BRICS Summit: यूएनएससी में सुधार की मांग वाले 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' को ब्रिक्स देशों ने स्वीकारा

BRICS Summit: यूएनएससी में सुधार की मांग वाले 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' को ब्रिक्स देशों ने स्वीकारा

नई दिल्ली, 9 सितंबर: 13वें ब्रिक्‍स शिखर सम्मेलन की गुरुवार को बैठक हुई है। इस बैठक में कई अहम मसलों पर बातचीत हुई। ब्रिक्स के सदस्य देशों के सदस्यों ने बैठक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रमुख अंगों में सुधार को लेकर प्रस्ताव को भी स्वीकार किया। इसे नई दिल्ली डिक्लेरेशन का नाम दिया गया है। इसके अलावा आतंकवाद, कोरोना और दूसरे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

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      ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नेताओं ने 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' को अपनाया और ग्लोबल गवर्नेंस को अधिक उत्तरदायी और प्रभावी बनाने के लिए बहुपक्षीय प्रणाली को मजबूत करने और सुधारने का संकल्प लिया। नेताओं ने स्वीकार किया कि संयुक्त राष्ट्र प्रणाली को समकालीन वास्तविकताओं के अनुकूल बनाने के लिए बदलाव की जरूरत है। बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार की माँग भारत पिछले काफी वक़्त से लगातार कर रहा है।

      भारत की अध्यक्षता में हुई बैठक

      दुनिया के पांच बड़े देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के संगठन ब्रिक्स की गुरुवार को वर्चुअल तरीके से हु बैठक की अध्यक्षता पीएम नरेन्द्र मोदी ने की। बैठक में अफगानिस्‍तान संकट, कोरोना की महामारी से लेकर आपसी सहयोग और समन्‍वय बढ़ाने तक कई मसलों पर बातचीत हुई।

      पीएम मोदी ने बैठक में कहा, भारत की अध्यक्षता के दौरान हमें सभी ब्रिक्स पार्टनर्स से भरपूर सहयोग मिला है। इसके लिए मैं आप सभी का आभारी हूं। डेढ़ दशक में ब्रिक्स ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। आज हम विश्व की प्रभावकारी आवाज हैं। विकासशील देशों की प्राथमिकताओं पर ध्यान देने के लिए ये मंच उपयोगी हो रहा है। मोदी ने कहा कि ब्रिक्स ने न्यू डेवलपमेंट बैंक, एनर्जी रिसर्च कॉर्पोरेशन जैसे प्लेटफॉर्म शुरू किए हैं। गर्व करने के लिए हमारे पास बहुत कुछ है। यह भी जरूरी है कि हम आत्मसंतुष्ट ना हों। हमें ये निश्चित करना है कि ब्रिक्स अगले 15 सालों के लिए उपयोगी हो।

      क्या है ब्रिक्स ?

      ब्रिक्स पांच देशों ब्राजील, रूस, इंडिया, चाइना, साउथ अफ्रीका का एक समूह है। ये साल 2011 में बना था। इसे बनाने का मकसद पश्चिम देशों के दबदबे का मुकाबला करना है। ब्रिक्स ने इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड और वर्ल्ड बैंक के मुकाबले अपना खुद का बैंक भी बनाया है।

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