BJP President के चुनाव में संघ की इन दो कठिन शर्तों ने कराई देरी, जानें RSS ने कौन सी खूबियों को दी है तरजीह
BJP President News: बीजेपी के नए अध्यक्ष के चुनाव को लेकर कहा जा रहा है कि श्राद्ध पक्ष के बाद इसका ऐलान हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक दावा किया जा रहा है कि संघ और पार्टी हाई कमान के बीच लगभग सहमति बन गई है। नए अध्यक्ष के नेतृत्व में ही बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा जाएगा।
मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल लोकसभा चुनाव 2024 तक ही था, लेकिन चुनाव में देरी की वजह से वह अभी तक पद पर हैं। संघ के जानकारों का कहना है कि इस बार संघ (RSS) ने अध्यक्ष चयन के लिए कुछ सख्त शर्तें रखी हैं, जिनके चलते पार्टी नेतृत्व किसी नाम पर सहमति नहीं बना पा रहा है।

Sangh ने नए अध्यक्ष के लिए तय किए पैमाने
राजनीति के विश्लेषकों का कहना है कि संघ की स्पष्ट राय है कि कि नया अध्यक्ष सिर्फ जातीय या क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए नहीं चुना जाना चाहिए। इसके बजाय, संगठन क्षमता और संवाद शैली को तरजीह दी जानी चाहिए। यानी आने वाला अध्यक्ष ऐसा चेहरा होना चाहिए, जो पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत रखे और जनता से सीधे जुड़ने की क्षमता रखता हो।
BJP President के चुनाव के लिए संघ की कठिन कसौटी
आरएसएस ने अपने सुझाव में कहा कि बीजेपी का अध्यक्ष पद क्षेत्रीय या जातीय समीकरणों को साधने के लिहाज से महत्वपूर्ण नहीं है। यह पद पार्टी और संगठन को मजबूत करने के लिए है। इसके चुनाव में संगठन क्षमता को ही तरजीह दी जानी चाहिए। संगठन क्षमता के साथ ही कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करना भी अनिवार्य गुण तय किया गया है। यही वजह है कि इस कसौटी पर कई नाम परखे जा रहे हैं, जिसमें पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर, शिवराज सिंह चौहान से लेकर बीजेपी के प्रवक्ता रहे सुधांशु त्रिवेदी भी शामिल हैं।
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RSS ने रखी अध्यक्ष पद के लिए विचारधारा के प्रति निष्ठा की शर्त
सोशल मीडिया की लोकप्रियता के दौर में भी संघ ने अध्यक्ष पद के लिए दूसरी अहम शर्त रखी है कि चुनाव करते हुए विचारधारा के प्रति निष्ठा महत्वपूर्ण तथ्य है। नया अध्यक्ष पार्टी की विचारधारा के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित रहा हो और संगठन में काम करने का अनुभव रखता हो। RSS चाहता है कि अध्यक्ष ऐसा नेता बने जिसने लंबे समय तक जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत किया हो। पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाया हो। यानी यह स्पष्ट है कि RSS अब ऐसा अध्यक्ष चाहता है जो सिर्फ एक चेहरा न होकर पार्टी की मूल विचारधारा का सच्चा प्रतिनिधि बने।
BJP के लिए ये दो शर्तें बनीं मुश्किल
बीजेपी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि संघ की तरफ से सुझाव मिलते हैं, लेकिन पार्टी उन्हें अनदेखा नहीं कर सकती है। इन्हीं दो शर्तों के कारण BJP अध्यक्ष के नाम का ऐलान टलता जा रहा है। कई नामों पर चर्चा हो चुकी है, लेकिन संघ की कसौटी पर अभी तक कोई नेता पूरी तरह खरा नहीं उतरा। सूत्र बताते हैं कि आने वाले हफ्तों में इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। बीजेपी हाई कमान और संघ दोनों ही इस पर सहमत हैं कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखकर की जाएगी। ऐसे में संघ की सख्त शर्तें आने वाले चुनावों की रणनीति पर गहरा असर डालेंगी।
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