क्या उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ को उनके पद से हटा सकता है विपक्ष? जानिए
मणिपुर हिंसा के मसले पर विपक्ष ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे रखा है, जिसपर 8 अगस्त से चर्चा होने की संभावना है। लेकिन, विपक्षी इंडिया गठबंधन सिर्फ मोदी सरकार से ही नाखुश नहीं है, वह देश के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनकड़ को भी उनके पद से हटाने की संभावनाएं तलाश रहा है।
सूत्रों के अनुसार विपक्षी इंडिया गठबंधन के कुछ सहयोगी राज्यसभा के सभापति जगदीप धनकड़ के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहते हैं। जानकारी के मुताबिक विपक्षी दलों के सभापति धनकड़ से कई शिकायतें हैं।

धनकड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहता है विपक्ष
टीओआई की एक रिपोर्ट के अनुसार विपक्षी इंडिया गठबंधन को लगता है कि जगदीप धनकड़ उनके साथ कथित 'पक्षपाती' व्यवहार करते हैं। यही नहीं, उन्हें लगता है कि वे उनकी 'जायज मांगों पर भी विचार नहीं करते।' विपक्षी दलों के सांसदों की उनसे सबसे बड़ी कथित शिकायत ये है कि उनकी वजह से ऊपरी सदन में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का कथित अपमान हुआ है।
विपक्षी इंडिया गठबंधन में इस मसले पर सहमति-रिपोर्ट
कांग्रेस समेत विपक्षी सांसदों ने हाल ही में आरोप लगाया था कि सदन में खड़गे के भाषण के दौरान उनकी माइक की आवाज बंद कर दी गई थी। जानकारी के मुताबिक धनकड़ के खिलाफ पहले दो पार्टियों ने मोर्चा खोला और विपक्षी दलों की बैठक में भी यह मुद्दा उठाया। सूत्रों के अनुसार फिर सभी दल शिकायतों और इसको लेकर आए सुझावों पर सहमत दिखे।
सभापति से विपक्षी दलों की हैं शिकायतें
एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा, 'उनकी बातें सुनी गईं, लेकिन नेतृत्व की ओर से अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।' विपक्षी दलों की ओर से लगातार यह शिकायतें सामने आई हैं कि राज्यसभा के सभापति की ओर से उनकी मणिपुर पर सदन में चर्चा कराने की मांग को लेकर स्थगन प्रस्ताव की रोज की मांग को दरकिनार किया है।
देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर हैं धनकड़
सवाल है कि क्या विपक्षी दल चाहें तो राज्यसभा के सभापति को उनके पद से हटा सकते हैं? गौरतलब है कि देश के उपराष्ट्रपति ही राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। इसलिए, जगदीप धनकड़ को उनके पद से हटाने का मतलब है कि उपराष्ट्रपति को उनके पद से हटाने की पक्रिया का पालन करना। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति के तौर पर कभी भी भंग नहीं होने वाले उच्च सदन की प्रतिष्ठा और गरिमा के संरक्षक होते हैं। यह देश के राष्ट्रपति के बाद दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है।
राज्यसभा में भी बहुमत की आंकड़ा सरकार की ओर
उपराष्ट्रपति को उनके पद से हटाने के लिए राज्यसभा से बहुमत से प्रस्ताव पारित होना आवश्यक है। अभी 237 सदस्यों वाले सदन में न तो सत्ता पक्ष के पास बहुमत है और न ही विपक्षी इंडिया गठबंधन के पास। लेकिन, जिस तरह से 9-9 सदस्यों वाली बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने अविश्वास प्रस्ताव और दिल्ली सेवा विधियेकों पर स्पष्ट तौर पर सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया है, उससे बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के पास अभी राज्यसभा में भी 130 से ज्यादा सांसदों का बहुमत है।
विपक्ष का ऐसा कोई भी प्रस्ताव सांकेतिक ही होगा!
यही नहीं, क्योंकि यह उपराष्ट्रपति को पद से हटाने का मामला है, राज्यसभा से अगर इसपर मुहर भी लग जाती है तो भी लोकसभा से इसकी मंजूरी जरूरी है। जबकि, लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी अकेले पूर्ण बहुमत में है। इसलिए अगर विपक्षी इंडिया गठबंधन ऐसा कोई प्रस्ताव लाता भी है तो वह सांकेतिक ही माना जा सकता है।












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