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नीतीश के अलग होने के बाद चौकस हुई भाजपा, 2024 में बड़े उलटफेर के लिए ये है अमित शाह की प्लानिंग

नई दिल्ली,09 सितंबर। भारतीय जनता पार्टी 2024 लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर जुट गई है। इसी क्रम में पार्टी ने सर्वेक्षणों से लेकर देर रात की रणनीति और बैठकों से लेकर मंत्रियों के दौरे फोकस क्षेत्रों पर काम करना शुरू कर दिया है। इस बार भी चुनावी रणनीति की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री के सबसे करीबी और गृहमंत्री अमित शाह को दी गई है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो नए क्षेत्रों और निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान करने पर जोर दिया जा रहा है, क्योंकि नेतृत्व को पारंपरिक गढ़ों में सीटों के नुकसान का डर है।

amit shah 2024 loksabha election plan

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इन सीटों पर रहेगा विशेष फोकस

इन सीटों पर रहेगा विशेष फोकस

पार्टी ने दक्षिणी और पूर्वी राज्यों में फैली 144 लोकसभा सीटों की पहचान की है, जो 2019 में हार गई थी। ऐसे में माना जा रहा है कि 2024 में इनमें से आधी सीटें प्रभावित हो सकती हैं। यही वजह है कि इन क्षेत्रों की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्रियों को दी गई है। ताकि वो क्षेत्र का आकलन कर सकें और उसी हिसाब से चुनावी रणनीति तैयार की जाए। इसको लेकर भाजपा के एक नेता का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि नई सीटें जीतकर हारी हुई सीटों की भरपाई की जा सके। भाजपा नेता के मुताबिक 2019 में जीती सीटों के संभावित नुकसान की भरपाई के लिए भी इसी तरह की रणनीति अपनाई गई थी और पार्टी को बंगाल में नई सीटों पर जीत मिली थी।

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    मंगलवार को अमित शाह, जेपी नड्डा ने की मंत्रियों से मुलाकात

    मंगलवार को अमित शाह, जेपी नड्डा ने की मंत्रियों से मुलाकात

    मंगलवार की शाम अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष ने अपनी जमीनी रिपोर्ट का जायजा लेने के लिए मंत्रियों की टीमों से मुलाकात की। शाह व नड्डा ने कुछ अन्य नेताओं के साथ देर रात तक बंद कमरे में मीटिंग की। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो बैठक में चुनावी रणनीति के अलावा, मैराथन बैठक, संगठनात्मक मुद्दों को लेकर भी चर्चा हुई।

    मतदाताओं के मूड का लगाया जा रहा है पता

    मतदाताओं के मूड का लगाया जा रहा है पता

    पार्टी के एक अन्य नेता की मानें तो जिन 144 सीटों पर पार्टी 2019 में चुनाव हारी थी। ऐसी सीटों के अलावा अन्य अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में भी नियमित रूप से सर्वेक्षण किया जा रहा है, ताकि मतदाताओं के मूड का पता लगाया जा सके और संबोधित किए जाने वाले मुद्दों की पहचान की जा सके। यही वजह है कि मंगलवार को बैठक में सर्वेक्षणों का बारीकी से विश्लेषण किया गया। भाजपा सूत्रों ने बताया कि मंगलवार की मीटिंग कोई पहली मीटिंग नहीं थी, आने वाले दिनों भाजपा नेतृत्व की तरफ से ऐसी बहुत सी बैठके की जाएंगी। हालांकि पार्टी प्रबंधकों का दावा है कि इस तरह की बैठकें संगठन को मजबूत करने और चुनाव जीतने पर केंद्रित "नई भाजपा" के लिए नियमित अभ्यास हैं।

    नीतीश कुमार के अलग होने से पार्टी आई एक्शन में

    नीतीश कुमार के अलग होने से पार्टी आई एक्शन में

    बिहार में नीतीश कुमार के एनडीए से अलग होने पर पार्टी एक्शन मूड में आ गई है। यही वजह है कि पार्टी के पदाधिकारियों को लगातार नई जिम्मेदारी सौंपी जा रही है और उनसे परिणाम देने के लिए भी कहा जा रहा है। नीतीश कुमार के अलग हो जाने के बाद पार्टी को लग रहा है कि बिहार और बंगाल में अच्छी संख्या में सीटों का नुकसान हो सकता है। यही वजह है कि पार्टी इन दोनों राज्यों के नुकसान की भरपाई करने के लिए अन्य राज्यों और सीटों पर फोकस कर रही है।

    विधानसभा चुनाव की बजाय पार्टी लोकसभा चुनाव पर अभी से कर रही फोकस

    विधानसभा चुनाव की बजाय पार्टी लोकसभा चुनाव पर अभी से कर रही फोकस

    पार्टी पदाधिकारियों की मानें तो शीर्ष नेतृत्व इस वक्त लोकसभा चुनाव को लेकर थोड़ा चिंतित है। क्योंकि नेतृत्व इस साल और 2023 में महत्वपूर्ण राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों पर अपनी ऊर्जा केंद्रित करने के बजाय दो साल दूर आम चुनाव पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। हिमाचल प्रदेश की सर्वेक्षण रिपोर्टों ने हमारी सरकार के खिलाफ गुस्से का इशारा किया है। गुजरात में आकलन से पता चला है कि AAP गहरी पैठ बना रही है। आपको बता दें कि हिमाचल प्रदेश और गुजरात में इस साल के अंत में मतदान होगा और अगले साल छह प्रमुख राज्यों- कर्नाटक, त्रिपुरा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मतदान होगा।

    साइडलाइन किए जा सकते हैं कई बड़े नेता

    साइडलाइन किए जा सकते हैं कई बड़े नेता

    वर्तमान भाजपा नेतृत्व के लिए लोकसभा चुनाव में जीत की तुलना में विधानसभा चुनाव जीतना अधिक कठिन काम रहा है। क्योंकि लोकसभा चुनाव के बाद में मोदी की लोकप्रियता स्थानीय समस्याओं पर हावी हो गई। पार्टी में कई लोग सोच रहे हैं कि क्या आंतरिक सर्वेक्षणों से पता चला है कि 2024 में इसे पूरा करना मुश्किल हो सकता है, जिसके लिए तात्कालिकता की आवश्यकता है। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों ने नेतृत्व की चिंता का एक अन्य कारण संगठनात्मक अशांति का भी संकेत दिया। सूत्रों ने कहा कि पार्टी के शीर्ष निर्णय लेने वाले निकाय - संसदीय बोर्ड में हालिया बदलाव, जिसमें वरिष्ठ मंत्री नितिन गडकरी को हटा दिया गया था, ने व्यापक पार्टी संगठन में असंतोष पैदा कर दिया है। सूत्रों की मानें तो भाजपा के एक नेता ने कहा है कि मौजूदा नेतृत्व को अशांति की हवा मिल गई है और वह पहले से तैयारी कर रहा है। क्योंकि 2024 के आसपास कई प्रमुख नेताओं को हाशिये पर धकेला जा सकता है।

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