भारत के इस महानगर में मिला अति प्राचीन 'खजाना', 12,000 साल का इतिहास, 4 सभ्यताओं के दुर्लभ साक्ष्य

चेन्नई,23 सितंबर: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को एक बहुत ही बड़ी कामयाबी मिली है। एक ही स्थान से कम से कम चार-चार सभ्यताओं के साक्ष्य मिले हैं और सबसे पुराना कम से कम 12,000 वर्ष प्राचीन प्रतीत हो रहा है। पुरातत्विक महत्व का यह दुर्लभ खजाना तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के पास एक गांव से मिला है। इतिहास के कुछ शोधार्थी और पुरात्विक चीजों के कुछ जिज्ञासु पिछले काफी समय से उस स्थान की जानकारी जुटाने में लगे थे। लेकिन,जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम पहुंची तो दो महीने में ही चमत्कार हो गया। वहां मध्यपाषाण युग का एक बहुत बड़ा औजारों का कारखाना भी पाया गया है।(पहली तस्वीर सौजन्य-टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार)

चेन्नई में मिला 12,000 साल पुराना 'खजाना'

चेन्नई में मिला 12,000 साल पुराना 'खजाना'

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के बाहरी इलाके में पत्थरों के औजार बनाने वाली एक अति प्राचीन जगह मिली है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की एक टीम के पास पर्याप्त साक्ष्य है कि औजार बनाने का यह कारखाना करीब 12,000 वर्ष पहले तक अस्तित्व में था। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह जगह चेन्नई के बाहरी इलाके में स्थित रेनॉल्ट निसान ऑटोमोबाइल फैक्ट्री से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर है। सबसे हैरान करने वाली बात तो ये है कि पुरातत्व विशेषज्ञों की इस टीम को यहां कम से कम चार सभ्यताओं की कलाकृतियां एक गड्ढे में अलग-अलग परतों में दबी पड़ी मिली हैं, जो अगर हजारों साल नहीं, तो सैकड़ों सालों के अंतर की जरूर हैं।

पत्थर के औजार बनाने का प्राचीन कारखाना मिला

पत्थर के औजार बनाने का प्राचीन कारखाना मिला

जिस स्थान पर इस अति प्राचीन दुर्लभ खजाने की खोज हुई है, वह वडक्कुपट्टू गांव है, जहां मध्यपाषाण काल के कई सारे औजार मिले हैं, जिनमें हाथ की कुल्हाड़ी, स्क्रैपर, बड़ा छुरा और गंडासे शामिल हैं। ये सारी चीजें बड़ी संख्या में पत्थर के टुकड़ों के साथ सतह से सिर्फ 75 सेंटी मीटर नीचे मिले हैं। चेन्नई सर्किल के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सुप्रिटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट एम कलिमुथु ने कहा, 'ऐसा लगता है कि यह स्थान वह जगह जहां प्राचीन लोग शिकारियों और संग्रहकर्ताओं के लिए पत्थरों के औजार बनाते थे।'

एक स्थान पर 4 सभ्यताओं के दुर्लभ साक्ष्य

एक स्थान पर 4 सभ्यताओं के दुर्लभ साक्ष्य

पुरातत्वविद यह देखकर स्तब्ध थे कि उसी 10 मीटर x 10 मीटर के गड्ढे के ऊपरी परत में संगम काल (2,000 वर्ष से प्राचीन) की कलाकृतियां भी थीं और रूलेट बर्तन, रोमन एम्फोरा शेर्ड और कांच के मोती भी थे, जो रोम के साथ व्यापार होने का संकेत देते हैं। इनके अलावा उन्होंने वहीं से सोने के जेवर, टेराकोटा के खिलौने, मनके, चूड़ियों के टुकड़े, बर्तनों के टुकड़ों के अलावा सिक्के भी खोजे हैं। सतह के आसपास के क्षेत्र से टीम को प्रारंभिक पल्लव काल (275 ई.) से लेकर बाद के पल्लव काल (897 ई.) तक की मूर्तियां भी खोज निकाली हैं।

'सांस्कृतिक और पुरातत्विक तौर पर महत्वपूर्ण स्थान है'

'सांस्कृतिक और पुरातत्विक तौर पर महत्वपूर्ण स्थान है'

तमिलनाडु पुरातत्व विभाग से रिटायर कर चुके पुरातत्वविद के श्रीधरन का कहना है कि वडक्कुपट्टू में जो कुछ मिला है, उससे पता चलता है कि वह कई हजार साल तक लगातार निवास बना हुआ था। उन्होंने कहा, 'नए साक्ष्यों से पता चलता है कि यह सांस्कृतिक और पुरातत्विक तौर पर महत्वपूर्ण स्थान है।' दरअसल, कुछ साल पहले वडक्कुपट्टू से करीब एक किलोमीटर दूर गुरुवांमेडु के पास एक प्राचीन अंत्येष्टि स्थल पाए जाने के बाद से इतिहास के छात्र, शोधकर्ता और उत्साही पुरातत्वविद इस इलाके में खोज के इरादे से अपना समय दे रहे थे। लेकिन, करीब दो महीने पहले जब एएसआईट की टीम ने यहां खुदाई का फैसला किया, तो जैसे उनके हाथ सोना लग गया।

औजारों के कार्बन डेटिंग का इंतजार

औजारों के कार्बन डेटिंग का इंतजार

सबसे बड़ी बात है कि वडक्कुपट्टू में अबतक जो कुछ भी मिला है, उसके लिए बहुत गहरी खुदाई नहीं करनी पड़ी है और बहुत कम जगह में ही काफी कुछ हाथ लगा है। जैसे-जैसे इंच-दर-इंच वह खुदाई करते गए, उन्हें इतिहास के पन्ने हाथ लगते चले गए। कुछ ही सेंटीमीटर की खुदाई में सोने के गहने, टूटी चूड़ियां, सिक्के और टेराकोटा के खिलौने मिले; और 75 सेंटीमीटर नीचे जाने पर मध्यपाषाण युग के निशान मिल गए। कलिमुथु के मुताबिक, 'तिरुनेलवेली और थूथुकुडी जिलों के टेरी साइटों के अलावा, तमिलनाडु में वडक्कुपट्टू एकमात्र ऐसी जगह है, जहां मध्यपाषाण काल के औजारों के सबूत मिले हैं।' टाइपोलॉजिकल रिसर्च के अनुसार यह औजार मोटे तौर पर 12,000 वर्ष पहले के बने हैं। वैसे कार्बन डेटिंग और थर्मो ल्यूमिनेसेंस डेटिंग से इसके वास्तविक समय का पता लग जाएगा।

मंदिर के अस्तित्व होने का भी पता चला

मंदिर के अस्तित्व होने का भी पता चला

कलिमुथु का कहना है कि 'यह बहुत ही अनोखी बात है कि चार अलग-अलग काल में बने पत्थर के औजार, कलाकृतियां और गहने एक ही स्थान से मिले हैं।' उन्होंने यह भी कहा है कि 'अलग-अलग तरह के पत्थर के औजारों से पता चलता है कि यहां विशाल तादाद में लोग रहा करते थे।' वहीं श्रीधरन ने कहा कि एक ही स्थान पर हाथ से बना संगम काल का रूफ टाइल्स मिलना भी महत्वपूर्ण है। अन्य खोजों में पल्लव-युग की मूर्तियां हैं, जो बलुआ पत्थर से बनी थीं, और समय के साथ नष्ट हो गई हैं। टीम को इस स्थान से भगवान विष्णु की मूर्तियां, एक शिवलिंग भी मिला है, जिससे यहां एक मंदिर के अस्तित्व का भी पता चलता है। (पहली तस्वीर के अलावा बाकी सारे तस्वीरें-सांकेतिक)

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