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गन्ना किसानों को लेकर केंद्र का अहम फैसला, सरकार ने FRP बढ़ाकर 290 रुपए प्रति क्विंटल किया

नई दिल्ली, अगस्त 25: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट ने बुधवार को देश के गन्ना किसानों को लेकर अहम फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने गन्ने का समर्थन मूल्य (एफआरपी) बढ़ाने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में गन्ने का एफआरपी बढ़ाकर 290 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया गया है। केंद्र सरकार ने 5 रुपए प्रति क्विंटल गन्ने पर मूल्य बढ़ाए हैं। इससे पहले एफआरपी 285 रुपये प्रति क्विंटल था। सरकार के मुताबिक इस फैसले का फायदा 5 करोड़ से ज्यादा गन्ना किसानों और उनके आश्रितों को मिलेगा।

Cabinet increases sugarcane fair and remunerative price by Rs 5 to Rs 290 per quintal

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    केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि, आज कैबिनेट बैठक में गन्ने पर दिए जाने वाले फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस (एफआरपी) को बढ़ाकर 290 रुपये प्रति क्विंटल करने का फैसला हुआ है, ये 10% रिकवरी पर आधारित होगा। अगर किसी किसान की रिकवरी 9.5% से कम होती है तो उन्हें 275.50 रुपये प्रति क्विंटल मिलेंगे। उन्होंने बताया कि पिछले साल फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस में 10 रु प्रति क्विटंल की बढ़ोतरी की गई थी। रिकवरी के मायने हैं कि गन्ने से कितनी चीनी निकल पाती है।

    पीयूष गोयल ने आगे कहा कि, पीयूष गोयल ने बताया कि शुगर का एफआरपी 290 प्रति क्विंटल- जो 10 फीसदी रिकवरी पर आधारित होगा। शुगर का 70 लाख टन एक्सपोर्ट होगा। जिसमें से 55 लाख टन हो चुका है। अभी 7.5 फीसदी से 8 फीसदी एथोनॉल की ब्लेंडिंग हो रही है। अगले कुछ साल में ब्लेंडिंग 20 फीसदी हो जाएगा। 2013-14 के दौरान देश में गन्ने का एफआरपी 210 रुपए प्रति क्विंटल होता था जो अब बढ़कर 290 रुपे प्रति क्विंटल हो गया है, 7 साल में गन्ने के एफआरपी में 38 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी हुई है।

    गन्ना किसाने के बकाया भुगतान को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, 2020-21 में गन्ना किसानों को 91,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना था जिसमें 86,000 करोड़ का भुगतान हो गया है। ये दिखाता है कि केंद्र सरकार की योजनाओं के कारण अब गन्ना किसानों को पहले की तरह सालों-साल अपने भुगतान के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता है। एफआरपी वह न्यूनतम दाम होते है, जिस पर चीनी मिलों को किसानों से गन्ना खरीदना होता है। कमीशन ऑफ एग्रीकल्चरल कॉस्ट एंड प्राइसेज (सीएसीपी) हर साल एफआरपी की सिफारिश करता है।

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