चीन बॉर्डर पर होगी ब्रह्मोस मिसाइल की तैनाती? सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने जो कहा उसके मायने समझिए

नई दिल्ली, 12 नवम्बर। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के साथ तनाव और चीनी सैन्य निर्माण की खबरों के बीच केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में महत्वाकांक्षी चार धाम सड़क परियोजना का समर्थन किया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चारधाम प्रोजेक्ट के समर्थन में जो तर्क दिए हैं वे संकेत करते हैं कि भारत चीन सीमा को लेकर बड़ी योजना पर काम कर रहा है।

ब्रह्मोस को लेकर कही ये बात

ब्रह्मोस को लेकर कही ये बात

12000 करोड़ रुपये की रणनीतिक 900 किलोमीटर लंबी महत्वाकांक्षी चारधाम परियोजना के तहत उत्तराखंड में ऑल वेदर रोड का निर्माण करना है जिसके राज्य में स्थित चार पवित्र धामों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ में हर मौसम में कनेक्टिविटी मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट में परियोजना के समर्थन करते हुए केंद्र ने कहा कि ब्रह्मोस जैसी मिसाइल और अन्य सैन्य उपकरणों के लिए व्यापक सड़कों की जरूरत है। अदालत ने गुरुवार को केंद्र की याचिका पर सुनवाई की जिसमें 8 सितम्बर 2020 के आदेश में संशोधन की मांग की गई थी। कोर्ट ने इस आदेश में चारधाम राजमार्ग परियोजना में निर्धारित कैरिजवे चौड़ाई 5.5 का पालन करने के लिए कहा गया था।

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    तो सेना कैसे लड़ेगी- अटॉर्नी जनरल

    तो सेना कैसे लड़ेगी- अटॉर्नी जनरल

    केंद्र ने शीर्ष अदालत से कहा कि अगर सेना अपने मिसाइल लांचर, भारी मशीनरी को उत्तरी भारत-चीन सीमा तक नहीं ले जा सकती है तो वह इसका बचाव कैसे करेगी। अगर सप्लाई चेन टूट जाती है तो युद्ध कैसे लड़ेगी।

    केंद्र की तरफ से मामले में पैरवी करते हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा "ये दुर्गम इलाके हैं जहां सेना को भारी वाहनों, हथियार, मशीनरी, मिसाइल और टैंक के साथ ही सैनिकों और खाद्य आपूर्ति को पहुंचाने की आवश्यकता होती है। हमारी ब्रह्मोस मिसाइल 42 फीट लंबी है और इसके लॉन्चर को ले जाने के लिए बड़े वाहनों की जरूरत है। अगर सेना अपने मिसाइल लॉन्चरों और मशीनरी को उत्तरी चीन की सीमा तक नहीं ले जा सकती है और सप्लाई चेन ही टूट जाती है तो वह युद्ध कैसे लड़ेगी।"

    महाधिवक्ता ने कहा "ईश्वर न करे अगर युद्ध छिड़ गया तो सेना कैसे निपटेगी अगर उसके पास हथियार ही नहीं हैं। हमें सावधान और चौकस रहना होगा। हमें तैयार रहना है। हमारे रक्षा मंत्री ने भारतीय सड़क कांग्रेस में भाग लिया और कहा था कि सेना को आपदा प्रतिरोधी सड़कों की जरूरत है।"

    'हम हाथ नहीं खड़े कर सकते'

    'हम हाथ नहीं खड़े कर सकते'

    उन्होंने कोर्ट से कहा "हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि सेना को सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएं। हम हाथ खड़े करके ये नहीं कह सकते (युद्ध के समय) कि हमारी सड़कें 5.5 मीटर ही चौड़ी हैं इसलिए हमारे ब्रह्मोस लांचर पहाड़ी पर नहीं जा सकते हैं। हमारे पास विशाल टाट्रा ट्रक, टैंक और अन्य रॉकेट लांचर को स्मच करने वाले वाहन हैं जिन्हें पहाड़ी पर जाने की आवश्यकता होती है।

    वेणुगोपाल ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और मानव गतिविधियों समेत जरूरी अध्ययन किए गए हैं। इसमें ढलान स्थिरीकरण, वनीकरण, वैज्ञानिक मल निपटान जैसे कदम उठाए गए हैं।

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