NDFB और ABSU के साथ सरकार ने किया समझौता, बोडोलैंड विवाद सुलझने की तरफ
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को असम के उग्रवादी संगठनों के समूह नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के साथ समझौता साइन कर लिया है। इस समझौते के बाद एनडीएफबी को राजनीतिक और आर्थिक फायदा होगा। ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (एबीएसयू) पिछले काफी समय से बोडोलैंड राज्य के लिए आंदोलन को चला रही थी। इस समझौते में उसे भी हिस्सेदार बनाया गया है। इस समझौते के लिए असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल दिल्ली आए हुए थे। सीएम सोनोवाल की तरफ से समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

1550 कैडर्स करेंगे सरेंडर
इस त्रिपक्षीय समझौते पर सीएम सोनोवाल के अलावा एनडीएफबी और एबीएसयू के चारों हिस्सों के लीडर्स, गृह मंत्रालय में ज्वॉइन्ट सेक्रेटरी सत्येंद्र गर्ग, असम के मुख्य सचिव संजय कृष्णा के भी हस्ताक्षर भी हैं। जिस समय ये सभी समझौते को साइन कर रहे थे, उस समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मौजूद थे। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने बताया, 'यह एक एतिहासिक समझौता है।' उन्होंने इस बात को जोर देकर कहा कि यह समझौता बोडो मुद्दे को सुलझाने में कारगर साबित होगा। गृह मंत्री अमित शाह ने इस मौके पर कहा, 'आज केंद्र, असम सरकार और बोडो प्रतिनिधियों के बीच एक अहम समझौता हुआ है। यह समझौता असम को और बोडो लोगों के लिए सुनहरे भविष्य का मौका प्रदान करेगा।' उन्होंने एनडीएफबी के साथ इस समझौते पर भी जानकारी दी। गृह मंत्री शाह ने कहा कि संगठन के 1550 कैडर्स अपने 130 हथियारों के साथ 30 जनवरी को सरेंडर करेंगे। उन्होंने इस पर आगे कहा, 'एक गृहमंत्री होने के नाते मैं सभी प्रतिनिधियों को सुनिश्चित कर देना चाहता हूं कि सभी वादों को एक तय समय सीमा के अंदर पूरा किया जाएगा।'












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