नागरिकता संशोधन बिल का विरोध करेगी BSP, मायावती ने बताया- पूर्णतः विभाजनकारी व असंवैधानिक
नई दिल्ली। लोकसभा से पास होने के बाद नागरिकता संशोधन बिल आज दोपहर 12 बजे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। दोपहर 2 बजे से इसपर चर्चा शुरू होगी। इस विधेयक के विरोध में विपक्ष के लामबंद होने के बावजूद सत्तारूढ़ भाजपा को उम्मीद है कि बुधवार को यह विधेयक जब राज्यसभा में लाया जाएगा तो इसे आसानी से पारित करवा लिया जाएगा।

अब इस बिल के विरोध में बीएसपी भी सामने आ गई है। बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि ये विधेयक पूर्णतः विभाजनकारी व असंवैधानिक है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि ' बीएसपी ने लोकसभा में इसके विरोध में अपना मत दिया है और आज राज्यसभा में भी बीएसपी का यही स्टैण्ड रहेगा।'
जान लीजिए क्या है नागरिकता संशोधन बिल
नागरिकता संशोधन विधेयक का उद्देश्य छह समुदायों - हिन्दू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध तथा पारसी - के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है। बिल के जरिये मौजूदा कानूनों में संशोधन किया जाएगा, ताकि चुनिंदा वर्गों के गैरकानूनी प्रवासियों को छूट प्रदान की जा सके। चूंकि इस विधेयक में मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया है, इसलिए विपक्ष ने बिल को भारतीय संविधान में निहित धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए उसकी आलोचना की है। खबरों के अनुसार, नए विधेयक में अन्य संशोधन भी किए गए हैं, ताकि 'गैरकानूनी रूप से भारत में घुसे' लोगों तथा पड़ोसी देशों में धार्मिक अत्याचारों का शिकार होकर भारत में शरण लेने वाले लोगों में स्पष्ट रूप से अंतर किया जा सके।
देश के पूर्वोत्तर राज्यों में इस विधेयक का विरोध किया जा रहा है, और उनकी चिंता है कि पिछले कुछ दशकों में बांग्लादेश से बड़ी तादाद में आए हिन्दुओं को नागरिकता प्रदान की जा सकती है। नागरिकता (संशोधन) विधेयक का संसद के निचले सदन लोकसभा में आसानी से पारित हो जाना तय है, लेकिन राज्यसभा में, जहां केंद्र सरकार के पास बहुमत नहीं है, इसका पारित हो जाना आसान नहीं होगा।












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