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BJP President: दिल्ली जीतने के साथ नड्डा का मिशन पूरा, भाजपा के अगले अध्यक्ष की 3 बड़ी चुनौतियां क्या होंगी?

BJP President: दिल्ली में बीजेपी की सरकार बनने के साथ ही पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने की संभावना है। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा पहले ही अतिरिक्त कार्यकाल में चल रहे हैं। अमित शाह और जेपी नड्डा के कार्यकाल में भारतीय जनता पार्टी का जिस तरह से देशव्यापी विस्तार हुआ है, वह इतिहास में दर्ज हो चुका है। लेकिन, पार्टी का मिशन अभी भी अधूरा है और नए अध्यक्ष के सामने उसे पूरा करने की चुनौती होगी।

पार्टी आज हिंदी बेल्ट से निकलकर पूर्वोत्तर में भी सबसे बड़े राष्ट्रीय दल के रूप में स्थापित हो चुकी है। पूरब में ओडिशा तक में भगवा लहरा चुका है। पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी मुख्य विपक्षी पार्टी है और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को चुनौती देने में पूरी तरह से सक्षम हो चुकी है। ऐसे में जेपी नड्डा की जगह आगे जो भी बीजेपी अध्यक्ष बनेगा, उसके सामने प्रमुख चुनौतियां क्या होंगी,यह जानना भी दिलचस्प है।

bjp president

BJP President: लोकसभा चुनाव के बाद कैसा रहा जेपी नड्डा का कार्यकाल?

जेपी नड्डा को जब कार्यकाल का विस्तार मिला तो उनके सामने 2024 का लोकसभा चुनाव सबसे बड़ी चुनौती थी। पार्टी ने 400 के पार का नारा दिया, लेकिन वह 2014 के बाद पहली बार सिर्फ 240 सीटों पर सिमट कर रह गई। लेकिन, फिर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपनी कैबिनेट में न सिर्फ जगह दी, बल्कि स्वास्थ्य जैसा मंत्रालय देकर बता दिया कि उनका नड्डा पर अभी भी भरोसा बरकरार है।

नड्डा की अगुवाई में पार्टी आगे बढ़ी और हरियाणा में पहले से भी ज्यादा सीटों के साथ पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने में सफल रही। फिर महाराष्ट्र में भाजपा ने ऐतिहासिक रूप में पहली बार अकेले जादुई आंकड़े के करीब पहुंचने में सफलता हासिल की। राज्य में फिर से देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने।

बात यहीं नहीं रुकी। दिल्ली में बीजेपी न सिर्फ 27 साल बाद सत्ता में लौटी है, बल्कि इसे दो-तिहाई से भी ज्यादा बहुमत मिला है। जिस विपक्षी इंडिया ब्लॉक ने लोकसभा चुनावों में भाजपा को अपना बहुमत आने से रोक दिया था, वही बीजेपी आज एक बार फिर से विपक्षी दलों के मुकाबले अजेय नजर आने लगी है।

BJP Next President: भाजपा के अगले अध्यक्ष के लिए क्या चुनौतियां छोड़ जाएंगे जेपी नड्डा?

लेकिन, नड्डा के बाद जो भी बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेगा, उसके सामने तीन प्रमुख चुनौतियां होंगी, जिसे उसे प्राथमिकता देनी होगी।

BJP President: 1) भाजपा का दक्षिण विजय का मिशन है अधूरा

दक्षिण भारत में कर्नाटक ही एकमात्र राज्य है, जहां बीजेपी की सरकार बनती रही है। लेकिन, 2023 में वह भी इसके हाथ से निकल चुका है। तेलंगाना में आरएसएस (RSS) का नेटवर्क भी मजबूत है और पार्टी ने भी अपना एक जनाधार खड़ा किया है, लेकिन सरकार बनाने लायक स्थिति में आना अभी भी दूर की कौड़ी है।

तेलंगाना में भाजपा को काफी उम्मीदें हैं, लेकिन अभी तक उसे उसके हिसाब से सफलता नहीं मिल पाई है। राज्य में संघ का समर्थन पार्टी को लगातार मिल रहा है और यह उन प्रदेशों में शामिल है, जहां मेहनत और संघर्ष करने पर ओडिशा की तरह के नतीजे आने की संभावना बन सकती है।

केरल में संघ (RSS) का नेटवर्क बहुत ही मजबूत रहा है। बीजेपी भी वहां लगातार बढ़ रही है और 2024 में लोकसभा की एक सीट जीतकर पार्टी ने अपनी बढ़ती ताकत का परिचय भी दे दिया है, लेकिन फिर भी भाजपा वहां मुख्य भूमिका में कब आएगी, कहना बहुत मुश्किल है।

तमिलनाडु में पार्टी ने एक तेज-तर्रार और युवा नेता अन्नामलाई के हाथों में कमान दे रखी है। लेकिन, वहां आज भी द्रविड़ राजनीति से मुकाबला करना पार्टी के लिए लगभग असंभव नजर आता है। राज्य में पार्टी को लेकर सुगबुगाहट बढ़ी है, लेकिन अपने दम पर मुख्य भूमिका में आना अभी भी काफी मुश्किल लगता है।

आंध्र प्रदेश में पार्टी सत्ता के खेमे में जरूर आ चुकी है, लेकिन टीडीपी की जूनियर पार्टनर कहलाना पड़ रहा है। कुल मिलाकर उत्तर भारत की हिंदी बेल्ट की पार्टी कहलाने वाली बीजेपी के लिए दक्षिण विजय आज भी बहुत बड़ा सपना है।

इस वजह से पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती रहने वाली है। शायद यही वजह है कि एक बार फिर से किसी दक्षिण भारतीय नेता को यह जिम्मेदारी मिलने की अटकलें लग रही हैं, जिनमें से कर्नाटक से आने वाले केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और तेलंगाना के चर्चित नेता किशन रेड्डी और ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष के लक्ष्मण का नाम शामिल है।

BJP President: 2) बीजेपी का अगला नेतृत्व तैयार करने की जिम्मेदारी

बीजेपी का मौजूदा नेतृत्व बहुत ही मजबूत है और विपक्षी दलों के पास उससे मुकाबला करने लायक चेहरा नजर नहीं आता। लेकिन, पार्टी के पास दूसरी कतार के नेताओं का अभाव नजर आता है जो आने वाले वर्षों में मौजूदा नेतृत्व की जगह ले सकें। ऐसे में बीजेपी का जो भी अगला अध्यक्ष बनेगा, उसे पार्टी में नेतृत्व की एक ऐसी श्रेणी भी तैयार करनी पड़ेगी, जो आने वाले वर्षों में मौजूदा नेतृत्व से पार्टी की जिम्मेदारियां अपने कंधों पर उठाने के लिए तैयार रहें।

BJP President: 3) युवाओं के बीच बीजेपी की लोकप्रियता कायम रखने की जिम्मेदारी

2014 से केंद्र में जिस तरह से बीजेपी लोकप्रिय वोट के साथ सत्ता पर काबिज हो रही है, उसमें युवाओं की एक बहुत बड़ी भूमिका है। पार्टी के नए अध्यक्ष के सामने आगे आने वाले समय में युवाओं की ऐसी ही जमात को अपने साथ जोड़े रखना बहुत बड़ी चुनौती होगी। क्योंकि, विपक्ष की ज्यादातर दलों के पास नेतृत्व भाजपा के मुकाबले ज्यादा नया है, ऐसे में पार्टी को भी उस कलेवर में ढल कर आगे बढ़ना होगा, जिससे युवा हर हाल में इसके साथ जुड़े रहें। आने वाले वर्ष में पार्टी के लिए यह बहुत बड़ी चुनौती साबित होने वाली है।

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