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Chhattisgarh News: चावल निर्यातकों को बड़ी सौगात: मंडी शुल्क में छूट की अवधि एक साल बढ़ी

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने भारत अंतर्राष्ट्रीय चावल शिखर सम्मेलन में चावल निर्यातकों के लिए मंडी शुल्क में एक साल की राहत की घोषणा की। इस कदम का उद्देश्य चावल के निर्यात में तेजी लाना, दंतेवाड़ा में जैविक खेती को बढ़ावा देना और एपीडा क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन करना है, जिससे राज्य के कृषि और प्रसंस्करण निर्यात ढांचे को मजबूत किया जा सके।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के एक निजी रिसॉर्ट में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में चावल निर्यातकों को बड़ी राहत देते हुए मंडी शुल्क में छूट की अवधि एक साल बढ़ाने की घोषणा की। यह निर्णय चावल निर्यातकों और किसानों—दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय का भी शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और दंतेवाड़ा में ऑर्गेनिक चावल की खेती को और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।

CG extends rice export relief for organic farming

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट का यह दूसरा संस्करण राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आयोजन में 12 देशों के खरीदारों और 6 देशों के दूतावास प्रतिनिधिमंडलों की भागीदारी से छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। उन्होंने विदेशी मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ को "धान का कटोरा" यूं ही नहीं कहा जाता। यहां हजारों किस्मों की धान की प्रजातियां उगाई जाती हैं। सरगुजा अंचल के सुगंधित जीराफूल और दुबराज जैसे चावलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनकी खुशबू दूर से ही पहचान में आ जाती है। मंडी शुल्क में छूट की अवधि बढ़ने से राज्य से चावल निर्यात को और गति मिलेगी। गौरतलब है कि निर्यातक लंबे समय से इस छूट की मांग कर रहे थे और पिछली छूट दिसंबर 2025 में समाप्त हो रही थी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति के तहत लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे चावल के प्रसंस्करण और निर्यात को मजबूती मिल रही है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ से लगभग 90 देशों को करीब एक लाख टन चावल का निर्यात किया जा रहा है। सरकार निर्यातकों को हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। पिछले वर्ष 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी और इस वर्ष इसमें और वृद्धि की संभावना है। इस दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी भी साझा की।

चावल आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन

समिट के दौरान मुख्यमंत्री ने चावल पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न किस्मों के चावल, क्षेत्र-विशेष में उत्पादित प्रजातियों, उत्पादन में हो रहे नवाचारों और आधुनिक तकनीकों से उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी ली। शासकीय स्टालों का निरीक्षण करते हुए उन्होंने उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देने से जुड़े कार्यों की सराहना की और कहा कि ऐसे नवाचारों से किसानों को सीधा लाभ मिलेगा तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, एपीडा के चेयरमैन अभिषेक देव, छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कांति लाल, राम गर्ग सहित देशभर से आए मिलर्स, चावल व्यवसायी और अन्य स्टेकहोल्डर्स उपस्थित रहे।

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