डेल्टा वेरिएंट के मामलों में वृद्धि के दौरान दोनों डोज ले चुके 25% स्वास्थ्यकर्मियों को हुआ कोरोना- अध्ययन
हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि डेल्टा वेरिएंट के मामलों में वृद्धि के दौरान पूरी तरह से टीका लगवाने के बावजूद 25 प्रतिशत से अधिक स्वास्थ्यकर्मी कोरोना वायरस से संक्रमित थे।
नई दिल्ली, 31 अगस्त। हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि डेल्टा वेरिएंट के मामलों में वृद्धि के दौरान पूरी तरह से टीका लगवाने के बावजूद 25 प्रतिशत से अधिक स्वास्थ्यकर्मी कोरोना वायरस से संक्रमित थे। यह अध्ययन इस बात का संकेत है कि पूरी तरह से टीकाकरण के बावजूद हमें सावधानी बरतने की कितनी जरूरत है। इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (IGIB) और दिल्ली-एनसीआर स्थित मैक्स हॉस्पिटल्स द्वारा यह अध्ययन किया गया।

अध्ययन में पाया गया कि दिल्ली में डेल्टा वेरिएंट के प्रकोप के दौरान टीकाकरण की सफलता पहले की रिपोर्ट की तुलना में कहीं अधिक सामान्य थी। आईजीआईबी के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ताओं में से एक शांतनु सेनगुप्ता ने कहा कि हालांकि इस दौरान संक्रमण की गंभीरता कम थी और गंभीर बीमारियों से बचने के लिए टीकाकरण महत्वपूर्ण है।
उन्होंने आगाह किया कि जो 25 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित थे, उनमें से कई असिम्टोमेटिक थे, इसलिए संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए मास्क पहनना अति महत्वपूर्ण है। यह अध्ययन 95 प्रतिशत उन स्वास्थ्यकर्मियों पर किया गया जिन्होंने कोरोना की दोनों डोज ले ली थीं। टीकाकरण के 45-90 दिनों के बाद उनका मूल्यांकन किया गया। 95 में से 25 प्रतिशत को कोरोना से संक्रमित पाया गया। अध्ययन में कहा गया कि ये 25 प्रतिशत लोग कोरोना से भले ही संक्रमित मिले लेकिन इनमें लक्षण घातक नहीं थे, जिससे साफ पता चलता है कि संक्रमण से लड़ने के लिए वैक्सीन कितनी महत्वपूर्ण है।
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इसके साथ-साथ वैक्सीन लगवाने के बाद भी इन स्वास्थ्यकर्मियों ने नियमित रूप से मास्क पहना और कोरोना के दिशा-निर्देशों का पालन किया, जिसकी वजह से इनमें ज्यादा घातक लक्षण दिखाई नहीं दिए। यह अध्ययन 597 स्वास्थ्यकर्मियों पर किया गया।












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