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बंद होने के कगार पर पहुंच गई थी BSNL, खराब नीतियों, तो कभी लाल फीताशाही ने डुबोया

BSNL News: भारत संचार निगम लिमिटेड यानी बीएसएनएल लगभग बंद होने के कगार पर पहुंच गई थी, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। बीते कुछ दिनों से देशभर में बीएसएनएल के नए 4G सिम की बिक्री भी बढ़ चुकी है। इसके साथ ही बीएसएनएल खुद भी लोगों को अपने नेटवर्क पर स्विच करने को लेकर प्रोत्साहित कर रहा है।

दरअसल हाल ही में जियो,एयरटेल समेत सभी टेलीकॉम कंपनियों ने अपने रिचार्ज प्लान के भारी भरकम बढ़ोतरी की है, लेकिन केंद्र सरकार की कंपनी बीएसएनएल अभी भी पुराने दाम पर ही लोगों को रिचार्ज उपलब्ध करा रही है। लिहाजा अब लोगों का झुकाव वापस बीएसएनएल की तरफ जा रहा है। हालात यह है कि आम लोग सोशल मीडिया पर हेश टैग का इस्तेमाल करके बीएसएनएल में पोर्ट करने का समर्थन कर रहे हैं।

BSNL

यह जानना भी दिलचस्प होगा कि कभी देश की सबसे प्रतिष्ठित टेलिकॉम कंपनी मानी जाने वाली बीएसएनएल बंद होने के कगार पर पहुंच गई थी। इसके पीछे एक नई बल्कि कई कारण थे। बीएसएनएल की बदहाली के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 फरवरी 2024 में संसद के भीतर में दिए गए अपने भाषण में कई कारण गिनाये थे।

वह 4 कारण जिसने BSNL को डुबोया

(1) प्रधानमंत्री मोदी ने बीएसएनएल-एमटीएनएल की दुर्दशा के लिए कांग्रेस के शासनकाल को दोषी बताया था। उन्होंने कहा था कि बीएसएनएल साल 2000 में आई थी, तब इसमें भारत सरकार की 100 फीसदी हिस्सेदारी थी। इसे कंपनी दूरसंचार विभाग नियंत्रित करता था। साल 2006 से 2012 की मध्य में इस कंपनी में लाला फीताशाही बढ़ गई। तब कम्पनी की टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने में ही महीनों लग जाते थे। लिहाजा कंपनी की बाजार हिस्सेदारी में गिरावट आई

(2) बीएसएनएल की बाजार में हिस्सेदारी घटने के बाद उस समय बाजार में मौजूद निजी टेलीकॉम कंपनियों ने खुद को मजबूत कर लिया। सही समय में सरकारी मंजूरियां नहीं मिलना भी एक कारण था,जिसे कम्पनी निजी ऑपरेटर्स से पिछड़ती चली गई और बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद बीएसएनएल प्राइवेट प्लेयर्स के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाई। संक्षेप में कहा जाये,तो बीएसएनएल की बदहाली के प्रमुख कारण सरकारी दखल, लाल फीताशाही और स्पेक्ट्रम नीलामी में भाग नहीं लेना था।

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(3) BSNL सरकारी ढर्रे पर ही काम करता था। कनेक्शन के लिए आवेदन से लेकर उसे बंद करने के लिए तक आवेदन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। मसलन किसी को ब्रॉडबैंड कनेक्शन लेना हो,तो वह पहले दफ्तर में जाकर आवेदन करेगा,तब एक लंबी प्रक्रिया के बाद उसे कनेक्शन मिलता। सरकारी अफसरों , कर्मचारियों के असहयोग, नेटवर्क समेत कई कई समस्याओं के चलते बीएसएनएल के परेशान ग्राहकों ने प्राइवेट कंपनियों का रुख किया।

(4) साल 2017 में 4जी स्पेस्ट्रम की नीलामी हुई, तब उसमे बीएसएनएल ने हिस्सा ही नहीं लिया। तत्कालीन सरकार ने कहा था कि उसे भी दूसरी निजी कंपनियों के दाम पर ही स्पेक्ट्रम दिए जाएंगे। बीएसएनएल को उस वक़्त ये दाम अधिक लगे, हालाकिं आगे चलकर मोदी सरकार ने 4जी सेवाओं आवंटित किया। यही कारण है कि आज भी बीएसएनएल के पास 5 जी की सुविधा नहीं हैं।

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ऐसे बदले हालात

जियो और एयरटेल समेत सभी निजी कंपनियों की मनमानी के बीच आज भी देश में बीएसएनएल मार्केट शेयर 9 फीसदी से अधिक है। लोग आज फिर बीएसएनएल में सिम पोर्ट कराना चाहते हैं, लेकिन हालत एक दिन में नहीं बदलने हैं, इसके पीछे कई अन्य कारण हैं।

साल 2019 में मोदी सरकार ने बीएसएनएल के लिए 70,000 करोड़ रुपये का रिवाइवल पैकेज लाया था। इसके बाद साल 2022 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बीएसएनएल-एमटीएनएल के रिवाइवल के लिए 1.64 लाख करोड़ रुपये के पैकेज को स्वीकृति दी थी।

हाल ही में टाटा कंसल्टेंसी सर्विस यानी टीसीएस भारत संचार निगम लिमिटेड यानी BSNL के मध्य 15000 करोड़ रुपये की डील हुई है, जिससे भारत में 4G नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा 5G नेटवर्क को लेकर जमीन तैयार करने का कार्य किया जाएगा। आगामी दिनों में भारत में तेज गति इंटरनेट सर्विस मिलेगी। इस नीति का लाभ बीएसएनएल को भी मिलेगा।

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