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नागरिकता संशोधन कानून पर अब क्या कर रही मोदी सरकार ?

देश भर में नागरिकता संशोधन एक्ट के विरोध में जमकर बवाल मचा हुआ है। जानिए केन्‍द्र सरकार caa को लेकर क्या कदम उठाने जा रही है। There has been a lot of uproar in protest against the Citizenship Amendment Act across the country. Know what action the central government is going to take regarding caa.

बेंगलुरु। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चौतरफा जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन हो रहा है। नागरिकता कानून पर देशभर में प्रदर्शन को देखते हुए शुक्रवार को भी देश के कई हिस्सों में इंटरनेट बंद रखा गया है। नए नागरिकता कानून को भारतीय संसद में पास हुए करीब हफ्ता भर से ज्यादा हो चुका है लेकिन यह विरोध प्रदर्शन थमने के बजाय विकराल रुप धारण करता जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस नाग‍किता संसोधन कानून को विपक्षी दल और सामाजिक संगठन उपद्रव मचाए हुए है, उसको लेकर मोदी सरकार अब क्या कर रही हैं? आइए जानते हैं

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    caa

    बता दें नागरिकता संशोधन कानून के बाद देश दो वर्गों में विभाजित है। एक वर्ग इस कानून का समर्थन कर रहा है तो वहीं दूसरा वर्ग इसके विरोध में हैं। कानून को लेकर विरोध का आलम ये है कि देश की राजधानी दिल्ली हो या फिर अन्‍य प्रदेश की राजधानी, प्रदर्शनकारी सड़कों पर हैं और और जगह जगह हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है।

    Narendra modi

    वहीं नागरिकता संसोधन एक्ट CAAके विरोध में जामिया कालेज के छात्रों द्वारा मचाए गए तांडव और उस पर पुलिसिया कार्रवाई के बाद दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार सवालों के घेरे में है। मामले को लेकर लगातार सरकार की आलोचना हो रही है। घटना के बाद देश के गृह मंत्री अमित शाह पहली बार सामने आए हैं और उन्होंने पुलिस द्वारा लिए गए एक्शन पर संतोष जताया है।

    amit

    मीडिया मंच पर अमित शाह ने स्पष्ट लहजे में इस बात को स्वीकारा है कि यदि जामिया कैंपस के अंदर से पथराव हुआ। छात्रों ने बाहरी लोगों के साथ मिलकर उत्पात मचाया। बसें जलाई तो अगर पुलिस ने उनपर एक्शन लिया है तो इसका मतलब उन्होंने अपना फर्ज निभाया है। अमित शाह का मानना है कि यदि पुलिस ऐसा नहीं करती तो इसका मतलब ये है कि पुलिस अपना काम सही से नहीं कर रही है। गृह मंत्री ने ये भी कहा है कि यदि प्रोटेस्ट हिंसा का रूप लेता है तो उसे रोकना पुलिस का फर्ज है। जो उन्होंने सही तरह से निभाया।

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    इतना ही नहीं इतने विरोध-प्रदर्शन, अलोचना और चारो ओर से घिरने के बावजूद केन्‍द्र सरकार इस पर कदम पीछने के मूड में दिखती नजर नहीं आ रही हैं। नागरिकता संसोधन एक्ट को लागू करने के बाद उस पर अमल करने का श्रीगणेश प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने गुजरात से कर दिया है।

    गुजरात में की जा रही शुरुआत

    गुजरात में की जा रही शुरुआत

    गौरतल है कि नागरिकता सं'शोधन एक्ट गुजरात में शुक्रवार यानी आज से नागरिकता संशोधन कानून पर अमल शुरू हो रहा है। सूत्रों के अनुसार गुजरात के गांधीधाम और कच्छ में पाकिस्तान से आए 3500 हिंदुओं को नागरिकता दी जाएगी। खबर है कि इस दौरान केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया वहां मौजूद रहेंगे।

    पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से आए थे हिंदू शरणार्थी

    गुजरात के कच्छ, मोरबी, राजकोट और बनासकांठा में रह रहे हैं। पंजीकरण करने के बाद इनके बारे में सूचना केंद्रीय गृहमंत्रालय को भेजी जाएगी। इसके साथ ही गुजरात पहला ऐसा राज्य बन जाएगा जिसने नागरिकता संशोधन कानून के अनुसार शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करेगा।

    सिंध प्रांत से पलायन होकर यहां आए

    अधिकांश शरणार्थी सोढ़ा राजपूत समाज से हैं। ये सभी गुजराती भाषा बोलते हैं। पाकिस्तान के सिंध प्रांत से प्रताड़ना के कारण ये शरणार्थी पलायन कर भारत पहुंचे हैं। इनमें से कई ऐसे भी हैं जो पिछले 15-20 सालों से भारत में रह रहे हैं।

    मुसलमानों को इससे कोई खतरा नही है

    मुसलमानों को इससे कोई खतरा नही है

    माना जा रहा है कि गुजरात में इस पर शुरुआत के बाद देश के अन्‍य भाजपा शासित राज्यों में इसको अमल में लाया जाएगा। कांग्रेस, सपा, बसपा, लेफ्ट सभी कानून के विरोध में एकजुट हो गए हैं और आरोप लगा रहे हैं कि सरकार को इस कानून को वापस लेना चाहिए। वहीं बात अगर सत्ताधारी दल की हो तो भाजपा बार-बार इस बात को दोहरा रही है कि इस कानून के आ जाने से किसी भी समुदाय विशेषकर मुसलमानों की नागरिकता में कोई खतरा नहीं है। मामले को लेकर पशोपेश की अजीब सी स्थिति है लेकिन भाजपा इस पर आगे कदम बढ़ाती दिख रही है।

    ये विरोध आगे क्या गुल खिलाएगा?

    ये विरोध आगे क्या गुल खिलाएगा?

    अमित शाह ने इस बात को भी स्पष्ट किया है कि CAA से किसी को किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं होने वाला। शाह का मानना है कि एक्ट सिटिजनशिप छीनने का नहीं बल्कि देने का काम करता है। CAA पर चल रहा ये विरोध आगे क्या गुल खिलाएगा? इसका कितना नुकसान देश को होगा ? इन सभी सवालों का जवाब वक़्त की गर्त में छिपा है मगर जो वर्तमान है वो खुद इस बात की गवाही दे दे रहा है कि जब बात राजनीतिक हितों और सत्ता के लालच में विपक्ष साम दाम दंड भेद करते हुए एकजुट हो जाएगा और ऐसा बहुत कुछ करेगा जिसकी कल्पना शायद ही इस देश की राजनीति या फिर इस देश की जनता ने की हो।

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