अफगानिस्तान का असर कश्मीर में दिख सकता है, बॉर्डर करने होंगे सील: बिपिन रावत
गुवाहाटी, 23 अक्टूबर: सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने गुवाहाटी में एक कार्यक्रम में कहा कि अफगानिस्तान के हालात को लेकर भारत को सतर्क रहने चाहिए। अफगानिस्तान में जो हो रहा है उसका असर जम्मू-कश्मीर में भी देखने को मिल सकता है। बता दें कि हाल के दिनों में जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाओं में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। कश्मीर में आतंकी नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। वहीं कश्मीर के हालातों को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक की है।

गुवाहाटी में बिपिन रावत ने बताया कि अफगानिस्तान में क्या हो रहा है, ये हम सब जानते हैं। इसका प्रभाव कश्मीर में हो सकता है, इसलिए हमें इसकी तैयारी करनी होगी। उन्होंने आगे कहा कि हमें अपनी सीमाओं को सील करना होगा, निगरानी बहुत जरूरी हो गई है। हमें इस पर नजर रखनी होगी कि बाहर से कौन आ रहा है, चेकिंग होना चाहिए। अफगानिस्तान पर गत 15 अगस्त को तालिबान ने कब्जा कर लिया था और देश संकट के दौर से गुजर रहा है। हाल के दिनों में यहां काफी आंतकी घटनाएं हुई हैं।
विकांत सिंह मेमोरियल लेक्चर देते हुए सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने शनिवार को कहा कि वैश्विक शक्ति के लिए चीन की महत्वाकांक्षाओं के कारण दक्षिण एशिया की स्थिरता को 'सर्वव्यापी खतरा' है। उन्होंने भारत-पाक संबंधों पर कहा कि पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के साथ-साथ गैर-सरकारी तत्व भारत और पाकिस्तान के बीच शांति प्रक्रिया में एक बाधा है। पाकिस्तान के साथ चीन की साझेदारी और जम्मू-कश्मीर पर उसके रुख को भारत विरोधी सांठगांठ के रूप में वर्णित किया जा सकता है।
म्यांमार के मुद्दे पर जनरल रावत ने कहा कि वहां जो भी हो रहा है उससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते प्रभावित हो रहे हैं। वहां गृह युद्ध की स्थिति है। हालांकि, हमारे उसके साथ अच्छे संबंध हैं। वे हम पर भरोसा करते हैं, मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि म्यांमार चीन की तरफ नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि चीन एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में 'विशाल' पैठ बना रहा है। उस का म्यांमार और पाकिस्तान के साथ व्यवहार और बांग्लादेश में प्रवेश भी भारत के हित में नहीं है।












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