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Cashless treatment: क्‍या है सरकार की कैशलेस इलाज स्‍कीम? जिसमें सड़क दुर्घटना के पीड़ितों का होगा फ्री इलाज

Cashless treatment scheme: सड़‍क हादसे में घायल होने वाले पीड़ितों के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़ा ऐलान किया गया है। सड़क हादसे में घायल हुए लोागों को 'कैशलेस' ट्रीटमेंट की सुविधा मिलेगी। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को इस 'कैशलेस'ट्रीटमेंट स्‍कीम की घोषणा की है।

नितिन गडकरी ने बताया कैशलेस ट्रीटमेंट के तहत सड़क हादसे का शिकार हुए पीडि़तों का कैशलेस इलाज करवाया जाएगा। प्रति दुर्घटना प्रति व्‍यक्ति अधिकतम 1.5 लाख रुपये का कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इलाज का खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। आइए जानते हैं क्‍या है 'कैशलेस'ट्रीटमेंट स्‍कीम और क्‍या हैं शर्ते?

Cashless treatment scheme

केंद्रीय मंत्री ने बताया ये 'कैशलेस'ट्रीटमेंट स्‍कीम मार्च में शुरू की जा रही है। जिसके तहत पूरे भारत में सड़क दुर्घटना में पीड़ितों को कैशलेस ट्रीटमेंट करवाने की सुविधा दी जाएगी। इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना के पीड़ित के सात दिन तक इलाज पर अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का खर्च सरकार वहन करेगी।

दुर्घटना के 24 घंटे के पुलिस रिपोर्ट है जरूरी

नितिन गडकरी ने बताया अगर पुलिस को हादसे के 24 घंटे के अंदर सूचित कर दिया जाता है तो केंद्र सरकार पीड़ित के इलाज का खर्च उठाएगी। इसके साथ ही सरकार ने हिट एंड रन मामलों में पीड़ित परिवार को दो लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है।

नितिन गडकरी ने बताया ये कैशलेस ट्रीटमेंट की योजना किसी भी श्रेणी की सड़क पर चलने वाले वाहनों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर लागू होगी। इस योजना का संचालन राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य प्राधिकरण (NHA), अस्‍पताल, पुलिस और हेल्‍थ एजेंसिी के समन्‍वय के साथ कार्यान्‍वयन एजेंसी करेगी।

जानें कब लागू होगी ये कैशलेस इलाज स्‍कीम?

बता दें सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 14 मार्च, 2024 को पायलट प्रोजेक्‍ट के तहत पहले चंडीगढ़ इसके बाद छह राज्यों में ये योजना बढ़ाई गई थी। सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को समय पर इलाज की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए शुरू की गई ये योजना अब मामार्च में इसे पूरे भारत में लागू कर दिया जाएगा।

भारत में है 22 लाख ड्राइवरों की कमी

नितिन गडकरी ने खुलासा किया भारत में इस समय ड्राइवरों की भारी कमी हैं।भारत में लगभग 22 लाख ड्राइवरों की कमी है। गडकरी ने जयपुर में हुई दुर्घटना का उदाहरण दिया, जिसमें ड्राइवर सुबह 4:30 बजे से रात 9:30 बजे तक गाड़ी चलाता रहा। जो यूरोप में निर्धारित आठ घंटे की ड्राइविंग सीमा से कहीं ज़्यादा है। इससे निपटने के लिए मंत्रालय नए उपायों पर विचार कर रहा है, जैसे कि वाहन के इंजन को चालू करने के लिए आधार से जुड़े कार्ड स्वाइप की आवश्यकता, जिससे ड्राइविंग के घंटों को विनियमित किया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि ड्राइवरों को पर्याप्त आराम मिले।

ड्राइवर प्रशिक्षण नीति शुरू कर रही सरकार

गडकरी ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए, जिसमें बताया कि 2024 में 1.80 लाख मौतों में से 35,000 मौतें वैध लाइसेंस के बिना वाहन चलाने वाले ड्राइवरों के कारण हुए। इन सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि को देखते हुए, मंत्रालय ने बिना लाइसेंस के वाहन चलाने की समस्या से निपटने के लिए ड्राइवर प्रशिक्षण नीति शुरू की है। इसके तहत भारत में 1,250 नए प्रशिक्षण और फिटनेस केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिसमें लगभग 4,500 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इस पहल का लक्ष्य लगभग 25 लाख नए ड्राइवरों को प्रशिक्षित करना है और इससे सड़क सुरक्षा मानकों में सुधार के साथ-साथ लगभग 15 लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

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