ब्रिटानिया बिस्कुट हो सकते हैं और महंगे, जानिए कितनी बढ़ सकती है कीमत
मुंबई, 1 फरवरी: कोरोना लॉकडाउन के दौरान जो एक चीज लाखों लोगों का सहारा बना था, वह है बिस्कुट। लोग बिना कुछ सोचे-समझे सीधे महानगरों से निकलकर पैदल ही हजारों किलोमीटर दूर अपने गांवों की ओर निकल पड़े थे। रास्ते में बिस्कुट ही उनका और उनके बच्चों के काम आ रहा था। उस दौरान इसकी खपत भी बढ़ गई थी। अब मार्केट वैल्यू के हिसाब से देश की सबसे बड़ी बिस्कुट निर्माता कंपनी ब्रिटानिया ने एक बार फिर से कीमतों में इजाफे का संकेत देकर बहुत बड़ा झटका दिया है। कंपनी ने हाल ही में अपने प्रोडक्ट के दाम 8 फीसदी तक बढ़ा दिए थे या फिर मात्रा ही कम कर दी थी।

आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ने की वजह से लागत बढ़ी
आवश्यक वस्तुओं की लागत बढ़ने की वजह से वैल्यू के हिसाब से देश की सबसे बड़ी बिस्कुट बनाने वाली कंपनी ब्रिटानिया इंडस्ट्री अपने प्रोडक्ट के दाम फिर बढ़ा सकती है। सोमवार को ब्रिटानिया इंडस्ट्री के मैनेजिंग डायरेक्टर वरुण बेरी ने यह संकेत दिए हैं। गौरतलब है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में ही कंपनी ने कीमतों में या तो 8% का इजाफा किया है या फिर प्रोडक्ट के पैकेट ही छोटे कर दिए हैं। बेरी का कहना है कि चीनी, दूध और आटे जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमतें उम्मीद से ज्यादा बढ़ गई हैं। उन्होंने कीमतों में इजाफे की ओर स्पष्ट इशारा करते हुए कहा कि 'अब, मुद्दा यह है कि तीसरी तिमाही में हमने जो मूल्य वृद्धि की है, वह सिर्फ दूसरी तिमाही में मुद्रास्फीति के लिए है।' उन्होंने कहा कि, 'लेकिन, तीसरी तिमाही में हमने आगे भी मुद्रास्फीति होते देखी है और हमें उसकी ओर ध्यान देना है।'

जानिए कितनी बढ़ सकती है कीमत ?
हालांकि, फिलहाल कीमतें बढ़ाए जाने को लेकर उन्होंने कोई समय-सीमा नहीं बताई है। लेकिन, उन्होंने कहा है कि दिसंबर की तिमाही में वार्षिक आधार में कमोडिटी की कीमतों में 20% का इजाफा हुआ है, जो कि तिमाही के हिसाब से 4% बढ़ी है। 8% जो कीमतें बढ़ाई हैं, उससे वस्तुओं की सिर्फ 14% मुद्रास्फीति संभाली जा सकती है, लेकिन हमें तो 20% मुद्रास्फीति को संभालना है। बेरी का कहना है कि 'आपको कम से कम 12% मूल्य वृद्धि की आवश्यकता होगी।' लेकिन, उन्होंने कहा है कि कीमतें तय करते वक्त इनके अलावा भी और फैक्टर पर भी नजर रखना होता है।

बिस्कुट खाने वालों को लग सकता है कीमतों का झटका
गुड डे और न्यूट्री चॉइस जैसे लोकप्रिय बिस्कुट ब्रांड के निर्माता के मुताबिक कुल लागत में कमोडिटीज का हिस्सा करीब 60% होता है। तीसरी तिमाही में चीनी और दूध की कीमतें 5% बढ़ गईं और आटे का भाव 6% बढ़ गया, जिसका हमें अंदाजा नहीं था। जबकि, दिसंबर की तिमाही के दौरान साल भर में औद्योगिक ईंधन की कीमतों में 57% और डीजल के दाम में 24% की बढ़ोतरी हो गई। एक साल में पैकेजिंग की सामग्री और लेमिनेट्स में भी क्रमश: 39% और 21% की मूल्य वृद्धि हो गई।

ग्रामीण इलाकों में भी लोग खूब खा रहे हैं ब्रिटानिया बिस्कुट
वैसे कीमतों में इजाफे के बावजूद नुस्ली वाडिया की स्वामित्व वाली कंपनी ने तीसरी तिमाही में मात्रा के हिसाब से बाजार में अपने प्रोडक्ट में 5% का विकास दर्ज किया है। यही नहीं, ज्यादातर कंपनियां कह रही हैं कि गांवों में खपत कम हुई है, लेकिन ब्रिटानिया ने इस ट्रेंड को बदला है। बेरी के मुताबिक, 'वास्तव में, ग्रामीण क्षेत्र में बाजार की हिस्सेदारी की बढ़ोतरी शहरी क्षेत्र की तुलना में दोगुनी है। इसलिए हम इसमें प्रगति जारी रखना चाहते हैं।'












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