BrahMos: दुश्मनों को दिन में तारे दिखाती है ये मिसाइल, क्या है इसकी खासियत, क्यों कहते है इसे 'ब्रह्मोस'?
BrahMos: भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के बीच लखनऊ में आज ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट का शुभारंभ किया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वर्चुअल तरीके से उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए, उन्होंने कहा कि 'आज का दिन खास ही नही बल्कि ऐतिहासिक है और मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से भी काफी महत्त्वपूर्ण है।'
क्योंकि मैंने अपने शहर लखनऊ के लिए, एक सपना देखा था, कि मेरा शहर, भारत के रक्षा क्षेत्र को मज़बूत करने में, एक बड़ा योगदान दे, वह सपना अब पूरा हो रहा है।'
आपको बता दें कि लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल की प्रोडक्शन यूनिट 300 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई है। इस खास मौके पर सीएम योगी ने कहा है कि आतंकवाद कुते की पूंछ है, जो कभी सीधा नहीं होगा, ऑप्रेशन सिंदूर में सभी ने ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत देखी है। हम सभी पीएम मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहे हैं।

ब्रह्मपुत्र और मॉस्कवा से मिलकर बना 'ब्रह्मोस'
गौरतलब है कि ब्रह्मोस मिसाइल भारत की सबसे घातक और आधुनिक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है। ये इंडिया और रूस का ज्वाइंट वेंचर है। इसका नाम भारत की "ब्रह्मपुत्र" और रूस की "मॉस्कवा" को मिलाकर रखा गया है और इसी वजह से इसे ब्रह्मोस मिसाइल कहते हैं।
सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है 'ब्रह्मोस'
ये सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसकी रेंज 290 किमी से 800 किमी तक ही है तो वहीं इसकी स्पीड 2.8 से 3.0 मैक है यानी ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज है और इसका वजन करीब 3,000 किलोग्राम के आस-पास है। इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये जल, थल और वायु - तीनों माध्यमों से लॉन्च की जा सकती है।

ब्रह्मोस की विशेषताएं
- यह हवा में ही मार्ग बदल सकती है और चलते फिरते लक्ष्य को भी भेद सकती है।
- यह मिसाइल तकनीक थलसेना, जलसेना और वायुसेना तीनों के काम आ सकती है।
- यह 10 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर सकती है।
- रडार ही नहीं किसी भी अन्य मिसाइल पहचान प्रणाली को धोखा देने में सक्षम है।
- ब्रह्मोस अमेरिका की टॉम हॉक से लगभग दुगनी अधिक तेजी से वार कर सकती है।
- यह मिसाइल 1200 यूनिट ऊर्जा पैदा कर सकती हैै।












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