मणिपुर हिंसा को लेकर केंद्र सरकार का बड़ा कदम, शांति समिति का हुआ गठन, मुख्यमंत्री समेत ये लोग शामिल

Manipur violence: मणिपुर हिंसा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। जिसके मुताबिक, एक शांति समिति बनाई गई है। जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल रहेंगे।

Manipur violence

Manipur Violence: मणिपुर हिंसा मामले में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, मणिपुर के राज्यपाल की अध्यक्षता में एक शांति समिति का गठन किया गया है। इस समिति में मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे। बताया गया है कि समिति के सदस्यों में मुख्यमंत्री, राज्य सरकार के कुछ मंत्री, सांसद, विधायक और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हैं। समिति में पूर्व सिविल सेवक, शिक्षाविद्, साहित्यकार, कलाकार, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न जातीय समूहों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।

गृह मंत्रालय ने बताया कि यह समिति राज्य के विभिन्न जातीय समूहों के बीच शांति बनाने में मदद करेगी। इनकी मदद से शांतिपूर्ण वार्ता बनेगा। साथ ही विरोधी दलों या समूहों के बीच बातचीत भी की जा सकेगी। समिति, सामाजिक सामंजस्य, आपसी समझ को मजबूत और विभिन्न जातीय समूहों के बीच सौहार्दपूर्ण संचार की सुविधा प्रदान करेगी।

आपको बता दें कि बीते दिन यानी शुक्रवार को मणिपुर में एक बार फिर हिंसा भड़की थी। कांगपोकपी और इम्फाल पश्चिम जिले के बीच की सीमा पर स्थित खोकेन गांव में संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा गोलीबारी की गई। घटना में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो घायल हुए थे। बताया गया कि गोलीबारी करने वाले संदिग्ध आतंकवादी और पीड़ित विभिन्न समुदायों के थे।

गृहमंत्री ने की थी शांति की अपील

मालूम हो कि तीन मई के बाद करीब एक महीने तक हिंसा की आग मणिपुर में जलती रही। इस आग को शांत करने और शांति की अपील करने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य के दौरे पर पहुंचे थे। उन्होंने संदेश दिया था कि प्रदर्शनकारी पुलिस के सामने सरेंडर कर दें और राज्य में शांति स्थापित करें। जिसका असर भी नजर आने लगा था। कुछ प्रदर्शनकारियों ने करीब 140 हथियार सरेंडर भी किए थे। लेकिन, एक बार फिर गोलाबारी ने हिंसा को जन्म दे दिया है।

हिंसा क्यों पनप रही?

दरअसल, मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग को लेकर विरोध किया जा रहा है। इसी को लेकर 3 मई को मणिपुर में दो समुदायों के बीच हिंसा भड़की थी। जिसमें 100 लोगों की जान चली गई थी। करीब 300 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

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