों पर हैं। आज सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही यह पर्व समाप्त हो जाएगा।
    • गीता कॉलोनी: दिल्ली के गीता कॉलोनी घाट पर भी श्रद्धालुओं के लिए पूरी तैयारियां की गई हैं। आज सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण होगा।
    • पश्चिम बंगाल-कोलकाता (छोटेलाल घाट): कोलकाता के छोटेलाल घाट पर भी छठ पूजा के लिए तैयारियां पूरी की गई हैं। आज सुबह अर्घ्य देने के बाद इस पर्व का समापन होगा।

    • बिहार-पटना (पटना कॉलेज घाट): पटना के पटना कॉलेज घाट पर छठ पूजा की तैयारियों का विशेष ध्यान रखा गया है। आज सुबह भक्तजन उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर अपने व्रत का समापन करेंगे।
    • उत्तर प्रदेश

      • वाराणसी: गंगा घाट पर छठ पूजा का विशेष आयोजन किया गया है। यहां श्रद्धालु आज सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा संपन्न करेंगे।
      • प्रयागराज: प्रयागराज के घाटों पर भी छठ पूजा की तैयारियां पूरी हैं, और आज सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ व्रत का समापन होगा।

      • नोएडा (सेक्टर 21 स्टेडियम): नोएडा में सेक्टर 21 स्टेडियम में छठ पूजा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालु यहां सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के लिए एकत्रित होंगे।
      • गोरखपुर (गुरु गोरखनाथ घाट): गोरखपुर के गुरु गोरखनाथ घाट पर छठ व्रतियों की भारी भीड़ है। लोग भक्ति भाव से सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पहुंचे हैं।

      छठ पूजा के चार मुख्य दिन

      • पहला दिन (नहाय-खाय): इस दिन व्रती नदी में स्नान कर के शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं।
      • दूसरा दिन (खरना): इस दिन व्रतियों द्वारा निर्जला उपवास रखा जाता है और शाम को गुड़ और चावल की खीर का प्रसाद ग्रहण कर व्रत शुरू किया जाता है।
      • तीसरा दिन (संध्या अर्घ्य): सूर्यास्त के समय नदी किनारे सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है।
      • चौथा दिन (ऊषा अर्घ्य): सूर्य उदय के समय घाटों पर जाकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है, जिसके बाद व्रत का समापन किया जाता है।

      ऊषा अर्घ्य का महत्व
      छठ पूजा के चौथे और अंतिम दिन ऊषा अर्घ्य का आयोजन किया जाता है। इस दिन व्रती महिलाएं सूर्योदय से पहले घाटों पर पहुंचती हैं और उगते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। इसके बाद भगवान सूर्य और छठी मैया से संतान की रक्षा और परिवार के कल्याण की प्रार्थना की जाती है। ऊषा अर्घ्य के साथ ही छठ व्रत का पारण होता है, जिसमें कच्चे दूध, जल और प्रसाद से उपवास तोड़ा जाता है।

      ऊषा अर्घ्य का समय (2024)
      इस साल ऊषा अर्घ्य का मुहूर्त सुबह 6 बजकर 38 मिनट पर है। इस समय पर श्रद्धालु घाटों पर जाकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और पूजा करते हैं।

      ऊषा अर्घ्य के समय ध्यान रखने योग्य बातें

      • अर्घ्य देते समय पूर्व दिशा की ओर मुंह करके खड़े हों।
      • अर्घ्य के लिए तांबे के पात्र का उपयोग करें।
      • पानी का पात्र दोनों हाथों से पकड़ें और जल की धार पर सूर्य किरणों का प्रतिबिंब देखना शुभ माना जाता है।
      • अर्घ्य देते समय पात्र में अक्षत और लाल रंग का फूल अवश्य डालें।

      छठ पूजा की पौराणिक कथा

      छठ पूजा से जुड़ी एक प्राचीन कथा के अनुसार, राजा प्रियव्रत की कोई संतान नहीं थी और इस कारण वह अत्यंत दुखी थे। महर्षि कश्यप के सुझाव पर राजा ने संतान प्राप्ति के लिए यज्ञ करवाया, जिसके फलस्वरूप उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई। दुर्भाग्य से वह शिशु मृत पैदा हुआ, जिससे राजा और रानी का दुःख और भी बढ़ गया। तभी माता षष्ठी ने आकाश से प्रकट होकर राजा को दर्शन दिए। देवी षष्ठी ने अपना परिचय दिया कि वह ब्रह्मा की मानस पुत्री हैं और संतान की रक्षा करने वाली देवी हैं। उन्होंने राजा के मृत शिशु पर हाथ फेरकर उसे पुनः जीवित कर दिया। इसके बाद राजा ने माता षष्ठी की आराधना शुरू की और तभी से छठ पूजा का विधान आरंभ हुआ।

      छठ पूजा का समापन

      छठ पूजा का यह पर्व चार दिनों तक चलने वाला अनुष्ठान है, जो न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाता है बल्कि सामुदायिक एकता और सामाजिकता को भी मजबूत बनाता है। घाटों पर बड़ी संख्या में एकत्रित होकर सूर्य की पूजा करना समाज में प्रेम और सद्भावना को बढ़ावा देता है। आज के इस आधुनिक युग में भी लोग परंपराओं को जीवित रखते हुए छठ पूजा को पूरे भक्ति भाव से मनाते हैं।

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