कोलकाता फर्जी टीकाकरण घोटाले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा-सीबीआई जांच की कोई जरूरत नहीं
कोलकाता, 7 जुलाई। कोलकाता फर्जी टीकाकरण शिविर में सात लोग गिरफ्तार पुलिस अब तक देब समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कथित नकली टीकाकरण विवाद की सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका को यह कहते हुए ठुकरा दिया है कि इस स्तर पर इसकी आवश्यकता नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि वह राज्य के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी वहीं महाधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया है कि जल्द ही आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा।

केएमसी के संयुक्त आयुक्त के रूप में देबंजन देब (28) ने कोलकाता में नकली टीकाकरण शिविर आयोजित किए थे। तृणमूल कांग्रेस की सांसद मिमी चक्रवर्ती सहित 100 से अधिक लोगों को नकली टीके लगवाने के बाद खुलासा होने पर उन्हें 23 जून को गिरफ्तार किया गया था।
कोलकाता फर्जी टीकाकरण शिविर में पुलिस अब तक देब समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। बुधवार को विशेष जांच दल ने नकली टीकाकरण रैकेट के मास्टरमाइंड को अपने कार्यालय की जगह किराए पर देने वाले सातवें व्यक्ति को गिरफ्तार किया। एचटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, अशोक कुमार रॉय के रूप में पहचाने जाने वाले व्यक्ति ने दक्षिण कोलकाता में अपने कार्यालय की जगह देबंजन देब को किराए पर दी थी और अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को नकली कोरोनावायरस वैक्सीन लेने के लिए मिला था।
गौरतलब है कि मामला सामने आने के बाद केंद्र ने पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट मांगी थी। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी सहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें सामने आने के बाद देब ने मंत्रियों सहित टीएमसी नेताओं के साथ घनिष्ठ संबंध साझा किए। बंगाल कांग्रेस ने टीकाकरण घोटाले की न्यायिक जांच की मांग की।
हालांकि, टीएमसी नेताओं ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार नकली टीकाकरण शिविरों से जुड़ी नहीं है। उसने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार छोटी चीजों को अनुपात से बाहर करने के लिए एजेंसियों का उपयोग कर रही है। पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने भी फर्जी टीकाकरण अभियान को लेकर राज्य सरकार को घेरा है, पार्टी अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस पार्टी को राज्य पुलिस या केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) पर कोई भरोसा नहीं है।












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