हाथ मिलाते हुए जेल से रिहा हुए चंद्रशेखर 'रावण', देखिए पहली तस्वीरें

जेल से रिहा होते वक्त चंद्रशेखर बेहद खुश नजर आए और हाथ मिलाते हुए बाहर निकले। जेल से रिहाई के वक्त की उनकी तस्वीरें अब सामने आई हैं।

नई दिल्ली। सहारनपुर हिंसा के मामले में रासुका के तहत गिरफ्तार किए गए भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर उर्फ रावण को गुरुवार देर रात जेल से रिहा कर दिया। चंद्रशेखर के ऊपर से यूपी सरकार द्वारा रासुका हटाने के बाद समय से पहले ही उनकी रिहाई हो गई। जेल से निकलते ही चंद्रशेखर ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि उनकी रिहाई भी एक साजिश के तहत की गई है। जेल से रिहा होते वक्त चंद्रशेखर बेहद खुश नजर आए और हाथ मिलाते हुए बाहर निकले। जेल से रिहाई के वक्त की उनकी तस्वीरें अब सामने आई हैं।

जेल से निकलते वक्त मिलाया हाथ

जेल से निकलते वक्त मिलाया हाथ

गुरुवार रात करीब 2 बजे जेल से बाहर निकलते ही चंद्रशेखर पुराने रंग में दिखे और ऐलान किया कि 2019 में भाजपा की सत्ता को उखाड़ फेंकेंगे। चंद्रशेखर मई 2017 से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत जेल में बंद थे। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि अगले 10 दिनों में भाजपा सरकार मुझे किसी ना किसी आरोप में फिर से फंसाने की कोशिश भी करेगी।

रिहाई के बाद दिया ये बयान

रिहाई के बाद दिया ये बयान

जेल से बाहर आकर पत्रकारों से बात करते हुए चंद्रशेखर ने कहा, 'मेरी रिहाई भाजपा की साजिश है, वो 10 दिन के अंदर मुझे फिर से किसी ना किसी मामले में फंसाकर जेल में डाल सकती है। 2019 में भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकना ही उनका लक्ष्य है। भीम आर्मी का पूरा समर्थन महागठबंधन को होगा और उनके संगठन का एक भी व्यक्ति भाजपा को वोट नहीं करेगा। बीएसपी की अध्यक्ष मायावती मेरी बुआ हैं। उन्होंने दलित समाज के लिए बहुत काम किया है, उनसे हमारा किसी तरह का कोई विरोध नहीं है।'

हाथ की मुट्ठी बांधकर दिया संदेश

हाथ की मुट्ठी बांधकर दिया संदेश

चंद्रशेखर का कहना है कि जिस दिन यह बवाल हुआ, उस दिन वह परिवार के सदस्यों के साथ अपने गांव छुटमलपुर स्थित घर पर थे। चंद्रशेखर के मुताबिक 10 मई को रामपुर में हुई वारदात में सभी लोग भीम आर्मी के सदस्य नहीं थे। उन्होंने कहा कि रामपुर में बवाल होने के बाद अधिकारियों ने उसे विरोधियों को शांत करने के लिए बुलाया था। हिंसा के दौरान उन्होंने प्रशासन की मदद की थी। सरकार ने इसके बावजूद उन्हें झूठे मामले में फंसाकर जेल भेज दिया।

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