साड़ी-शराब नहीं बल्कि रिचार्ड से पटाए जा रहे हैं वोटर्स

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गोरखपुर। पिछले लोकसभा चुनावों में उम्मीदवार शराब और साड़ी बांटकर जनता को अपने पाले में करने की जुगत करते थे। यह आम बात थी कि कोई उम्मीदवार अपने वोटरों के बीच शराब और साड़ी बांट रहा है, लेकिन ये तरीका अब पुराना हो गया है। इस चुनाव में शराब और साड़ी का खेल खत्म हो चुका है।

शराब और साड़ी की जगह इस बार तकनीकी या घरेलू खर्चे ने ले ली है। चुनावी मैदान में उतरे कैडिडेंट्स मोबाइल रीचार्ज, डिश टीवी रीचार्ज या फिर रसोई गैस सिलिंडर और नर्सिंग होम का बिल को वोट में बदलने की तरकीब लगा रहे है।

बात गोरखपुर की करें तो यहां मतदाताओं की चांदी है। कोई कैडिडेंट्स उनके मोबाईल रिचार्ड करवा रहा है तो कोई असप्ताल का बिल भर रहा है। कोई रसोई गैस घर पहुंचाकर वोट मांग रहा है तो डिश टीवी को कैश करने में जुटा हुआ है।

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दरअसल गोरखपुर के ग्रामीण इलाकों की हालत कुछ खास अच्छी नहीं है। यहां इक्के-दुक्के घरों में मोबाइल फोन है। लोग 10-20रु. का रिचार्ड करवाकर मिस्ड कॉल से बात करते है। ऐसे में मोबाईल रिचार्ड कर सस्ते में वोट हासिल करना यहां के उम्मीदवारों के अ च्छा मौका है।

अभी कुछ दिन पहले प्रशासन के अफसरों की मीटिंग में भी यह बात सामने आई कि कुछ प्रत्याशी अपने वोटरों का मोबाइल रीचार्ज करा रहे हैं। तब यह कहा गया कि इस पर नजर रखने का तरीका खोजा जाए, लेकिन यहां बात सिर्फ मोबाइल रीचार्ज तक ही नहीं है। डिश टीवी रीचार्ज को लेकर भी ऐसा ही हो रहा है। गोरखपुर जिले के एक क्षेत्र में तो कुछ वोटरों को रसोई गैस सिलिंडर भरवा कर दिया जा रहा है। इन तरीकों से एक बात तो साफ है कि भले वोट किसी को दे मतदाताओं का फायदा अच्छा है।

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