अब IIM में मोदी पर केस स्टडी, टॉपिक का नाम ‘द मेकिंग ऑफ ब्रांड नमो’

आईआईएम के छात्र भी निश्चित रूप से इस पर स्टडी करेंगे। विवि के इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (आईएमएस) ने मोदी के चुनावी अभियान को ब्रांडिंग और मार्केटिंग का बड़ा उदाहरण मानकर केस स्टडी शुरू करने की घोषणा की है। भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) ने भी इसे अध्ययन का विषय माना है। आईएमएस के प्लेसमेंट ऑफिसर, शिक्षकों और छात्रों के दल ने ‘द मेकिंग ऑफ ब्रांड नमो' शीर्षक से केस स्टडी पर काम शुरू कर दिया है।
प्लेसमेंट ऑफिसर निशिकांत वाइकर, अवनीश व्यास और शिक्षक दिव्या पुरोहित के साथ चार विद्यार्थियों की टीम ने मैनेजमेंट की नजर से मोदी के चुनावी स्टडी तैयार कर रहे आईएमएस के जसरीन कौर, चंदन अरोरा, अभिनव चौरसिया और अंकित श्रीवास्तव के अनुसार ब्रांडिंग की सही रणनीति के दम पर मोदी ने पहले पार्टी में खुद को राष्ट्रीय नेता स्वीकार करवाया। इसके बाद अहमदाबाद में 170 लोगों की टीम मोदी की ब्रांडिंग में लगी रही। चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान मोदी ने खुद की तमाम खासियतें लोगों तक पहुंचाई। इसके लिए मिक्स मीडिया का उपयोग किया गया। इसमें सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सीधे सवांद करना भी शामिल था। यह अच्छा उदाहरण है कि किसी ब्रांड को स्थापित करने के लिए लोगों तक पहुंचा कैसे जा सकता है।
‘अब की बार मोदी सरकार" नारे को मनोवैज्ञानिक असर पैदा करने वाला मानकर मार्केटिंग के हिसाब से मुफीद माना जा रहा है। मैनेजमेंट के शिक्षकों के अनुसार 1996 में भाजपा ने नारा दिया था ‘सबको देखा बारी-बारी, अबकी बार अटल बिहारी', उस वर्ष भी भाजपा को सत्ता मिली थी। नारे में किसी नाम का शुमार होना लोगों को मनोवैज्ञानिक ढंग से प्रभावित करता है। नारे गढ़ने की इस कला से किसी उत्पाद के लिए अच्छी टैग लाइन बनाना सीख सकते हैं।












Click it and Unblock the Notifications