नरेंद्र मोदी की सरकार के 2 साल का संक्षिप्त रिपोर्ट कार्ड
लोकसभा चुनावों के दौरान चले विज्ञापन 'मोदी जी को लाने वाले हैं, अच्छे दिन आने वाले हैं'....लोगों के भीतर कुछ इस हद तक अपना प्रभाव छोड़ गया कि भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2014 में अप्रत्याशित जीत हासिल की।

दरअसल पूरा का पूरा चुनाव महज एक चेहरे पर जीत लिया गया। और वो चेहरा था भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री 'नरेंद्र दामोदर दास मोदी।' लेकिन केंद्र में मौजूद एनडीए सरकार के दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर लोगों के जहन में अच्छे दिनों को लेकर सवाल भी है तो एसोचैैम ने करीबन लोगों को इस बात का जवाब देने की कोशिश भी की है। आईये जानते हैं मोदी सरकार का दो सालों का रिपोर्ट कार्ड क्या रहा?
मॉडल की तर्ज पर विकास कितना?
गुजरात को विकास मॉडल की तर्ज पर पेश करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को एक ख्वाब से रूबरू कराया कि भारत कैसे कुछ अलग दिख सकता है, एक नई सरकार के साथ। जिस पर लोगों ने विश्वास की मुहर भी लगा दी।
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हालांकि डिजिटल इंडिया, उज्जवला योजना, जन-धन योजना, फसल बीमा योजना आदि ढ़ेर सारी योजनाओं को पीएम नरेंद्र मोदी ने जनता के सामने भी रखा। लेकिन जनता का मानना है कि केंद्र सरकार की योजनाएं आम व्यक्ति तक बमुश्किल ही पहुंची हैं, इस ओर ध्यान देना अनिवार्य है कि जनता को इन योजनाओं का फायदा मिल सके।
कितनी हुई प्रगति?
एसोचैम ने मोदी सरकार के अब तक के काम को 10 में से 07 अंक देते हुए कहा है कि सरकार का काम प्रगति पर है। देश की व्यापक आर्थिक स्थित पर एसोचैम ने कहा, 'निश्चित रूप से सड़क, राजमार्ग, रेलवे और उर्जा क्षेत्र में कुछ साहसिक कदमों को उठाकर इकॉनॉमी को संभाला गया है।' हालांकि सरकार ने देश की बड़ी ग्रामीण जनसंख्या और कृषि क्षेत्र के सामने मौजूद समस्याओं से निपटने के लिए आक्रामक नीति अपनाई है।
'कार्य प्रगति पर है'
एसोचैम के अध्यक्ष सुनील कनोडिया के मुताबिक, कर विवादों के निस्तारण, कृषि सुधार, विनिवेश और महत्वपूर्ण जीएसटी विधेयक पर सरकार को अभी बहुत काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार को 'कार्य प्रगति पर है' वाली सरकार कहना ठीक होगा, जब तक कि रेलवे और राजमार्ग क्षेत्र में किए गए कामों का परिणाम सामने नहीं आ जाता।
सवाल जिन्हें मुद्दा बना दिया गया!
पीएम मोदी ने किसानों को योजनाओं के जरिए किसानों को खासा लाभान्वित करने की ओर पहल की है। फिर वो फसल बीमा योजना के जरिए हो या फिर जीवन ज्योति बीमा, नीम कोटेड यूरिया के माध्यम से। लेकिन लोगों की ओर से हो या फिर अन्य विपक्षी सियासी दलों की ओर से चंद सवालों पर अभी भी घेराबंदी करने की कोशिश जारी है।
जैसे कि लोगों के खाते में 15-15 लाख लाने के एक उदाहरण, डिजिटल इंडिया पर कांग्रेस द्वारा अपना हक जताने की कोशिश आदि। इन सब में प्रधानमंत्री मोदी के विदेशी दौरों पर सबसे ज्यादा सवाल खड़े किए गए।












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