15632 फीट ऊंचाई, -32°C तापमान, दुनिया का मुश्किल बैटल ग्राउंड, जहां तैनात हुई पहली लेडी अफसर
दुनिया का सबसे मुश्किल युद्ध क्षेत्र सियाचिन है। जहां ठंड इतनी की होती है कि मुंह की लार तक जम जाती है। कैप्टन शिवा चौहान ऐसे कठिन क्षेत्र में तैनात होने वाली भारत की पहली महिला अधिकारी हैं।

Capt Shiva Chauhan In Siachen: दुनिया के कठिन युद्ध क्षेत्र (Battle Ground) सियाचिन में तैनात होने वली कैप्टन शिवा चौहान भारत की पहली महिला लेडी अफसर हैं। इस दुर्गम क्षेत्र में देश की सेवा में तैनात होने से पहले से पहले उन्हें कई कठिन परीक्षाओं और कड़ी ट्रेनिंग से गुजरना पड़ा। इसके लिए सियाचिन बैटल स्कूल में कैप्टन शिवा चौहान ने खूब पसीना बहाया। आइए जानते हैं इस जांबाज लेडी अफसर ने इस कठिन क्षेत्र में जाने से पहले खुद को साबित करने के लिए किस तरह खुद को तैयार किया और किन- किन परीक्षाओं से गुजना पड़ा।

कैप्टन शिवा का प्रशिक्षण
दुनिया का सबसे कठिन युद्ध क्षेत्र सियाचिन में रहना जितना मुश्किल है, उसकी ट्रेनिंग भी उसके कई गुना कड़ी होती है। सियाचिन बैटल स्कूल में जवानों को इसका प्रशिक्षण दिया जाता है। कैप्टन शिवा चौहान को भी इसी स्कूल में ट्रेनिंग दी गई। जिसमें धीरज प्रशिक्षण (Endurance Training), बर्फ की दीवार पर चढ़ना (Ice Wall Climbing), हिमस्खलन और हिमस्खलन बचाव (Avalanche and Crevasse Rescue ) और उत्तरजीविता अभ्यास (Survival Drills) की ट्रेनिंग शामिल थी।

सियाचिन में पहली लेडी अफसर
कैप्टन शिवा चौहान दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन में ऑपरेशनल रूप से तैनात होने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। इससे पहले महिला अधिकारियों को 9,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित सियाचिन बेस कैंप में तैनात किया जाता रहा। लेह स्थित फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने ट्वीट कर कहा कि ये पहला मौका है जब महिला अधिकारी को सियाचिन ग्लेशियर के वास्तविक पोस्ट पर तैनात किया गया है।

15632 फीट ऊंची पोस्ट पर तैनाती
फायर एंड फ्यूरी सैपर्स ने ट्वीट के साथ तस्वीरें शेयर की और बताया कि दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन में कठिन प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कुमार पोस्ट (Kumar Post) पर लेडी अफसर कैप्टन शिवा चौहान तैनात किया गया है। सियाचिन ग्लेशियर में वास्तविक पोस्ट पर ये उनकी सक्रिय तैनाती है। बता दें कि फायर एंड फुरी कॉर्प्स को आधिकारिक तौर पर 14वां कॉर्प्स है।

-32°C तापमान में देश की रक्षा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ग्लेशियर पर करीब 2500 से अधिक भारतीय और पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। सियाचिन में दिन का तापमान शून्य से 21 डिग्री कम यानी माइनस 21 डिग्री सेल्सियस (-21°C) रहता है, जबकि रात में पारा 10 डिग्री (-10°C) और अधिक गिर जाता है। सियाचिन में आम तौर पर रात का तापमान शून्य से 32 डिग्री सेल्सियस नीचे (-32°C) आसपास रहता है।

सियाचिन में रहना बड़ी जंग
दुनिया के सबसे कठिन क्षेत्र सियाचिन में रहना किसी युद्ध की परिस्थितियों से गुजरने से कम नहीं है। यहां हर रोज जीवन के लिए प्रकृति संघर्ष करना पड़ता है। इतने कम तापमान में पानी ही नहीं मुंह की लार तक जम जाती है। बर्फ ही बर्फ होती है। 3000 सैनिक हमेशा तैनात रहते हैं। हादसों और हिमस्खलन की चपेट में आने से कई जवानों की यहां मौत भी हो चुकी है। एक आंकड़े के मुताबिक 1984 से 2015 तक सियाचिन में खराब मौसम की वजह से सियाचिन में 873 जवानों की मौत हो चुकी थी।
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