TV चैनलों के अपलिंकिंग-डाउनलिंकिंग के लिए सरकार ने नई गाइडलाइन को दी मंजूरी
केंद्र सरकार ने बुधवार को भारत में टीवी चैनलों के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग के लिए नए दिशानिर्देशों को मंजूरी दे दी। नए दिशानिर्देशों के मुताबिक, कार्यक्रमों के लाइव प्रसारण के लिए किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। यही नहीं नई गाइडलाइन के मुताबिक, भारतीय टेलीपोर्ट्स को विदेशी चैनलों को भी अपलिंक करने की अनुमति होगी। इससे पहले इन कार्यक्रमों के सीधे प्रसारण के लिए अनुमति लेनी होती थी।

नई गाइडलाइन के चलते टीवी चैनलों को कार्यक्रमों के सीधा प्रसारण के लिए किसी पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं होगी।भारतीय टेलीपोर्ट विदेशी चैनलों को अपलिंक कर सकते हैं। हालांकि राष्ट्रीय/जनहित में सामग्री प्रसारित करने की बाध्यता भी होगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव अपूर्व चंद्रा ने कहा कि, हमने लगभग 11 वर्षों के बाद नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। हमने केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी ली है।
उन्होंने कहा कि, पिछले कुछ वर्षों में हमने जो सुधार किया है। पिछले कुछ वर्षों में हमने जो सुधार किया है, उसके अनुसार हमने इज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में भी कई सुधार किए हैं। अपूर्व चंद्रा ने कहा, हमने एक प्रावधान रखा है कि राष्ट्रीय महत्व या राष्ट्रीय हित की चीजों के लिए 30 मिनट का स्लॉट दिया जाना चाहिए, इसके लिए महिला सशक्तिकरण, कृषि, अध्यापन जैसी 7-8 थीम दी गई हैं। हमने सभी को बराबरी का मौका देने की कोशिश की है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में प्रसारित होने वाले 898 टेलीविजन चैनलों में से 532 अपनी सेवाओं के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग के लिए विदेशी उपग्रहों का उपयोग करते हैं। जिसके चलते अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग के लिए के लिए सरकार से अनुमति लेनी होती थी। हालांकि, नए दिशानिर्देशों के तहत, चैनलों पर राष्ट्र और जनहित में सामग्री प्रसारित करने की बाध्यता होगी।
अपूर्व चंद्रा ने कहा कि, नए दिशा-निर्देशों के तहत पड़ोसी देश जैसे नेपाल, श्रीलंका और भूटान भी अपने टेलीविजन चैनलों को अपलिंक करने के लिए भारत को हब के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।
हाल ही में सूचना एवं प्रसारण सचिव अपूर्व चंद्र ने एक कार्यक्रम में कहा था कि देश में 898 टेलीविजन प्रसारणकर्ताओं में से 532 चैनल अपनी सेवाओं की 'अपलिंकिंग' और 'डाउनलिंकिंग' के लिए विदेशी उपग्रहों का उपयोग करते हैं। हम उपग्रहों की अपलिंकिंग को नियंत्रण मुक्त करना चाहते हैं ताकि भारत इस क्षेत्र में एक केंद्र के तौर पर उभर सके। उन्होंने कहा था कि अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग दिशानिर्देश पिछली बार 2011 में जारी किए गए थे।












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