जर्मन या संस्कृत में से किसी भी भाषा को चुन सकते हैं छात्र-केंद्र सरकार
नई दिल्ली। केंद्रीय विद्यालयों में संस्कृत भाषा को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य बनाये जाने के विवाद के बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने जवाब में कहा कि छात्र इस सत्र में संस्कृत या जर्मन में से किसी भी भाषा का चुनाव कर सकते हैं। सरकार के इस जवाब के बाद देशभर में तकरबीन 70 हजार छात्रों को बड़ी राहत मिली है।

गौरतलब है कि सरकार ने इससे पहले एक आदेश जारी करके कहा था कि देशभर में कक्षा 6 से कक्षा 8 के छात्रों को तीसरी भाषा के रूप में जर्मन भाषा के बजाए संस्कृत भाषा के विकल्प को चुनना होगा। जिसपर सफाई देते हुए केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा था कि छात्र संस्कृत से इतर किसी भी भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के विकल्प के तौर पर चुन सकते हैं। इसके लिए केंद्र सरकार हर संभव मदद करेगी।
वहीं विपक्ष ने इस मामले पर सरकार पर जमकर हमला बोलते हुए कहा था कि सरकार देश के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। सरकार छात्रों पर एक ऐसी भाषा को बीच सत्र में थोपना चाहती है जिसके बारे में छात्र पूरी तरह से अनभिज्ञ हैं। वहीं स्मृति ईरानी ने अपनी सफाई में कहा था कि जर्मन भाषा को तीसरी भाषा के विकल्प के रूप में पढ़ाया जाना संविधान के खिलाफ है।












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