आखिर क्यों केंद्र सरकार ने कोर्ट में लगाई ट्विटर की क्लास, कहा आप नहीं तय करेंगे क्या है अभिव्यक्ति की आजादी

नई दिल्ली, 02 सितंबर। कर्नाटक हाई कोर्ट में ट्विटर की ओर से याचिका दायर करके केंद्र सरकार के फैसले का विरोध किया गया था, जिसमे कई ट्विटर हैंडल को प्रतिबंधित करने का आदेश दिया गया है। लेकिन इस याचिका पर केंद्र सरकार की ओर से हाई कोर्ट में कहा गया है कि इन ट्विटर हैंडल को बैन करने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती है। केंद्र की ओर से कहा गया है कि ट्विटर फर्जी खबरों को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठा रहा है। जानबूझकर जो गलत जानकारियां साझा की जा रही है उसे भी ट्विटर रोक नहीं पा रहा है।

जानबूझकर नियमों का पालन नहीं कर रहा ट्विटर

जानबूझकर नियमों का पालन नहीं कर रहा ट्विटर

ट्विटर के खिलाफ केंद्र सरकार की ओर से दायर जवाब में कहा गया है कि कंपनी जानबूझकर नियमों का पालन नहीं कर रही है। आईटी एक्ट 2020 देश का कानून है, विदेशी प्लेटफॉर्म जो भारत में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें भारतीय नियम और कानून पर दावा करने का हक नहीं है, यह विदेशी लोगों पर लागू नहीं होता है। ट्विटर ऐसा मंच नहीं है जो यह तय करे कि क्या अभिव्यक्ति की आजादी है और क्या नहीं है। दरअसल केंद्र सरकार की ओर से 10 आदेश ट्विटर को दिए गए थे, जिसमे कई ट्विटर हैंडल पर प्रतिबंध लगाने को कहा गया था, सरकार के इसी फैसले के खिलाफ ट्विटर ने कोर्ट का रुख किया था, जिसपर सरकार की ओर से जवाब दिया गया है।

ट्विटर ने किया विरोध

ट्विटर ने किया विरोध

अपनी याचिका में ट्विटर की ओर से कहा गया था कि सरकार के आदेश का मतलब है कि 39 ट्विटर हैंडल को प्रतिबंधित किया जाए, यह मनमाना, अनुपाहीन है, इसके पक्ष में दिए गए अधिकतर तर्क नियमों के तहत नहीं हैं। इसके अलावा ट्विटर ने यह भी दावा किया है कि सरकार का आदेश आईटी एक्ट के सेक्शन 69ए के तहत नहीं आता है। इस एक्ट के तहत सरकार के पास यह अधिकार है कि वह किसी भी ऑनलाइन जानकारी को प्रतिबंधित कर सकती है। लेकिन ट्विटर का कहना है कि इस एक्ट के तहत यह नहीं आता है।

कब सरकार कर सकती है बैन

कब सरकार कर सकती है बैन

कानून के अनुसार इस तरह का फैसला सिर्फ तभी लिया जा सकता है जब देश की संप्रभुता या अखंडता को खतरा हो। देश की सुरक्षा को खतरा हो। किसी मित्र दोस्त से संबंध खराब होने का खतरा हो। इन्हीं परिस्थितियों में इस तरह का फैसला लिया जा सकता है। लेकिन ट्विटर के दावे पर सरकार का कहना है कि ट्विटर ने कारण बताओ नोटिस देने के बाद ही उसके आदेश का पालन किया। सरकार ने यह भी आरोप लगाया है कि ट्विटर ने जानबूझकर यह देरी की।

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