पेगासस: SC में केंद्र ने आरोपों को किया खारिज, कहा- जांच के लिए विशेषज्ञों की समिति का करेंगे गठन

नई दिल्ली, 16 अगस्त: पिछले एक महीने से पेगासस मामला देश में गरमाया हुआ है। कुछ दिनों पहले केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। जिस पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने एक हलफनामा भी दायर किया, जिसमें जांच के लिए विशेषज्ञों की समिति का गठन करने की बात कही गई।

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    Pegasus Case: आरोपों की जांच के लिए बनेगी कमेटी, Supreme Court में सरकार ने बताया | वनइंडिया हिंदी
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    अपने दो पन्ने के हलफनामे में केंद्र ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने सरकार पर जो आरोप लगाए वो सभी गलत हैं। उनकी ओर से किसी भी नेता, पत्रकार, अधिकारी आदि की जासूसी नहीं करवाई गई। ये सभी आरोप अनुमानों पर आधारित हैं, जिस वजह से आरोपों में कोई दम नहीं है। केंद्र ने आगे कहा कि उनकी ओर से कथित पेगासस स्नूपिंग के मुद्दे की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया जाएगा। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने चयन समितियों की सिफारिशों के बावजूद ट्रिब्यूनल में नियुक्ति करने के लिए केंद्र को 10 दिनों का समय दिया है।

    सॉलिसिटर जनरल ने कही ये बात
    वहीं केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि हम एक संवेदनशील मामले से निपट रहे हैं, जिसे कुछ लोग सनसनीखेज बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस मामले से राष्ट्रीय सुरक्षा जुड़ी हुई है। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोर्ट चाहे तो तटस्थ विशेषज्ञों के साथ एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जा सकता है।

    इन लोगों ने डाली है याचिका
    पेगासस मामले पर जांच की मांग को लेकर वकील एमएल शर्मा, राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, पत्रकार एन राम और शशि कुमार, जगदीप चोककर, नरेंद्र मिश्रा, पत्रकार रूपेश कुमार सिंह, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की ओर से याचिका डाली गई है। याचिकाकर्ताओं ने केंद्र पर जासूसी के आरोप लगाए हैं। साथ ही वो मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं।

    ये है पूरा मामला?
    दरअसल जुलाई में अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने कई देशों के मीडिया संस्थानों के साथ मिलकर पेगासस प्रोजेक्ट नाम से एक रिपोर्ट जारी की। जिसमें दावा किया गया कि इजराइली कंपनी के जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस से दुनियाभर में 50 हजार से ज्यादा लोगों की जासूसी हुई। इसमें भारत के कई उद्योगपति, पत्रकार, नेता, अधिकारी आदि के नाम शामिल हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने पहले ही कह दिया था कि उनकी ओर से किसी की जासूसी नहीं करवाई गई और ना ही इजरायली कंपनी के साथ कोई लेन-देन हुआ है।

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