जम्मू-कश्मीर में चुनाव से पहले बीजेपी का गठबंधन पर रुख साफ, रविंदर रैना ने बताया क्या है प्लान!
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना के अनुसार, पार्टी ने जम्मू-कश्मीर में चुनाव-पूर्व कोई गठबंधन न करने का फैसला किया है। हालांकि, संभावित संयुक्त चुनाव के लिए कश्मीर घाटी में 8 से 10 स्वतंत्र उम्मीदवारों के साथ चर्चा चल रही है।
भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रही है और जल्द ही अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करेगी। रैना ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा, "भाजपा जम्मू-कश्मीर में अन्य राजनीतिक दलों के साथ चुनाव-पूर्व कोई गठबंधन नहीं करेगी।"

उन्होंने कहा कि अगर निर्दलीयों के साथ बातचीत सफल होती है, तो वे एक साथ चुनाव लड़ने की रणनीति विकसित करेंगे। पार्टी का लक्ष्य कश्मीर घाटी में अपने उम्मीदवार उतारना और बहुमत हासिल करना है।
रैना ने भाजपा की संभावनाओं पर भरोसा जताते हुए कहा, "हम जम्मू-कश्मीर में ज़्यादातर सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। हम कश्मीर घाटी में कुछ स्वतंत्र उम्मीदवारों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की रणनीति पर भी काम कर रहे हैं।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भाजपा एक महत्वपूर्ण जीत के लिए तैयार है और केंद्र शासित प्रदेश में सरकार बनाने का इरादा रखती है।
नए समावेशन का प्रभाव
पूर्व मंत्री चौधरी जुल्फिकार अली के भाजपा में शामिल होने पर रैना ने राजौरी-पुंछ क्षेत्र में उनके मजबूत समर्थन आधार पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "उनके शामिल होने से भाजपा को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा।" अली के पार्टी में शामिल होने से इन क्षेत्रों में उनकी स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की धारा 370 पर टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए रैना ने कहा कि अब्दुल्ला की पार्टी जम्मू-कश्मीर में अपना प्रभाव खो रही है। अब्दुल्ला ने कहा था कि नए जम्मू-कश्मीर सदन की पहली कार्रवाई अनुच्छेद 370 को रद्द करने के केंद्र के फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पारित करना होगा।
रैना ने अब्दुल्ला की टिप्पणियों को खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश करार दिया। उन्होंने दोहराया कि भाजपा चुनावों के लिए पूरी तरह तैयार है और उसे जम्मू और कश्मीर दोनों क्षेत्रों में बहुमत सीटें जीतने का भरोसा है।
भाजपा का ध्यान चुनाव-पूर्व गठबंधन किए बिना निर्णायक जीत हासिल करने पर है, साथ ही जहां लाभकारी हो, वहां स्वतंत्र उम्मीदवारों के साथ रणनीतिक सहयोग की संभावना तलाशना भी है। यह दृष्टिकोण जम्मू-कश्मीर में एक मजबूत सरकार स्थापित करने की उनकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।












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