इस हफ्ते के अंत तक चीन को बहुत बड़ा झटका देगी मोदी सरकार, जानिए क्या है तैयारी
नई दिल्ली- चीन की साम्यवादी तानाशाही शासन ने लद्दाख की गलवान घाटी में पिछले महीने जो आग लगाई थी, उसकी तपिश अब उसे हिंद महासागर से लेकर दक्षिण चीन सागर तक में महसूस हो रही होगी। लेकिन, लगता है नरेंद्र मोदी की सरकार उसे इतने भर से माफ करने के लिए तैयार नहीं है। कारोबार के क्षेत्र में पिछले एक महीने में चीन को भारत अबतक हजारों करोड़ रुपये का झटका दे चुका है। लेकिन, अब एक ऐसा फैसला लिया जा चुका है, जिसकी धधक बीजिंग तक दिखाई देगी। दरअसल, केंद्र सरकार ने जो 'कंज्यूमर प्रोटेक्शन (ई-कॉमर्स) रूल्स, 2020' तैयार किया है, उससे चीन की सारी चतुराई ही खत्म हो सकती है। यह नई नियावली इसी हफ्ते में लागू होने वाली है, जिससे भारत में उसके विशाल इलेक्ट्रॉनिक कारोबार ठप होने की संभावना है।
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इस हफ्ते चीन को बहुत बड़ा झटका देगी सरकार
इस हफ्ते के अंत तक इलेक्ट्रॉनिक के खुदरा विक्रेताओं को लेकर नया नियम लागू होने जा रहा है। नए नियम के मुताबिक विक्रेताओं के लिए अपने इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर 'कंट्री ऑफ ऑरिजिन' यानि जिस देश में वह प्रोडक्ट बना है, उसका नाम देना अनिवार्य हो जाएगा। अब गलवान घाटी की घटना के बाद भारत और चीन में जारी तनाव के बीच इलेक्ट्रॉनिक सामानों के बेचने के नियमों में हो रहे इस बदलाव के महत्त्व को समझिए। मतलब अब कोई भी उपभोक्ता सामान पर लिखे देश के नाम से जान जाएगा कि वह बना कहां है। यानि उन्हें मालूम हो जाएगा कि वो जो सामान खरीद रहे हैं, वह भारत में बना है या दूसरे देश से आया है और दूसरे देश से आया है तो वह देश कौन सा (चीन) है। जाहिर है कि इस समय देश में इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों में चीन के माल की ही भरमार है और अगर प्रोडक्ट पर यह बात प्रामाणिकता के साथ लिखी रहेगी तो मौजूदा माहौल में उपभोक्ता उसका नाम देखकर उसे खरीदने का इरादा बदल भी सकते हैं।

नियम का पालन नहीं होने पर कार्रवाई
इसकी जानकारी देते हुए उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि इस नियम का पालन नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि 'कंज्यूमर प्रोटेक्शन (ई-कॉमर्स) रूल्स, 2020' सभी इलेक्ट्रॉनिक खुदरा विक्रेताओं (ई-टेलर्स) पर लागू होगा, जो भारत में या विदेशों में रजिस्टर्ड हैं, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं को सामान बेच रहे हैं या सर्विस मुहैया करवा रहे हैं। जाहिर है कि ऐसे में विक्रेता भी देश का नाम देखकर ही सामान बेचना चाहेगा, जिससे चीन का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। खासकर तब जब देश में चीन के सामानों के बायकॉट करने की मुहिम छिड़ी हुई है।

नियमों में यह भी हो रहा है बदलाव
यह नहीं नए नियमों के मुताबिक ई-कॉमर्स कंपनियों को भी सामानों के दाम और दी जा रही सेवाओं का पूरा ब्रेकअप देना अनिवार्य किया जा रहा है। यही नहीं कंपनी को सामानों की एक्सपायरी डेट और कंट्री ऑफ ऑरिजिन जैसी जानकारियों खरीदारों को खरीदारी से पहले ही देनी होगी, ताकि उसे पता रहे कि वह जो सामान खरीद रहा है, वह बना कहां है। यही नहीं ई-टेलर्स कंपनियों को पहले ही सामान के रिटर्न, रिफंड, एक्सचेंज, वारंटी-गारंटी, शिकायतों के निवारण जैसी जानकारियों का भी पूरा विवरण पहले से देना होगा ताकि खरीदार पूरी जानकारी के मुताबिक ही निर्णय ले।

चीन को लग चुका है हजारों करोड़ का झटका
बता दें कि भारत पहले ही 59 चाइनीज ऐप पर बैन लगाकर ड्रैगन को बड़ा झटका दे चुका है। उसके बाद केंद्र और कई राज्य सरकारों ने अपने बड़े-बड़े प्रोजेक्ट से चाइनीज कंपनियों का बाहर कर दिया है। कुल मिलाकर चीनी कंपनियों को हजारों करोड़ की चपत लगाई जा चुकी है, जिसकी मार आखिरकार कम टैक्स उगाही के रूप में चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार पर भी पड़ रही है। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर निर्माण वाले देश का स्पष्ट जिक्र करने से उसका बहुत बड़ा कारोबार ठप होने की संभावना है।












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