Boycott Maldives: PM मोदी से पहले राजीव गांधी ने लक्षद्वीप पर बिताई थी छुट्टियां, जानें हुआ था कैसा विवाद?
India Maldives Controversy: भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरा के बाद से ही यह केन्द्र-शासित प्रदेश चर्चाओं में छाया हुआ है। वहां के खूबसूरत नजारों के बीच उनकी तस्वीरों और वीडियो पर मालदीव के तीन मंत्रियों की अपमानजनक टिप्पणियां तो कभी भारतीयों के गुस्से के उबाल के बीच 'बॉयकॉट मालदीव' लगातार समाचारों की सुर्खियां बटोर रहा है।
आपको बता दें कि इससे पहले भी देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री का लक्षद्वीप दौरा बेहद चर्चाओं में छा गया था। उन पूर्व प्रधानमंत्री का नाम था राजीव गांधी।

करीब साढ़े-तीन दशक पहले उनकी लक्षद्वीप यात्रा पर आज भी कई बार राजनीतिक माहौल गर्म हो जाता है। पीएम मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद अचानक राजीव गांधी के उस दौरे पर भी चर्चाएं होने लगी हैं। क्योंकि साल-2019 में खुद पीएम मोदी भी राजीव गांधी की उस यात्रा को लेकर कांग्रेस को घेर चुके हैं। ये बात है साल-1987 की है, जब राजीव गांधी अपने परिवार और कुछ विदेशी मेहमानों के साथ लक्षद्वीप में छुट्टियां बिताने के लिए गए थे। तब वे लक्षद्वीप में 10 दिन से भी ज्यादा समय के लिए रुके थे।
विदेशी मेहमानों संग राजीव गांधी ने मनाई थी छुट्टियां
इंडिया टुडे मैगजीन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ भारतीय और कुछ विदेशी मेहमानों के साथ राजीव गांधी केरल के कोचीन से लगभग 465 किलोमीटर दूर लक्षद्वीप के बेहद खूबसूरत द्वीप बंगाराम पर पहुंचे थे। 16 दिसंबर 1987 को अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस को इससे जुड़ा एक आर्टिकल प्रकाशित हुआ था।
जिसमें लिखा था... प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पिछले साल का क्रिसमस अंडमान में बिताया था, वो इस साल यानी साल-1987 के क्रिसमस की छुट्टी अपने कुछ इटैलियन रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ लक्षद्वीप के एक निर्जन द्वीप पर बिताएंगे। इसी रिपोर्ट में ये भी लिखा गया था, कि इंजीनियर और कर्मचारी आधुनिक सुविधाओं के साथ उस द्वीप पर हेलीपैड और अस्थायी हट्स का निर्माण कर रहे हैं। इस द्वीप पर नारियल और मछलियों को छोड़कर सभी चीजों को मुख्य भूमि से लाया जाना है। जो यहां से लगभग 200 किमी से 400 किमी की दूरी पर हैं। यहां लाने के लिए हर चीज को एयरलिफ्ट करना पड़ेगा जिसमें कुक, पानी, जेनरेटर, वेटर और सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
राजीव गांधी की लक्षद्वीप छुट्टियों ने बढ़ाई थी राजनीतिक गर्मा-गर्मी
राजीव गांधी की लक्षद्वीप पर वो छुट्टियां राजनीतिक गर्मा-गर्मी की भी वजह बनी थी। कुछ विरोधी दलों ने उन्हें जनकर घेरा था साथ ही उनकी आलोचना भी की थी। इसकी मुख्य वजह थी भारत के जंगी बेड़े INS विराट का कथित तौर से इस्तेमाल किया जाना। कुछ विरोधी नेताओं की ओर से ये आरोप लगाए गए थे, कि राजीव गांधी की उन छुट्टियों की वजह से उनकी वीवीआईपी सुरक्षा में बड़ा खर्च हुआ था, कुछ विरोधी नेताओं ने ये दावे भी किए थे, कि उन्हीं के कारण INS विराट को 10 दिनों के लिए सागर में उतारा गया था।
जबकि INS विराट के एक दिन सागर में गतिशील रहने का खर्चा बेहद ज्यादा होता है। क्योंकि INS विराट एस्कॉर्ट जहाज़ों के पूरे दल-बल के साथ यात्रा करता था। साल-1988 में राजीव गांधी की इन छुट्टियों को ब्रेक करने वाली वरिष्ठ पत्रकार अनीता प्रताप ने, अपने एक बयान में कहा था, कि राजीव गांधी की उस यात्रा में INS विराट के प्रयोग से विवाद पैदा हुआ था, लेकिन वो जल्दी ही दब भी गया था। क्योंकि बात तत्कालीन प्रधानमंत्री से जुड़ी थी और उस पर भारतीय नौसेना मौन बनी हुई थी।












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