जवान तेज बहादुर से पहले CAG भी उठा चुकी है सेना के खाने पर सवाल

वर्ष 2016 में संसद में आई थी कैग की रिपोर्ट जिसमें सैनिकों को मिल रहे घटिया क्‍वालिटी के खाने का जिक्र था। रिपोर्ट जम्‍मू कश्‍मीर में डेप्‍लॉय ट्रूप्‍स को मिलने वाले राशन पर आधारित थी।

नई दिल्‍ली। बॉर्डर सिक्‍योरिटी फोर्स (बीएसएफ) कॉन्‍सटेबल तेज बहादुर यादव ने फेसबुक पर एक वीडियो पोस्‍ट करने के साथ ही एक ऐसे राज से पर्दा उठा दिया है जिसके बारे में जानते तो सब थे लेकिन कोई जिक्र नहीं करना चाहता था। तेज बहादुर यादव ने बताया है कि कैसे उन जैसे तमाम जवानों को घटिया खाना सप्‍लाई किया जा रहा है। यह वीडियो तो बीएसएफ का है लेकिन एक रिपोर्ट आई थी जिसमें इंडियन आर्मी का जिक्र था।

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वर्ष 2016 में आई थी रिपोर्ट

वर्ष 2016 में कंप्‍ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल की एक रिपोर्ट संसद में पेश की गई थी। इस रिपोर्ट में जम्‍मू कश्‍मीर और नार्थ ईस्‍ट में डेप्‍लॉयड ट्रूप्‍स के बारे में बात बताई गई थी। कैग की इस रिपोर्ट में कहा गया था कि पूर्व में सैनिकों को खाने-पीने के लिए जो सामान दिया गया वह एक्‍सपायरी डेट का था। इसकी वजह से सैनिकों में असंतोष की बात भी रिपोर्ट में कही गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि सैनिकों में इस बात को लेकर खासा असंतोष था कि उन्‍हें कम और घटिया क्‍वालिटी का राशन दिया जा रहा है। इसमें खराब क्‍वालिटी का मीट और ताजी सब्जियां शामिल थीं। कैग ने यह रिपोर्ट सैनिकों की ओर से मिले फीडबैक के आधार पर तैयार की थी। रिपोर्ट में 68 प्रतिशत सैनिकों ने उन्‍हें मिले खाने को असंतोषजनक करार दिया था। कैग ने उस रिपोर्ट की ओर भी ध्‍यान दिलाया था जो वर्ष 2011 में पार्लियामेंट्री अकाउंट कमेटी की ओर से तैयार की गई थी। इस रिपोर्ट में विस्‍तार से बताया गया था कि कैसे सप्‍लाई चेन मैनेजमेंट को और बेहतर बनाया जा सकता है। सेना ने उस रिपोर्ट की सिर्फ 12 सिफारिशों को लागू किया था। रिपोर्ट इस बात की जानकारी भी दी गई थी कि सेना हर वर्ष 1.3 मिलियन सैनिकों के लिए राशन खरीदने के लिए 1,500 करोड़ रुपए खर्च करती है। इस प्रक्रिया में ताजा राशन की खरीद के लिए उत्‍तर, पश्चिम और सर्दन कमांड्स में कोई प्रतियोगिता नहीं थी। इसका नतीजा था कि ऊंची कीमत पर खराब क्‍वालिटी का राशन सप्‍लाई किया जा रहा था। पढ़ें-जानिए भारत और दुनिया के बाकी सैनिक कैसा खाना खाते हैं

जरूरत से ज्‍यादा सामान की खरीद

आर्मी खरीद संस्‍थान को जरूरत भर का राशन नहीं मिल सका तो फिर स्‍थाई खरीद से ऊंची कीमतों पर राशन खरीदा गया। इसकी वजह से एक सिंगल वेंडर की स्थिति पैदा हुई और इस स्थित‍ि ने कई तरह के खतरों को भी जन्‍म दिया। कैग ने पूरी प्रक्रिया को बदलने की मांग भी की थी। रिपोर्ट के मुताबिक उत्‍पादक संघ की मौजूदगी एक बड़ा खतरा है जिसे नजरअंदाज किया जा रहा है। रिपोर्ट की मानें तेा 82 प्रतिशत खरीद तीन से भी कम संविदा पर होती है और 36 प्रतिशत एकल संविदा पर निर्भर है। वेस्‍टर्न और ईस्‍टर्न कमांड में फलों और सब्जियों की खरीद में बड़ा अंतर देखा गया। फील्ड ऑडिट में पता लगा कि सब्जियों और फलों यूनिट्स में दिए हुए मिश्रण के मुताबिक नहीं थीं। 423 प्रकार की सब्जियों में सिर्फ 74 तरह की ही सब्जियां उपलब्‍ध थीं। रिपोर्ट में मंत्रालय और आर्मी हेडक्‍वार्टर में सामंजस्‍य न होने की बात भी कही गई थी। इसकी वजह से खाना पकाने का तेज, टिन जैम, दाल और, मिल्‍क पाउडर और चीनी को जरूरत से ज्‍यादा खरीद लिया गया था।

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