MP: गोहद में जातीय समीकरणों के भीतर छिपा जीत का फॉर्मूला, जानिए किसका पलड़ा भारी ?
भोपाल। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में गोहद सीट(Gohad Assembly Seat) भी उन 28 सीटों में है जहां पर उपचुनाव होने हैं। वैसे तो यहां भाजपा और कांग्रेस में टक्कर होती रही है लेकिन इस बार उपचुनाव में बसपा के उतर जाने से इस सीट पर कब्जे की जंग रोमांचक हो गई है। भाजपा ने कांग्रेस की विधायकी छोड़कर आए रणवीर जाटव को प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस ने मेवाराम जाटव को मैदान में उतारा है तो बसपा से जसवंत पटवारी मैदान में ताल ठोक रहे हैं।

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर 2018 में कांग्रेस ने अपना परचम लहराया था लेकिन ज्यादा दिन सीट पार्टी के पास रह न सकी। पार्टी के विधायक रणवीर जाटव विधायकी छोड़कर भाजपा में चले गए। रणवीर उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवार हैं। 2018 के चुनाव में उन्होंने भाजपा के ही उम्मीदवार लाल सिंह आर्य को 23,989 वोटों के अंतर से मात दी थी। रणवीर को 62,981 वोट मिले थे जो कुल पड़े वोटों का 49 प्रतिशत था।
रणवीर के सामने अब इस जीत को बनाए रखना चुनौती है। इस बार वे कांग्रेस की जगह भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं। ऐसे में उन्हें भाजपा में नाराज भितरघातियों को साधने की सबसे ज्यादा जरूरत होगी। रणवीर आए तो सिंधिया के साथ ही थे लेकिन कहा जाता है कि वे पहले ही मन बना चुके थे।
गोहद का सियासी समीकरण
गोहद के सियासी गणित को समझने के लिए जातीय समीकरणों को समझना बहुत जरूरी है। वैसे तो गोहद आरक्षित सीट है लेकिन यहां तोमर ठाकुर सबसे प्रभावशाली हैं। इसके बाद ब्राह्मण और ओबीसी मतदाता निर्णायक स्थिति में होते हैं। 2018 के अनुसार यहां पर 214191 मतदाता हैं। इनमें ब्राह्णण 18.5 प्रतिशत, 14.9 प्रतिशत जाटव, ठाकुर मतदाता 8.1 प्रतिशत, 8.5 प्रतिशत गुर्जर और कुशवाहा वोटर 6.6 प्रतिशत जबकि कोरी 6 प्रतिशत हैं।
दलित मतदाताओं के असर को देखते हुए यहां बसपा भी खेल में आ सकती है। 1993 में बसपा यहां से जीत चुकी है जबकि 98 में दूसरे नंबर पर रही है। हालांकि पार्टी उसके बाद से कमजोर ही होती गई है। जाटव मतदाताओं को देखते हुए कांग्रेस और भाजपा दोनों ने जाटव प्रत्याशी उतारे हैं जबकि बसपा जसवंत पटवारी के सहारे मैदान में है। 2018 में बसपा यहां तीसरे नंबर पर रही थी। ऐसे में अगर पार्टी अच्छा प्रदर्शन करती है तो खेल पलट सकती है।
छह चुनावों के नतीजे
वैसे तो इस सीट पर भाजपा का प्रभाव ज्यादा रहा है लेकिन पिछले छह चुनावों (एक उपचुनाव भी) की बात करें तो भाजपा और कांग्रेस में बराबरी पर मुकाबला रहा है। 1998 और 2003 में भाजपा नेता और पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य ने यहां से जीत दर्ज की। 2008 में कांग्रेस के माखनलाल जाटव ने 1553 वोटों के अंतर से हरा दिया। बाद में माखनलाल जाटव की हत्या हो गई। उपचुनाव में कांग्रेस ने माखनलाल के बेटे रणवीर जाटव को मैदान में उतारा। रणवीर ने भारी अंतर से भाजपा के लाल सिंह आर्य को शिकस्त दे दी। 2013 में एक बार फिर भाजपा के लाल सिंह आर्य की किस्मत ने साथ दिया और उन्होंने रणवीर जाटव को हरा दिया। 2018 में जनता का मूड बदल गया और कांग्रेस के रणवीर जाटव ने ये सीट 23 हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत ली।
भितरघात होगी समस्या
गोहद में भाजपा को कांग्रेस के साथ ही पार्टी के असंतुष्टों को भी साधकर रखना बड़ी चुनौती है। 1998, 2003 और 2013 में इस सीट से जीत दर्ज कर चुके भाजपा के पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य का भी इस क्षेत्र में प्रभाव है। ऐसे में वे रणवीर जाटव के लिए कितना प्रचार करते हैं ये भी देखना होगा। जीत किसके साथ होगी ये 10 नवम्बर को पता चलेगा लेकिन चुनाव बहुत ही दिलचस्प हो गया है।












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