विधानसभा चुनाव: कश्मीरी पंडित से ज्यादा मुसलमान होंगे भाजपा के चहेते
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। इससे पहले हमने खबर दी थी कि भाजपा कश्मीर के लिये कोई हिंदू मुख्यमंत्री तलाशने में जुट गई है और दूसरी तरफ फारुख अब्दुल्ला ने मैदान छोड़ने का मन बना लिया है। लेकिन आज हम दिखाने जा रहे हैं भाजपा का वो चेहरा, जो कश्मीरी मुसलमानों पर जान छिड़केगा न कि कश्मीरी पंडितों को रिझाने के प्रयास करेगा। जी हां ऐसा ही कुछ जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में होने जा रहा है।
असल में अब भाजपा नेतृत्व का सारा फोकस जम्मू-कश्मीर पर है। उसे तलाश उन राष्ट्रवादी नेताओं की है, जो उसकी टिकट पर कश्मीर घाटी से चुनाव लड़ सके। वह मुसलमानों को काफी तादाद में टिकट देना चाहती है। यानी कि भाजपा कुछ उन सामाजिक और राजनीतिक लोगों को भी टिकट देने के मूड में है,जो उसके विचारों को मानते हैं। बेशक से वे भाजपा के एक्टिव कार्यकर्ता ना भी रहे हों। भाजपा नेतृत्व को लगता है कि पार्टी को लेकर कश्मीरी अवाम का रुख बदला है। कारण यह है कि हालिया बाढ़ के दौरान भाजपा और केन्द्र सरकार ने जमकर काम किया।
भाजपा ने गतिविधियां बढाईं
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी ने अपने मिशन 44 के तहत राज्य में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। उसे उम्मीद है कि विस्थापित कश्मीरी पंडित मतदाता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कश्मीर की सियासत में कमल का फूल खिला देंगे। जानकार मानते हैं कि राज्य का युवा इस बार मोदी को मौका देने के मूड में लगता है। भाजपा को पूर्ण विश्वास है कि हिंदू वोट तो खुद ब खुद उसके खाते में आ जायेंगे, लेकिन मुसलमान भाईयों का दिल जीतना इतना आसान नहीं होगा।
87 सदस्यीय राज्य विधानसभा में कश्मीर घाटी से ही 50 सदस्य चुने जाते हैं। इनमें से चार लद्दाख के होते हैं। जम्मू क्षेत्र में तो जमकर खिलेगा कमल। उसे घाटी में भी कुछ सीटें मिल सकती हैं।
कहां-कहां है भाजपा का ज्यादा फोकस
भाजपा इस समय अनंतनाग, खानयार, त्राल, कुलगाम, गांदरबल, हब्बाकदल, सोनवार और अमीराकदल के साथ उत्तरी कश्मीर में सोपोर पर फोकस रखे हैं। इधर उसके कार्यकर्ता हैं। इसके अलावा कश्मीरी पंडित भी हैं।
भाजपा को कहीं न कहीं लगता है कि वह हब्बाकदल, अमीराकदल और सोपोर सीटें जीत सकती हैं। इन सबमें कश्मीरी पंडित खासी तादाद में हैं। उसे यकीन है कि कश्मीरी पंडित तो उसे ही वोट देंगे। भाजपा इस बार कश्मीर घाटी में खाता खोलने के लिए बेताब है।
इस बीच, कांग्रेस के सामने चुनाव की घोषणा होते ही संकट शुरू हो गया है। प्रदेश पार्टी प्रमुख सैफउदीन सोज ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। उनका तर्क है कि वे सारे प्रदेश को देख रहे हैं। इसलिए चुनाव नहीं लड़ेंगे। हालांकि उनके पुत्र सलमान का बारामुल्ला सीट से लड़ना तय है। कांग्रेस दो-चार दिनों के भीतर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है।













Click it and Unblock the Notifications