केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने मनाया अपना पहला दीक्षांत समारोह, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी हुईं शामिल
Central Sanskrit University convocation: केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने 7 मार्च 2024 को अपना पहला दीक्षांत समारोह मनाया। ये कार्यक्रम नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। जहां राष्ट्रपति द्रौपदी द्रौपदी मुर्मू भी शामिल हुई थीं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अलावा कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल हुए थे। कार्यक्रम में 3000 से ज्यादा स्नातक छात्रों को सम्मानित किया गया। इसके लिए पांच अन्य विद्वानों को भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सम्मानित किया है।

जिस पांच लोगों को उनके काम के लिए सम्मानित किया गया है, उनमें डॉ. पी.के. माधवन ( आधुनिक संस्कृत साहित्य), डॉ. लीना रस्तोगी (संस्कृत मराठी भाषा छात्रवृत्ति), प्रो. गया चरण त्रिपाठी (प्राच्य विद्या, मातृका छात्रवृत्ति), डॉ. देवीसहाय पांडे (वैदिक अध्ययन, अयोध्या) और शतावधानी डॉ. गणेश (मेडिटेशन मास्टरी) शामिल हैं।
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Central Sanskrit University: जानें कार्यक्रम की खास बातें
- केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह के कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्रीनिवास वरखेड़ी के स्वागत भाषण के साथ की गई।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने दीक्षांत भाषण में संस्कृत के शाश्वत ज्ञान, दुनिया भर की भाषाओं पर इसके प्रभाव और महात्मा गांधी की संस्कृत साक्षरता की वकालत पर बात की।
- केंद्रीय शिक्षा और कौशल विकास मंत्री और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलाधिपति धर्मेंद्र प्रधान भी इस अवसर पर उपस्थित थे। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संबोधन में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन की सराहना की। उन्होंने भारतीय संस्कृति में संस्कृत के महत्व पर बात की।
- इस दीक्षांत समारोह में कुल मिलाकर, 3000 छात्रों ने स्नातक की डिग्री लीं।

शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान के मार्गदर्शन में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने 5 नए पाठ्यक्रम भी शुरू किए हैं। 5 नए पाठ्यक्रम के नाम इस प्रकार हैं...
1. आयुर्वेदिक शिक्षा को गुरुकुल शिक्षा से जोड़ना
2. भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) और एकीकृत अनुसंधान अध्ययन पद्धति को बढ़ावा देना
3. प्राचीन न्यायशास्त्र में नवीन पाठ्यक्रम शुरू करना
4. नैतिक शिक्षा अभियान
5. ओलंपियाड का परिचय
ये पहल केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने और भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की प्रतिबद्धता को उजागर करती हैं।
Droupadi Murmu: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने भाषण में क्या कहा?
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा, '' भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव की भावना होना हमारी राष्ट्रीय चेतना का आधार है। हमें अपने देश की समृद्ध संस्कृति का एहसास होने पर हमारे अंदर गर्व की भावना जागृत होती है।''
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि, ''संस्कृत भाषा ने हमारी विशाल भूमि की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोया है। संस्कृत की शब्दावली से कई भारतीय भाषाएं समृद्ध हुई हैं और वे भाषाएं अलग-अलग क्षेत्रों और राज्यों में फल-फूल रही हैं। यह न केवल अद्वैत की भाषा है बल्कि यह जन-जन की भी भाषा है।''
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि, ''जिस भाषा में गार्गी, मैत्रेयी, अपाला और लोपामुद्रा जैसी महिला विद्वानों ने अमर योगदान दिया है, उस भाषा में महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक होनी चाहिए।''
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि, ''दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक विजेताओं में लड़के और लड़कियों की संख्या लगभग समान है।'' उन्होंने महिला सशक्तिकरण के प्रयासों के लिए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की तारीफ की।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि, '' अध्यात्म और नैतिकता पर अनगिनत उत्कृष्ट रचनाएं संस्कृत भाषा में हमारे पास मौजूद है।'' उन्होंने छात्रों से कहा कि, ''सत्य बोलना, सदाचारपूर्ण व्यवहार करना, स्वाध्याय में लापरवाही न करना, कर्तव्य से विमुख न होना और शुभ कार्यों के प्रति सचेत रहना एक छात्र का संकल्प होना चाहिए। ऐसा करने से वे अपनी प्रतिभा के साथ न्याय कर सकेंगे और अपने कर्तव्यों का पालन करने में भी सफल होंगे।''












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