वह दिन दूर नहीं जब कनाडा की नीति बनाएंगे पंजाबी !
बेंगलुर। कनाडा की धरती पर सिख समुदाय के लोग व्यापार में मजबूती से पैर जमाने के साथ वहां की राजनीति का भी अहम हिस्सा बन चुके हैं। यहीं कारण हैं कि वहां की 3 बड़ी राजनीतिक पार्टिंयां का सत्ता पर काबिज होने की आस पंजाबी समुदाय के लोगों पर टिकी हुई हैं। तीनों पार्टियों को उम्मीद हैं कि चुनाव में उनकी नांव सिख कैन्डीडेट ही पार लगाएगे। यहीं नहीं कनाडा के इतिहास में यह पहली बार है कि कोई सिख उम्मीदवार प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ रहा हैं।

बता दें कनाडा की 43वीं संसद के लिए 21 अक्तूबर 2019 को चुनाव हो रहा हैं। इस संसदीय चुनावों में कुल 338 सदस्यीय संसद के लिए मतदान होगा। सबसे रोचक बात ये हैं कि कनाडा के संघीय चुनावों में इस बार 50 से अधिक उम्मीदवार पंजाब के हैं। जिसमें 18 पंजाबी महिलाएं उम्मीदवार भी हैं। वहां के तीनों राजनीतिक दल लिबरल पार्टी, कंजरवेटिव व न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी पंजाबी समुदाय के उम्मीदवारों को टिकट दिया हैं। 21 अक्टूबर को मतदान होगे और देर रात तक सभी नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। अगर चुनाव में कनाडा की राजनीतिक पार्टियों की उम्मीद पर पंजाबी उम्मीदवार खरे उतरते हैं तो कनाडा की संसद में पंजाबी समुदाय का दबदबा हो जाएगा।
कनाडा में पंजाबी हैं मजबूत वोट बैंक
गौर करने वाली बात यह हैं कि कनाडा में पंजाबी लोगों की आबादी इतनी बढ़ गयी है कि वहां जाकर आपको एहसास होगा कि आप भारत में ही हैं। नवीनतम संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के वर्ल्डोमीटर विस्तार के आधार पर, कनाडा की वर्तमान जनसंख्या सितंबर 2019 तक 37,493,235 है। आज की तारीख़ में कनाडा की आबादी धर्म और नस्ल के आधार पर काफ़ी विविध है। जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक 2016 में कनाडा की कुल आबादी में अल्पसंख्यक 22.3 फ़ीसदी हो गए थे।
वहीं 1981 में अल्पसंख्यक कनाडा की कुल आबादी में महज 4.7 फ़ीसदी थे। इस रिपोर्ट के अनुसार 2036 तक कनाडा की कुल आबादी में अल्पसंख्यक 33 फ़ीसदी हो जाएंगे। यहीं कारण हैं कि इन चुनावों में कनाडा की तीन प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने सिख वोट बैंक को साधने के लिए चुनावी मैदान में पंजाबी उम्मीदवार उतारे हैं। इस बार 18 पंजाबी मूल की महिलाओं सहित 50 पंजाबी सांसद बनने के लिए अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिनमें डाक्टर, वकील व पत्रकार शामिल हैं।

कनाडा में बसने वाले पहले सिख
गौरतलब हैं कि 1897 में महारानी विक्टोरिया ने ब्रिटिश भारतीय सैनिकों की एक टुकड़ी को डायमंड जुबली सेलिब्रेशन में शामिल होने के लिए लंदन आमंत्रित किया था। तब घुड़सवार सैनिकों का एक दल भारत की महारानी के साथ ब्रिटिश कोलंबिया के रास्ते में था। इन्हीं सैनिकों में से एक थे रिसालेदार मेजर केसर सिंह रिसालेदार कनाडा में शिफ्ट होने वाले पहले सिख थे। तभी से कनाडा की धरती पर अपने पैर पसार रहे सिख समुदाय के लोग आज कनाडा की संघीय प्रणाली का अहम हिस्सा बन गए हैं।
42वीं संसद में पंजाबी मूल के 18 सांसद थे
महत्पूर्ण बात ये है कि कनाडा की 42वीं संसद में पंजाबी मूल के 18 सांसद थे, जिनमें से दर्शन सिंह कंग व राज ग्रेवाल इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे और दीपक ओबराय की मौत हो चुकी हैं। 43वीं संसद के चुनाव में पंजाबी मूल के कैबिनेट मंत्री हरजीत सिंह सज्जन, नवदीप सिंह बैंस व अमरजीत सिंह सोही अपने-अपने क्षेत्रों से दोबारा चुनाव मैदान में हैं। वहीं ब्रैप्टन सेंट्रल से सांसद रमेश संघा, उत्तरी से मैनी सिद्धू मैदान में उतारे हैं। मंत्री अमरजीत सिंह सोही का मुकाबला पूर्व राज्य मंत्री टिम्म उप्पल के साथ होगा। कनाडा के इतिहास में यह पहली बार है कि कोई सिख उम्मीदवार प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ रहा है।
जानिए कनाडा के कौन दिग्गज हैं चुनावी मैदान में
न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रधान जगमीत सिंह खुद चुनाव मैदान में हैं। रंगीन पगड़ियों के शौकीन जगमीत सिंह इस देश के एक प्रमुख संघीय राजनीतिक दल का नेतृत्व करने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के पहले सदस्य हैं। फिलहाल उनके सामने उस न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी को फिर से खड़ा करने की गंभीर चुनौती है, जो वर्ष 2015 के चुनाव में 59 सीटों पर हार गई थी। यह पार्टी कनाडा की संसद में तीसरे स्थान पर है।
कनाडा में बेशक मुख्य मुकाबला लिबरल व कंजर्वेटिव पार्टी के बीच ही होगा। कनाडा में पंजाबियों का गढ़ समझे जाते सरी, ब्रैंपटन व कैलग्री शहरों के चार ऐसे संसदीय क्षेत्र हैं जहां पंजाबी उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर होगी। यहां पर तमाम राजनीतिक दल पंजाबी उम्मीदवारों पर दांव खेल रहे हैं।
ब्रैंप्टन साउथ से सोनिया सिद्धू लिबरल पार्टी की टिकट पर दूसरी बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जबकि कंजर्वेटिव पार्टी के रमनदीप सिंह बराड़, एनडीपी के मनदीप कौर व पीपल्ज पार्टी के राजविंदर घुम्मन उम्मीदवार हैं। ब्रैंपटन ईस्ट क्षेत्र से लिबरल पार्टी के नौजवान नेता मनिंदर सिद्धू मैनी , कंजर्वेटिव पार्टी के बीबी रमोना सिंह, एनडीपी के शरनजीत सिंह व पीपल्स पार्टी की ओर से गौरव वालिया मैदान में हैं।
कैलग्री स्काइव्यू संसदीय क्षेत्र से प्रसिद्ध पत्रकार व लिबरल उम्मीदवार निर्मला नायडू, कंजर्वेटिव पार्टी की जगदीप कौर सहोता, एनडीपी के गुरिंदर सिंह व पीपल्ज पार्टी के हैरी ढिल्लों अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। सरी-न्यूटन से लिबरल उम्मीदवार सुख धालीवाल प्रसिद्ध रेडियो होस्टल व एनडीपी उम्मीदवार हरजीत सिंह गिल व प्रसिद्ध टीवी होस्ट कंजर्वेटिव उम्मीदवार हरप्रीत सिंह के बीच कांटे की टक्कर होने की पूरी संभावना है।
टोरंटो के निकट ब्रैंपटन सेंटर क्षेत्र से लिबरल उम्मीदवार रमेश संघा, कंजर्वेटिव पार्टी की पवनदीप कौर गौसल व पीपल्स पार्टी के बलजीत सिंह बावा के बीच मुकाबला होगा, तीनों पंजाबी मूल के लोग हैं।

इन पार्टियों ने उतारे भारतीय मूल के उम्मीदवार
इन चुनावों में लिबरल पार्टी ने 20 कंजर्वेटिव ने 16 एनडीपी ने 12 व पीपल्ज पार्टी ने 5 भारतीय मूल के उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारा है, जिनमें से 50 पंजाबी, बीबी निर्मला नायडू आंध्र प्रदेश व जिगर पटेल गुजरात से हैं। ब्रैंपटन वेस्ट से लिबरल उम्मीदवार कमल खैरा व एनडीपी की नवजीत कौर बराड़ के बीच मुकाबला होगा। ब्रैंपटन नार्थ से लिबरल उम्मीदवार रूबी सहोता व कंजर्वेटिव के अर्पण खन्ना के बीच टक्कर है।
सरी सेंटर संसदीय क्षेत्र से लिबरल उम्मीदवार रणदीप सिंह सराय, कंजर्वेटिव पार्टी की टीना बस्स, एनडीपी के सुरजीत सिंह सरां व पीपल्ज पार्टी के जसविंदर सिंह दिलावरी के बीच मुकाबला होगा।
लिबरल उम्मीदवार डॉ. जग्ग आनंद कैलग्री फॉरेस्ट, अनीता आनंद ओकविल, देव विरदी सकीना वल्ली, नीलम कौर बराड़ बनर्बी साउथ, बरदीश चग्गड़ वाटरल, अंजू ढिल्लों लासाल, राज सैनी किचनर, जति सिद्धू शिन, मासकी फ्रेजर कैनन व रागन सिकंद मिसीसागा-स्ट्रीटवैल से लिबरल पार्टी के उम्मीदवार हैं जबकि कंजर्वेटिव पार्टी के सनी अटवाल कैम्ब्रिज, संजय भाटिया डेवनपोर्ट, निक्की कौर हैमिल्टन ईस्ट, सर्बजीत कौर ईटोबीको नार्थ, डा. सिंदर पुरेवाल फ्लीटवुड-पोर्टकैलज, बोब सरोआ मारखम, जसराज सिंह हल्लण कैलग्री लायन व बौबी सिंह स्कार्बो अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
एनडीपी पार्टी द्वारा हरविंदर कौर संधू ओकानागन-सूसप, जिगर पटेल रीजाईना, सबीना सिंह सनिच व गुरचरन सिंह सिद्धू कैलग्री से सांसद बनने के लिए मैदान में हैं।
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