भारत में 1948 तक जिंदा थे चीते, कोरिया के महाराजा ने किया था अंतिम शिकार
नई दिल्ली, 17 सितंबर। भारत में करीब 70 साल पहले विलुप्त हो चुके चीतों की गूंज एक बार फिर से सुनाई देगी। आज नामीबिया से आठ अफ्रीकी चीते, जिनमें पांच मादा और तीन नर शामिल हैं, को लेकर विशेष चार्टर कार्गो प्लेन भारत पहुंचा। अब इन चीतों को श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा जाएगा। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर भारत में आखिरी चीते की मौत कैसे हुई? तो आइए जानते हैं इस खबर में इससे जुड़ा इतिहास.........
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1948 तक भारत में जिंदा थे चीते
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में आखिरी चीते 1948 तक जिंदा थे। इसी वर्ष छत्तीसगढ़ की कोरिया रियासत के राजा रामानुज प्रताप सिंहदेव ने बैकुंठपुर से लगे जंगल में तीन चीतों का शिकार किया था। कहा जाता है कि उस वक्त कोई जंगली जानवर अक्सर ग्रामीणों पर हमला कर देता था। इसके चलते राजा रात में शिकार के लिए निकल गए। जब वह जंगलों में पहुंचे तो उन्हें पेड़ के नीचे चमकती आंखों वाला जानवर दिखा। इस पर उन्होंने तुरंत फायर कर दिया, जिससे तीनों चीतों की मौत हो गई। इसके बाद से देश में चीते खत्म हो गए हैं, जिसके बाद सरकार ने 1952 में घोषणा की अब देश में चीते नहीं हैं। ऐसे में अब 2022 में भारत में चीतों को नामीबिया से लाया गया है।

स्पीड के लिए जाने जाते हैं चीते
चीते अपनी स्पीड के लिए जाने जाते हैं। दुनियाभर के जानवरों में सबसे तेज रफ्तार चीतों की होती है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ये 3 सेकंड में शून्य से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ लेते हैं। हालांकि इनकी रफ्तार सिर्फ 30 सेकेंड तक ही रहती है। चीते का वैज्ञानिक नाम एसिनोनिक्स जुबेटस है।

पालने की वजह से कम हुआ चीतों का प्रजनन
कहा जाता है पालने की वजह से चीतों की प्रजनन दर घट गई। ऐसा इसलिए क्योंकि, मादा चीता एकांत पसंद करती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक मादा चीते पालने पर संभोग के लिए तैयार होती हैं, लेकिन संकेत नहीं देती हैं। यही वजह है कि उन्हें जंगल के माहौल और एकांत की चाह रहती है।

करोड़ों वर्ष पुराना है चीतों का इतिहास
वैज्ञानिकों के मुताबिक चीते सबसे पहले हिमयुग में साउथ अफ्रीका में मायोसिन युग में आज से करीब 2.6 करोड़ वर्ष पहले देखे गए थे। इसके बाद इनका प्रवास अफ्रीकी महाद्वीप से एशियाई महाद्वीप में शुरू हुआ। माना जाता है कि आज करीब 1.1 करोड़ वर्ष पहले एशिया में प्लायोसिन युग में इनकी मौजूदगी दिखी थी। वैज्ञानिकों के अनुसार बिल्ली, चीता, बाग, तेंदुआ और शेर एक ही प्रजाति के प्राणी हैं। हालांकि,चीते में समय-समय पर परिवर्तन होता रहा है। वहीं, जलवायु परिवर्तन के कारण भी ये भी अपने स्थान समय-समय पर बदलते रहे हैं।
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