'बहू सारा पैसा और कीर्ति चक्र लेकर देश से भागने वाली है', शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह के पिता का सबसे बड़ा आरोप

Captain Anshuman Singh Widow Smriti Singh: मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित कैप्टन अंशुमान सिंह का परिवार, उनके माता-पिता और विधवा पत्नी स्मृति सिंह पिछले काफी दिनों से सुर्खियों में हैं। 5 जुलाई 2024 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कैप्टन अंशुमान सिंह की पत्नी और मां को कीर्ति चक्र दिया था। उसके बाद कैप्टन अंशुमान सिंह के पिता रवि प्रताप सिंह ने बहू पर कई गंभी आरोप लगाए हैं।

अब कैप्टन अंशुमान सिंह के पिता रवि प्रताप सिंह ने आरोप लगाया है कि, उनकी और अंशुमान की विधवा स्मृति सिंह वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र और अनुग्रह राशि लेकर देश से भागने की योजना बना रही है। कैप्टन अंशुमान सिंह के परिवार ने कहा है कि उनकी बहू जुलाई 2023 से ही उनके साथ नहीं रह रही हैं।

Captain Anshuman Singh Widow Smriti Singh

शहीद अंशुमान सिंह के पिता ने स्मृति पर लगाया अब तक का सबसे बड़ा आरोप

एबीपी न्यूज के मुताबिक,कैप्टन अंशुमान सिंह के पिता रवि प्रताप सिंह ने दावा किया है कि,

''स्मृति ने उनके बेटे को प्यार के नाम पर धोखा दिया। वह उससे प्यार नहीं करती थी। स्मृति वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र और अनुग्रह राशि लेकर ऑस्ट्रेलिया भागने की योजना बना रही है।''

यह आरोप शहीद सैनिक के माता-पिता द्वारा यह दावा किए जाने के कुछ ही दिनों बाद आया है कि उनकी बहू स्मृति सिंह वीरता पुरस्कार के साथ-साथ उनके बेटे के कपड़े और फोटो एलबम भी अपने साथ पंजाब के गुरदासपुर स्थित अपने घर ले गई है। स्मृति ने अपने पति के आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज स्थायी पते को लखनऊ से बदलकर गुरदासपुर कर लिया है।

हालांकि इस दावे पर अब तक स्मृति सिंह की ओर से कोई सफाई नहीं दी गई है। स्मृति सिंह और उनका पूरा परिवार इस मामले पर बयान देने से बच रहा है।

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कैप्टन अंशुमान सिंह के शहीद होने पर पत्नी और माता-पिता को कितने रुपये मिले?

  • सेना के सूत्रों मुताबिक आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड (AGIF) द्वारा एक करोड़ अनुग्रह राशि के तौर पर दिए गए हैं। ये राशि शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह की पत्नी स्मृति सिंह और और माता-पिता के बीच बांटा गया है। यानी 50 लाख रुपये स्मृति सिंह को और 50 लाख रुपये माता-पिता को दिए गए हैं।
  • वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर 50 लाख रुपये शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह के परिवार को दिए गए हैं। इसमें से 35 लाख रुपये दिवंगत कैप्टन अंशुमान सिंह की पत्नी को दिए गए हैं और 15 लाख रुपये उनके माता-पिता को मिले हैं।
  • सेना द्वारा मिलने वाला पेंशन स्मृति सिंह को मिलेगा...क्योंकि कैप्टन अंशुमान ने निकटतम परिजन (NoK) में अपनी पत्नी का नाम दिया था। वहीं कैप्टन अंशुमान के पिता खुद के रिटायर आर्मी अधिकारी हैं, उन्हें सेना द्वारा पेंशन और अन्य सुविधाएं मिलती हैं।
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कैप्टन अंशुमान सिंह के पिता ने NOK कानून में की बदलाव की मांग

कैप्टन अंशुमान के पिता ने सेना के 'निकटतम परिजन' NOK कानून में भी बदलाव की मांग की है। यह कानून यह निर्धारित करता है कि सेवा में किसी व्यक्ति के साथ कुछ घटित होने पर संपत्ति का उत्तराधिकार किसे मिलेगा और चिकित्सा अपडेट किसे मिलेगा।

जब कोई व्यक्ति सेना में शामिल होता है, तो उसके माता-पिता या अभिभावक का नाम NOK में दर्ज होता है। शादी के बाद, पति या पत्नी का नाम माता-पिता के नाम की जगह उनके अगले रिश्तेदार के रूप में दर्ज हो जाता है।

कैप्टन अंशुमान सिंह के पिता और माता ने बहू स्मृति सिंह पर क्या-क्या आरोप लगाए हैं?

  • कैप्टन अंशुमान की मां मंजू सिंह ने कहा, "मेरे बेटे ने जो पुरस्कार लिया, वह उसका है, लेकिन दुख इस बात का है कि मेरी बहू अब हमारे साथ नहीं रहती है, वो दूर चली गई है, इसलिए पुरस्कार भी दूर चला गया है। लेकिन अगर वह हमारे साथ रहती, तो कोई समस्या नहीं थी।"
  • कैप्टन सिंह के पिता रवि प्रताप सिंह ने कहा कि उन्हें भी अपने बेटे के कीर्ति चक्र पदक पर अधिकार है। उन्होंने कहा, "हमारी कोई मांग नहीं है, अगर कोई मुद्दा है तो केवल वह ही बता सकती है। मैंने सार्वजनिक रूप से बहुत कुछ कहा है। किसी भी माता-पिता का अपने शहीद बच्चे के कीर्ति चक्र पर अधिकार होना चाहिए।"

कैसे शहीद हुए थे कैप्टन अंशुमान सिंह?

कैप्टन अंशुमान सिंह भारतीय सेना में डॉक्टर थे। कैप्टन अंशुमान सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के मूल निवासी थे। फिलहाल उनका परिवार लखनऊ में रहता है। कैप्टन अंशुमान सिंह को मार्च 2020 में आर्मी मेडिकल कोर में कमीशन मिला था। वह सियाचिन ग्लेशियर पर चंदन कॉम्प्लेक्स के लिए मेडिकल अधिकारी के रूप में 26 पंजाब रेजिमेंट में शामिल हुए थे।

चंदन ड्रॉपिंग जोन में 19 जुलाई 2023 को एक आग लगने की घटना में अधिकारी अंशुमान सिंह अपने साथियों और मेडिकल किट को बचाते हुए शहीद हो गए थे। कैप्टन अंशुमान सिंह के वीरतापूर्ण कार्य के लिए उन्हें मरणोपरांत देश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र से 5 जुलाई 2024 को सम्मानित किया गया है।

कैप्टन अंशुमान सिंह और स्मृति सिंह की शादी को सिर्फ 5 महीने ही हुए थे। कैप्टन अंशुमान सिंह और स्मृति सिंह शादी से पहले 8 सालों तक एक-दूसरे के साथ रिलेशनशिप में थे।

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