ब्रह्मोस सुपरसॉनिक मिसाइलों को लेकर DRDO ने दिया बड़ा अपडेट, जानिए भारत कब से शुरू करेगा निर्यात
Brahmos supersonic cruise missiles: भारतीय रक्षा क्षेत्र अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ रही है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने कहा है कि भारत अगले 10 दिनों में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के लिए ग्राउंड सिस्टम का निर्यात शुरू करेगा।
डीआरडीओ प्रमुख समीर वी. कामत ने जानकारी देते हुए कहा कि, इस साल मार्च तक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें भेजे जाने की उम्मीद है। यह घोषणा रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में, खासकर सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के क्षेत्र में भारत की प्रगति को दिखाती है।

ब्रह्मोस सुपरसॉनिक मिसाइलों के लिए ग्राउंड सिस्टम निर्यात करने का फैसला अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ स्वदेशी क्षमताओं को साझा करने के एक रणनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
समाचार एजेंसी से बात करते हुए, वी. कामत ने सशस्त्र बलों में डीआरडीओ द्वारा विकसित उत्पादों को शामिल करने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने डीआरडीओ द्वारा विकसित कई सामरिक मिसाइलों को जल्द ही शामिल किए जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने LCA Mk-1A, Arjun Mk-1A और QRSAM और आकाश मिसाइल प्रणाली के लिए स्क्वाड्रन की बढ़ी हुई संख्या के बारे में भी बात की।
वी. कामत ने कहा है कि डीआरडीओ ने जिन 307 ATAGS बंदूकों को विकसित किया है, उसके लिए भी इस साल के आखिर तक विदेश से ऑर्डर आ सकते हैं। बता दें कि 307 ATAGS बंदूकों का निर्माण भारत फोर्ज और टाटा एडवांस्ड सिस्टम जैसी निजी क्षेत्र की कंपनियां कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि, "विकास अब पहले की तुलना में बहुत तेजी से हो रहा है। मेरा अनुमान है कि 60% या 70% से अधिक उत्पाद पिछले 5-7 वर्षों में शामिल किए गए हैं। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे यह दर नाटकीय रूप से बढ़ने वाली है।"












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