चंद्रयान-3: संस्कृत में क्या है 'प्रज्ञान' का मतलब, जिसपर है पूरे मून मिशन की जिम्मेदारी
Chandrayaan-3 Rover Pragyan: चांद के साउथ पोल पर पहुंचकर भारत ने अंतरिक्ष की दुनिया में नया इतिहास रच दिया है। चंद्रयान-3 के लैंडर 'विक्रम' की चांद के सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल शुरू हो गया। सफल लैंडिंग के बाद इसरो के वैज्ञानिकों ने विश्व में भारत का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया।
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर 'विक्रम' के उतरने के बाद उसमें से निकले रोवर प्रज्ञान पर अब पूरे मून मिशन की जिम्मेदारी है। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर रोवर का नाम 'प्रज्ञान' ही क्यों रखा गया और इसका अर्थ क्या होता है?

सबसे पहले बात लैंडर 'विक्रम' की
इसरो के मुताबिक सबसे चुनौतीपूर्ण काम है चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराना। ऐसे में लैंडर और रोवर के नामकरण के पीछे की अलग कहानी है। लैंडर का नाम महान वैज्ञानिक और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक कहे जाने वाले वाले विक्रम साराभाई के नाम पर रखा है। 'विक्रम' शब्द का अर्थ बहादुरी, साहस और वीरता से जुड़ा है। ऐसे में उनके सम्मान में लैंडर का नामकरण किया गया है।
चांद की जमीन से डेटा इकट्ठा
चंद्रयान-3 की लैडिंग के कुछ घंटों बाद लैंडर के अंदर से रोवर चांद की सतह पर बाहर आ चुका है। अब रोवर 'प्रज्ञान' चांद की सतह पर घूम-घूमकर डेटा जुटाएगा। रोवर एक बॉक्स के आकार की पहिए वाली डिवाइस है, जो चांद पर जगह-जगह जाकर खनिज, पानी और गैस की खोज करेगा।
'प्रज्ञान' का अर्थ
वहीं रोवर का नाम 'प्रज्ञान' इसलिए रखा गया है कि वैज्ञानिकों का मानना है कि रोवर को अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करके चांद की सतह पर कई चीजों की जानकारी इकट्ठा करनी है। ऐसे में प्रज्ञान का संस्कृत में अर्थ ज्ञान होता है। इसलिए रोवर प्रज्ञान अपनी 'बुद्धिमता' से पूरे मिशन को संभालेगा।
रोवर में कोई बदलाव नहीं
आपको बता दें कि चंद्रयान-2 के रोवर और इस बार के रोवर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हां लैंडर के पैर पहले से मजबूत बनाए गए हैं। इसी के साथ ज्यादा ईंधन के लिए जगह बनाई है। लैंडिंग के बाद लैंडर और रोवर का संपर्क मजबूत हो चुका है। ऐसे में अब रोवर लैंडर को सारा डेटा भेजेगा और फिर लैंडर इसे इसरो को भेजेगा।












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